Last Updated on January 24, 2026 11:44 pm by BIZNAMA NEWS

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) की एक नवीन रिपोर्ट कहती है कि वैश्विक बेरोज़गारी की दर स्थिर बनी हुई है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित रोज़गार के मामले में प्रगति थम गई है. रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि युवजन, ऐसे रोज़गार बाज़ार में संघर्ष कर रहे हैं, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और व्यापार नीति में अनिश्चितताओं के कारण और अधिक कमज़ोर हो सकता है.
रोज़गार और सामाजिक रुझान 2026 नामक रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष वैश्विक बेरोज़गारी दर के लगभग 4.9 प्रतिशत पर स्थिर पर रहने का अनुमान है यानि लगभग 18 करोड़ 60 लाख लोगों के पास रोज़गार नहीं होगा.
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रिपोर्ट के अनुसार, निर्धन देशों में रोज़गार में सबसे अधिक वृद्धि देखने को मिल रही है. यह धनी देशों में बढ़ती बुज़ुर्ग आबादी का परिणाम है, जहाँ कामकाजी उम्र के लोगों की सँख्या घट रही है और कम लोग कामकाज में प्रवेश कर पा रहे हैं या उसमें ठहर पा रहे हैं.
अनुमान है कि उच्च-मध्यम आय वाले देशों में, रोज़गार वृद्धि केवल 0.5 प्रतिशत रहेगी, जबकि निम्न-आय वाले देशों में यह दर 3.1 प्रतिशत तक पहुँच सकती है.
हालाँकि किसी व्यक्ति के रोज़गार में होने से यह ज़रूरी नहीं कि अच्छा रोज़गार या सम्मानजनक मज़दूरी मिलने की गारंटी हो.
रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 30 करोड़ कर्मचारी आज भी अत्यधिक ग़रीबी में जीवन यापन कर रहे हैं और रोज़ाना 3 डॉलर से भी कम राशि अर्जित करते हैं.
इसके अलावा, अनुमान है कि इस वर्ष क़रीब 2 अरब 10 करोड़ लोग अनौपचारिक क्षेत्र में काम करेंगे, जहाँ उन्हें सामाजिक सुरक्षा, श्रम अधिकारों और रोज़गार की स्थिरता जैसी बुनियादी सुविधाएँ बहुत सीमित रूप से ही मिल पाती हैं.
युवाओं के रोज़गार पर ख़तरा
रिपोर्ट में कम आय वाले देशों में, युवाओं की वैश्विक रोज़गार स्थिति को “कठिन” बताया गया है. यहाँ एक चौथाई से अधिक (27.9 प्रतिशत) युवा न तो शिक्षा में हैं, न रोज़गार में और न ही किसी प्रशिक्षण से जुड़े हुए हैं.
वहीं, उच्च आय वाले देशों में शिक्षित युवा भी इस अनिश्चितता से अछूते नहीं हैं.
इस अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि युवाओं के लिए AI और स्वचालन (Automation) की वजह से रोज़गार पाना और भी मुश्किल हो सकता है. इसी कारण रिपोर्ट में इन तकनीकों पर नज़दीकी नज़र रखने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया गया है.
ILO Photo
लैंगिक अन्तर बरक़रार
कार्यस्थल पर महिलाओं की समानता के लिए प्रयास कर रहे लोगों के लिए रिपोर्ट में अच्छी ख़बर नहीं है.
आँकड़ों से पता चलता है कि सामाजिक मान्यताएँ और रूढ़ियाँ अब भी गहराई से व्याप्त हैं, और पहले हासिल की गई प्रगति अब ठहर गई है, जिससे कामकाज में लैंगिक समानता की रफ़्तार धीमी पड़ गई है.
वर्तमान में, महिलाओं के लिए पुरुषों की तुलना में श्रमबल में शामिल होने की लगभग 24 प्रतिशत कम सम्भावना है.
व्यापार में अनिश्चितता
2025 में, वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अन्तरराष्ट्रीय व्यापार नियमों और व्यापार शुल्क की दरों में हुए बड़े बदलावों का असर नज़र आया है, जिसकी अगुवाई संयुक्त राज्य अमेरिका ने की थी.
दुनिया भर में, लगभग साढ़े 46 करोड़ श्रमिकों की आजीविका, व्यापार से जुड़ी है, जिनमें से आधे से अधिक श्रमिक एशिया और प्रशान्त क्षेत्र में हैं.
लेकिन, व्यापार को लेकर बढ़ती अनिश्चितता का सीधा असर श्रमिकों की आय पर पड़ रहा है, ख़ासकर दक्षिण-पूर्व एशिया, दक्षिण एशिया और योरोप में मज़दूरी पर दबाव बढ़ा है.
‘समन्वित और संगठित’ प्रतिक्रिया की ज़रूरत
अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के महानिदेशक गिल्बर्ट होंगबो ने रिपोर्ट के निष्कर्षों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि गरिमापूर्ण रोज़गार और सामाजिक न्याय को आगे बढ़ाने के लिए समन्वित कार्रवाई और मज़बूत संस्थानों की आवश्यकता है.
उन्होंने विशेष रूप से उन निर्धन अर्थव्यवस्थाओं की ओर ध्यान दिलाया, जिन पर पीछे छूटने का ख़तरा है.
उन्होंने कहा, “जब तक देशों की सरकारें, नियोक्ता और श्रमिक मिलकर, तकनीक का ज़िम्मेदारी से उपयोग करने और महिलाओं व युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोज़गार के अवसर बढ़ाने के लिए सुसंगत और समन्वित संस्थागत प्रयास नहीं करेंगे, तब तक गरिमापूर्ण काम की कमी बनी रहेगी और सामाजिक एकता ख़तरे में पड़ जाएगी.”
मुख्य सिफ़ारिशें
- कौशल, शिक्षा और बुनियादी ढाँचे में अधिक निवेश की आवश्यकता है.
- लैंगिक और युवा असमानताओं को दूर करना, भागीदारी में बाधाओं को हटाना और तकनीक का ज़िम्मेदार उपयोग सुनिश्चित करना अहम होगा.
- सभी क्षेत्रों में व्यापार और गरिमापूर्ण रोज़गार को मज़बूत करने की ज़रूरत है.
- क़र्ज़, एआई और व्यापार अस्थिरता से उत्पन्न जोखिमों को कम करने के लिए वैश्विक और घरेलू नीतियों का समन्वय महत्वपूर्ण है.





