Last Updated on January 28, 2026 10:22 pm by BIZNAMA NEWS

AMN / BIZ DESK

बुधवार को भारतीय शेयर बाजारों में लगातार दूसरे दिन मजबूती देखने को मिली। भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) से निवेशकों का भरोसा बढ़ा, वहीं आगामी केंद्रीय बजट से पहले पूंजीगत व्यय से जुड़े शेयरों में भी खरीदारी दिखी।

बीएसई सेंसेक्स 487.20 अंक या 0.60% की बढ़त के साथ 82,344.68 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 167.35 अंक या 0.66% चढ़कर 25,342.75 पर पहुंच गया। बीते दो कारोबारी सत्रों में प्रमुख सूचकांकों में करीब 1% की तेजी दर्ज की गई है।

ऊर्जा और मेटल सेक्टर सबसे आगे

ऊर्जा शेयरों में 4.2% की जोरदार तेजी रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती और बेहतर मार्जिन की उम्मीदों ने इस सेक्टर को सहारा दिया। मेटल शेयर 2.3% चढ़े, क्योंकि बेस मेटल की कीमतें बढ़ीं और भारत-ईयू एफटीए से निर्यात मांग में सुधार की उम्मीद बनी।

डिफेंस, पीएसयू और इंफ्रास्ट्रक्चर में उछाल

डिफेंस सेक्टर में 7% की तेज छलांग लगी। मजबूत तिमाही नतीजों, ऑर्डर बुक में बढ़ोतरी और ‘मेक इन इंडिया’ पर सरकार के फोकस से इस सेक्टर को मजबूती मिली।
सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) शेयरों में 4.6% और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में 1.1% की बढ़त दर्ज की गई, क्योंकि निवेशकों को बजट में पूंजीगत व्यय जारी रहने की उम्मीद है।

मिड-कैप और स्मॉल-कैप में बेहतर प्रदर्शन

ब्रॉडर मार्केट में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। मिड-कैप शेयर 1.7% और स्मॉल-कैप शेयर 2.3% चढ़े, जिससे निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में सुधार का संकेत मिला।

चुनिंदा शेयरों में हलचल

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के शेयर 8.9% उछलकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे, क्योंकि कंपनी ने बेहतर मुनाफा दर्ज किया। महिंद्रा लॉजिस्टिक्स में 15% और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज में 7.5% की तेजी आई, दोनों कंपनियों के सकारात्मक नतीजों का असर रहा। दूसरी ओर, एशियन पेंट्स के शेयर दिसंबर तिमाही में कमजोर वॉल्यूम ग्रोथ के कारण 4.2% फिसल गए।

मुद्रा, बॉन्ड और वैश्विक संकेत

डॉलर की मांग के चलते रुपया 0.07% टूटकर 91.7825 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। बॉन्ड बाजार में 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड 2 बेसिस प्वाइंट घटकर 6.6997% पर आ गई, जबकि ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप दरों में भी नरमी दिखी।

आगे का रुख

निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक पर है, जहां ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम मानी जा रही है। घरेलू स्तर पर केंद्रीय बजट चर्चा के केंद्र में है, हालांकि बाजार इसे सीमित असर वाला मान रहा है और व्यापक प्रोत्साहन की बजाय चुनिंदा सेक्टरों के लिए उपायों की उम्मीद कर रहा है। कमजोर रुपये, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और भू-राजनीतिक जोखिम आगे की तेजी पर कुछ दबाव बना सकते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *