Last Updated on April 1, 2026 3:54 pm by BIZNAMA NEWS

By R. Suryamurthy
भारत में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का संग्रह वित्त वर्ष 2025–26 के अंत में मजबूत स्थिति में रहा। मार्च 2026 में जीएसटी राजस्व ₹2 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया, जो देश में स्थिर उपभोग, मजबूत आयात गतिविधि और बेहतर कर अनुपालन का संकेत देता है, जबकि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएँ अभी भी बनी हुई हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2026 में सकल जीएसटी संग्रह ₹2,00,064 करोड़ रहा, जो पिछले वर्ष के ₹1,83,845 करोड़ की तुलना में 8.8 प्रतिशत अधिक है। वहीं, रिफंड के बाद शुद्ध संग्रह 8.2 प्रतिशत बढ़कर ₹1,77,990 करोड़ तक पहुंच गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अधिक रिफंड के बावजूद राजस्व की मूल प्रवृत्ति मजबूत बनी हुई है।
पूरे वित्त वर्ष 2025–26 के दौरान सकल जीएसटी संग्रह 8.3 प्रतिशत बढ़कर ₹22.27 लाख करोड़ हो गया, जबकि शुद्ध राजस्व 7.1 प्रतिशत की वृद्धि के साथ ₹19.34 लाख करोड़ तक पहुंच गया। यह वृद्धि दर देश की अनुमानित जीडीपी वृद्धि के साथ लगभग मेल खाती है।
आयात से मिला बड़ा सहारा
मार्च के जीएसटी संग्रह में वृद्धि का प्रमुख कारण आयात से जुड़े करों का मजबूत प्रदर्शन रहा। मार्च में आयात से मिलने वाला सकल जीएसटी राजस्व सालाना आधार पर 17.8 प्रतिशत बढ़ा, जबकि पूरे वर्ष में आयात आधारित कर संग्रह 14.1 प्रतिशत बढ़ा। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक व्यापार में उतार-चढ़ाव के बावजूद भारत का व्यापार प्रवाह अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है।
घरेलू जीएसटी राजस्व भी स्थिर गति से बढ़ा। मार्च में इसमें 5.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि पूरे वर्ष में यह 6.4 प्रतिशत बढ़ा। कर विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू मांग और आयात के बीच संतुलित वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है।
KPMG के पार्टनर और इनडायरेक्ट टैक्स प्रमुख अभिषेक जैन के अनुसार, जीएसटी संग्रह लगभग 9 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर के साथ स्थिर बना हुआ है। उनका कहना है कि मजबूत आयात गतिविधि और बेहतर कर अनुपालन इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मार्च में निर्यात रिफंड कुछ कम रहे, लेकिन पूरे वर्ष के स्तर पर वे संतोषजनक रहे।
रिफंड में तेज वृद्धि
मार्च 2026 में जीएसटी रिफंड 13.8 प्रतिशत बढ़े, जबकि पूरे वित्त वर्ष में यह 17.8 प्रतिशत बढ़कर ₹2.92 लाख करोड़ तक पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि रिफंड में यह वृद्धि किसी वित्तीय दबाव का संकेत नहीं बल्कि कर प्रशासन की बेहतर दक्षता को दर्शाती है।
टैक्स कनेक्ट एडवाइजरी सर्विसेज के पार्टनर विवेक जालान के अनुसार, जीएसटी 2.0 सुधारों के बाद रिफंड प्रक्रिया अधिक तेज और पारदर्शी हुई है। नवंबर 2025 से सात दिनों के भीतर 90 प्रतिशत रिफंड जारी करने की व्यवस्था लागू की गई, जिससे प्रणाली की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2026 का जीएसटी संग्रह देश की आर्थिक वृद्धि का स्पष्ट संकेत देता है। लगभग 7 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि के साथ जीएसटी की बढ़त यह दर्शाती है कि बढ़ती खपत, मजबूत आयात और बेहतर अनुपालन के कारण भारत वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक “ब्राइट स्पॉट” बना हुआ है।
दरों में कटौती के बावजूद मजबूत राजस्व
जीएसटी 2.0 ढांचे के तहत कर दरों में कुछ कटौती के बावजूद राजस्व संग्रह पर इसका बड़ा असर नहीं पड़ा है। डेलॉयट इंडिया के पार्टनर और इनडायरेक्ट टैक्स लीडर महेश जैसिंग के अनुसार, फरवरी और मार्च के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि राजस्व वृद्धि की मूल प्रवृत्ति मजबूत बनी हुई है।
उन्होंने बताया कि घरेलू राजस्व स्थिर बना हुआ है, जबकि आयात से मिलने वाला इंटीग्रेटेड जीएसटी (IGST) संग्रह यह संकेत देता है कि व्यापार गतिविधियाँ निरंतर जारी हैं। साथ ही 31 जनवरी 2026 को मुआवजा उपकर (कम्पनसेशन सेस) व्यवस्था समाप्त होने के कारण सेस संग्रह में गिरावट आई है, जो राजस्व संकट नहीं बल्कि जीएसटी ढांचे में एक संरचनात्मक बदलाव है।
बढ़ती खपत ने किया दर कटौती का असर कम
डेलॉयट इंडिया के पार्टनर एम.एस. मणि के अनुसार, उपभोग में वृद्धि ने कर दरों में कटौती के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर दिया है। उनका कहना है कि बढ़ती खपत के कारण जीएसटी संग्रह में लगभग 8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि हर महीने ₹2 लाख करोड़ से अधिक का संग्रह स्थायी रूप से हासिल करने में कुछ समय लग सकता है, क्योंकि कर दरों में कमी का असर धीरे-धीरे सामने आएगा।
राज्यों के प्रदर्शन में असमानता
राष्ट्रीय स्तर पर जीएसटी संग्रह का रुझान सकारात्मक रहा, लेकिन राज्यों के आंकड़े कुछ असमानता की ओर संकेत करते हैं। तमिलनाडु (-8 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (-4 प्रतिशत) और राजस्थान (-1 प्रतिशत) जैसे कुछ बड़े राज्यों में कुछ सूचकों में गिरावट या कमजोर वृद्धि देखी गई।
इसके विपरीत महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों में जीएसटी संग्रह मजबूत बना हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह असमानता लंबे समय तक बनी रहती है तो यह नीति-निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन सकती है, क्योंकि राज्यों की वित्तीय स्थिरता काफी हद तक जीएसटी राजस्व पर निर्भर करती है।
आगे की राह
कुल मिलाकर वित्त वर्ष 2025–26 के जीएसटी आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की संतुलित और स्थिर वृद्धि की कहानी बताते हैं। मजबूत आयात, स्थिर घरेलू खपत और बेहतर कर प्रशासन ने राजस्व वृद्धि को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई है।
विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026–27 में भी जीएसटी संग्रह मध्यम लेकिन स्थिर वृद्धि के रास्ते पर रह सकता है। हालांकि भविष्य की गति वैश्विक व्यापार परिस्थितियों, घरेलू खपत के रुझान और कर प्रशासन की दक्षता पर निर्भर करेगी।





