Last Updated on January 24, 2026 11:37 pm by BIZNAMA NEWS

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AMN / UN NEWS

वर्ष 2025 के दौरान, जहाँ विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाओं में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में उछाल दर्ज किया गया, वहीं विकासशील देशों में इसमें गिरावट नज़र आई है. संयुक्त राष्ट्र के आरम्भिक अनुमान के अनुसार, वैश्विक स्तर पर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश  में 14 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया और पिछले साल, यह बढ़कर 1,600 अरब डॉलर तक पहुँच गया.

यूएन व्यापार एवं विकास संगठन (UNCTAD) का एक नया विश्लेषण दर्शाता है कि पूंजी-प्रधान क्षेत्रों, जैसेकि डेटा केन्द्रों में विदेशी निवेश, यानि एफ़डीआई के केन्द्रित होने का रुझान नज़र आ रहा है.

दो वर्षों की गिरावट के बाद, 14 प्रतिशत की वृद्धि एफ़डीआई की स्थिति में यह सुधार आने का संकेत है, लेकिन, रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि यह आँकड़ा, वास्तविक स्थिति को कहीं बढ़ा-चढ़ाकर पेश करता है.

असल में, निवेश में बढ़ोत्तरी का एक बड़ा हिस्सा, वैश्विक स्तर पर वित्तीय केन्द्रों के ज़रिए आ रहा है, जबकि वास्तविक निवेश गतिविधियाँ अभी नाज़ुक ही बनी हुई हैं.

इसके अलावा, निवेश सम्बन्धी रुझान दर्शाते हैं कि विकसित व विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के बीच दूरी बढ़ रही है, निवेश कुछ चुनिन्दा रणनैतिक सैक्टर पर ही केन्द्रित हो रहा है और सतत विकास के नज़रिए से अहम परियोजनाओं में कमज़ोरी दिखाई दे रही है.

UNCTAD ने बताया है कि वैश्विक वित्तीय केन्द्रों के ज़रिए निवेश के आँकड़े में 140 अरब डॉलर से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई. लेकिन इसके अभाव में, वैश्विक एफ़डीआई में बढ़ोत्तरी केवल 5 फ़ीसदी तक ही सीमित रह जाती. 

यह एक संकेत है कि निवेश सम्बन्धी गतिविधि में फ़िलहाल सीमित सुधार ही नज़र आ रहा है.

अहम तथ्य

विकसित अर्थव्यवस्थाओं में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, वर्ष 2025 में बढ़कर 728 अरब डॉलर तक पहुँच गया, जोकि 43 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है. योरोप और अन्य क्षेत्रों में वित्तीय केन्द्रों का इसमें एक बड़ा योगदान है. जर्मनी, फ़्राँस और इटली समेत अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में उछाल आया है.

मगर, विकासशील देशों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के प्रवाह में गिरावट आई और यह 2 प्रतिशत घटकर 877 तक रह गया. इसका कम आय वाले देशों पर सबसे अधिक असर हुआ है, और 75 प्रतिशत से अधिक सबसे कम विकसित देशों में या तो निवेश उसी स्तर पर थम गया है या फिर उसमें गिरावट आ रही है. 

डेटा केन्द्रों और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में निवेश में बढ़ोत्तरी आई है. 

एफ़डीआई, अब ऐसी परियोजनाओं में केन्द्रित हो रहा है, जोकि पूँजी-प्रधान हैं और जहाँ टैक्नॉलॉजी की एक बड़ी भूमिका है. कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) और डिजिटल नैटवर्क के लिए माँग में तेज़ी आ रही है.

फ़्राँस, संयुक्त राज्य अमेरिका, और कोरिया गणराज्य की अग्रणी भूमिका में है, जबकि भारत, ब्राज़ील, थाईलैंड और मलेशिया समेत अन्य उभरते हुए बाज़ारों में भी बड़ी परियोजनाओं में निवेश किया गया है. 

सेमीकंडक्टर की नई परियोजनाओं के मूल्य में 35 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है. आयात शुल्क (टैरिफ़) की चपेट में आने वाले क्षेत्रों, जैसेकि टैक्सटाइल्स, इलैक्ट्रॉनिक्स और मशीनरी में कमी दर्ज की गई है. 

बुनियादी ढाँचे और नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश अभी कमज़ोर है, जहाँ राजस्व के लिए जोखिम, और नियामन सम्बन्धी अनिश्चितता से उन पर असर हुआ है.

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