अमेरिकी टैरिफ का असर शेयर बाज़ार के साथ-साथ भारत की विकास दर, राजस्व और व्यापार संतुलन पर भी गहरा पड़ सकता है।
BIZ DESK
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की लगातार बिकवाली और प्रमुख सूचकांकों में शामिल हैवीवेट शेयरों HDFC बैंक और रिलायंस इंडस्ट्रीज में गिरावट के कारण aaj भारतीय बेंचमार्क सूचकांकों में लगभग एक प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
निवेशक अमेरिका के जैक्सन होल में होने वाली केंद्रीय बैंक की वार्षिक बैठक में यूएस फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष जेरोम पॉवेल के महत्वपूर्ण संबोधन को लेकर भी सतर्क थे। इसके कारण, छह दिनों से जारी बढ़त का सिलसिला टूट गया। सेंसेक्स 694 अंक या 0.85% गिरकर 81,307 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 214 अंक या 0.8% की गिरावट के साथ 24,870 पर बंद हुआ।
हालांकि, साप्ताहिक आधार पर, दोनों सूचकांकों में लगभग एक प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई। यह लगातार दूसरा सप्ताह था जब बाजारों ने बढ़त हासिल की, जो छह सप्ताह की लगातार गिरावट के बाद आया है। इस बढ़त को ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर शेयरों में तेजी का समर्थन मिला, क्योंकि निवेशकों को उम्मीद है कि जीएसटी दरों में कटौती से मांग को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, S&P की हाल ही में सॉवरेन रेटिंग अपग्रेड से भी बाजार की धारणा मजबूत हुई।
विदेशी निवेशकों की निकासी जारी, घरेलू निवेशक बने सहारा
जुलाई से ही विदेशी फंडों ने घरेलू शेयरों की बिक्री तेज कर दी है। उन्होंने अगस्त में अब तक ₹25,751 करोड़ और जुलाई में ₹47,667 करोड़ के शेयर बेचे हैं। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) के मजबूत प्रवाह ने इस बिकवाली के दबाव को संतुलित कर दिया। DIIs ने इस महीने अब तक ₹66,184 करोड़ और जुलाई में ₹60,939 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की है।
सरकारी सुधारों और रेटिंग अपग्रेड का प्रभाव
15 अगस्त को, सरकार ने जीएसटी ढांचे को सरल बनाने का प्रस्ताव दिया, जिसमें दो मुख्य स्लैब 5% और 18% होंगे, जबकि 40% का एक स्लैब केवल ‘सिन गुड्स’ के लिए आरक्षित होगा। उम्मीद है कि यह बदलाव कई उपभोक्ता उत्पादों की लागत को कम करेगा। इन सुधारों का उद्देश्य उपभोग में आई मंदी और 50% के अमेरिकी टैरिफ के दोहरे प्रभाव का मुकाबला करना है।
बाजार की धारणा को मजबूत करने वाला एक और बड़ा कारण यह था कि पिछले सप्ताह S&P Global ने 18 साल में पहली बार भारत की लॉन्ग-टर्म सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को BBB- से बढ़ाकर BBB कर दिया था। इसके साथ ही 10 वित्तीय संस्थानों की रेटिंग भी बढ़ाई गई थी। इस अपग्रेड से खासकर वित्तीय और ऑटोमोबाइल जैसे क्षेत्रों में निवेशकों का विश्वास बढ़ा।
सेक्टरवार प्रदर्शन
- आईटी व टेक्नोलॉजी: निफ्टी आईटी 1.59% टूटा। इंफोसिस, टीसीएस और एचसीएल टेक सबसे बड़े हारे। अमेरिकी ग्राहकों से मांग घटने की आशंका ने दबाव बढ़ाया।
- बैंकिंग व फाइनेंशियल्स: निफ्टी फाइनेंस 1.20% और निफ्टी बैंक 1.16% गिरा। एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई में तेज़ गिरावट देखी गई।
- एफएमसीजी: निफ्टी एफएमसीजी 1.02% फिसला। हिंदुस्तान यूनिलीवर और आईटीसी पर असर पड़ा क्योंकि महंगाई और खपत में सुस्ती की चिंता रही।
- ऑटोमोबाइल: निफ्टी ऑटो 0.54% टूटा। महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स में गिरावट रही, जबकि मारुति सुजुकी त्योहारी मांग की उम्मीद पर बढ़त के साथ बंद हुआ।
- मेटल्स: धातु शेयरों में बिकवाली बढ़ी क्योंकि वैश्विक व्यापार प्रवाह कमजोर होने और अमेरिकी शुल्क बढ़ने की आशंका रही।
- कंज्यूमर ड्यूरेबल्स: इस सेक्टर में मजबूती रही। जीएसटी दरों में कटौती और त्योहारी मांग की उम्मीद से टाइटन और एलएंडटी हरे निशान में रहे।
व्यापक बाज़ार की कमजोरी
ब्रॉडर मार्केट ने भी कमजोरी दिखाई। निफ्टी स्मॉल कैप 100 और निफ्टी मिडकैप 100 दोनों 1.45% गिरे, जबकि निफ्टी 100 0.93% फिसला।
मुद्रा और आउटलुक
रुपया लगातार कमजोर रहा और 87.25–87.40 प्रति डॉलर के दायरे में कारोबार किया। एफआईआई निकासी और विकास व राजकोषीय घाटे की चिंताओं ने दबाव बढ़ाया।
एलकेपी सिक्योरिटीज़ के जतीन त्रिवेदी ने कहा: “अमेरिकी टैरिफ ने निर्यातकों, खासकर टेक्सटाइल, फार्मा और मशीनरी सेक्टर में अनिश्चितता बढ़ा दी है। जब तक भारत-अमेरिका वार्ता या वैकल्पिक व्यापार समझौतों से स्पष्टता नहीं मिलती, बाज़ार में सतर्कता बनी रहेगी।”
कुल मिलाकर, अमेरिकी टैरिफ का असर शेयर बाज़ार के साथ-साथ भारत की विकास दर, राजस्व और व्यापार संतुलन पर भी गहरा पड़ सकता है।