AMN / नई दिल्ली/मुंबई


भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को हल्की बढ़त के साथ बंद हुए और पूरे सप्ताह का कारोबार लगभग स्थिर रुख के साथ समाप्त हुआ। आईटी कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों और कुछ सरकारी बैंकों में खरीदारी से बाजार को सहारा मिला, हालांकि अमेरिका के साथ संभावित व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने बाजार की तेजी पर अंकुश लगाए रखा।

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 187.64 अंकों यानी 0.23 प्रतिशत की बढ़त के साथ 83,570.35 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 28.75 अंकों यानी 0.11 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह 25,694.35 के स्तर पर बंद हुआ। साप्ताहिक आधार पर निफ्टी में 0.04 प्रतिशत की मामूली बढ़त रही, जबकि सेंसेक्स 0.01 प्रतिशत की हल्की गिरावट के साथ लगभग सपाट रहा।

दिनभर के कारोबार में निवेशकों का रुख सतर्क बना रहा। चालू तिमाही के नतीजों को लेकर उम्मीदों, खासकर आईटी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से जुड़ी कंपनियों में, बाजार को समर्थन मिला। इसके बावजूद वैश्विक संकेतों की कमजोरी और एफआईआई (विदेशी संस्थागत निवेशकों) की निरंतर बिकवाली के चलते निवेशक बड़े दांव लगाने से बचते नजर आए।

बाजार के व्यापक सूचकांकों ने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया। स्मॉलकैप सूचकांक में करीब 0.5 प्रतिशत की तेजी रही, जबकि मिडकैप सूचकांक लगभग 0.2 प्रतिशत चढ़ा। इससे यह संकेत मिला कि निवेशक चुनिंदा शेयरों में जोखिम लेने को तैयार हैं, हालांकि समग्र धारणा अभी भी सतर्क बनी हुई है।

सेक्टरवार प्रदर्शन की बात करें तो आईटी शेयर दिन के सबसे बड़े लाभ में रहे। आईटी सूचकांक में लगभग 3.3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और पूरे सप्ताह में इस सेक्टर ने करीब 2.8 प्रतिशत की बढ़त हासिल की। इंफोसिस, टीसीएस और एचसीएलटेक जैसी दिग्गज कंपनियों के अनुमान से बेहतर तिमाही नतीजों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद इन कंपनियों की स्थिर मांग और मार्जिन ने आईटी सेक्टर को मजबूती दी।

सरकारी बैंकों में भी चुनिंदा खरीदारी देखने को मिली, जिससे बैंकिंग सेक्टर को सीमित समर्थन मिला। वहीं अन्य सेक्टरों में मिला-जुला रुख रहा और अधिकांश शेयर सीमित दायरे में कारोबार करते नजर आए।

मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया दबाव में रहा। रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 50 पैसे कमजोर होकर 90.84 के स्तर पर बंद हुआ, जो इसके अब तक के सबसे निचले स्तर के करीब है। डॉलर की मजबूती, पूंजी निकासी की आशंका और वैश्विक जोखिमों के चलते रुपये पर दबाव बना रहा, जिसका असर बाजार की धारणा पर भी पड़ा।

कुल मिलाकर, घरेलू बाजार इस समय एक समेकन (कंसोलिडेशन) के दौर से गुजर रहा है। एक ओर मजबूत कॉरपोरेट नतीजे बाजार को सहारा दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर वैश्विक अनिश्चितताएं, विदेशी बिकवाली और रुपये की कमजोरी निवेशकों को सतर्क बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे, वैश्विक संकेत और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।