
Last Updated on March 14, 2026 2:38 pm by BIZNAMA NEWS
ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार के अस्थायी कदम
AMN / नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अनिश्चितता के बीच भारत सरकार ने वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कुछ अस्थायी कदम उठाए हैं। सरकार ने एलपीजी की आपूर्ति पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए केरोसिन, कोयला और बायोमास जैसे ईंधनों के सीमित उपयोग की अनुमति दी है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारत जैसे आयात-निर्भर देशों की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल का प्रमुख मानक Brent Crude हाल ही में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया है, जिससे ऊर्जा लागत और आपूर्ति दोनों पर दबाव बढ़ा है।
भारत अपनी कुल तेल आवश्यकता का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर देश की ऊर्जा व्यवस्था और कीमतों पर पड़ता है।
एलपीजी पर दबाव कम करने की कोशिश
सरकार ने हाल ही में होटलों, रेस्तरां, ढाबों और अन्य व्यावसायिक रसोईघरों को सीमित अवधि के लिए केरोसिन, कोयला और बायोमास जैसे वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग करने की अनुमति दी है। इसका मुख्य उद्देश्य व्यावसायिक क्षेत्र में एलपीजी की मांग को कम करना है, ताकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए इसकी उपलब्धता बनी रहे।
इस कदम के तहत राज्यों को केरोसिन की अतिरिक्त आपूर्ति भी दी गई है। सरकार ने राज्यों के लिए लगभग 48,000 किलोलीटर अतिरिक्त केरोसिन आवंटित किया है, जिसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली और अधिकृत ईंधन केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा।
छोटे उद्योगों के लिए कोयले की आपूर्ति
सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कोयला कंपनियों को भी निर्देश दिया है कि वे छोटे उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को पर्याप्त कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करें। कई छोटे व्यवसाय एलपीजी के विकल्प के रूप में अस्थायी रूप से कोयले का उपयोग कर सकते हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था केवल आपातकालीन परिस्थितियों के लिए है और इसे लंबे समय तक लागू नहीं रखा जाएगा।
स्वच्छ ईंधन की दिशा में दीर्घकालिक रणनीति
हाल के अस्थायी उपायों के बावजूद सरकार की दीर्घकालिक ऊर्जा नीति स्वच्छ और टिकाऊ ईंधनों पर आधारित है। पिछले वर्षों में स्वच्छ ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की गई हैं।
इनमें प्रमुख योजना Pradhan Mantri Ujjwala Yojana है, जिसके तहत करोड़ों गरीब परिवारों को एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। इससे देश में पारंपरिक ईंधनों जैसे लकड़ी, कोयला और केरोसिन पर निर्भरता काफी कम हुई है।
इसके अलावा सरकार National Green Hydrogen Mission के माध्यम से हरित हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा दे रही है, जबकि FAME India Scheme के जरिए इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण के बीच संतुलन
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि मौजूदा स्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत को अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बहु-विकल्पीय रणनीति अपनानी होगी।
हालांकि केरोसिन और कोयले के सीमित उपयोग से तत्काल आपूर्ति संकट को कम किया जा सकता है, लेकिन लंबे समय में देश की प्राथमिकता स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना ही रहेगी।
विशेषज्ञों के अनुसार, ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ पर्यावरणीय लक्ष्यों को संतुलित रखना भारत के लिए आने वाले वर्षों में सबसे बड़ी चुनौती होगा।





