Last Updated on January 23, 2026 9:06 pm by BIZNAMA NEWS

AMN / BIZ DESK

भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार को लगातार दूसरे सत्र में तेज गिरावट दर्ज की गई। निफ्टी50 और बीएसई सेंसेक्स कई महीनों की सबसे खराब साप्ताहिक गिरावट की ओर बढ़ते दिखे। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, कमजोर तिमाही नतीजे, अडानी समूह के शेयरों में भारी गिरावट और वैश्विक अनिश्चितताओं ने निवेशकों की धारणा को कमजोर किया।

कारोबार के दौरान निफ्टी 248 अंक या 0.99 प्रतिशत गिरकर 25,041 के स्तर तक फिसल गया, जबकि सेंसेक्स 818 अंक या लगभग 1 प्रतिशत टूटकर 81,489 पर आ गया। बंद होने पर सेंसेक्स 769.67 अंक या 0.94 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81,537.70 पर और निफ्टी50 241.25 अंक या 0.95 प्रतिशत टूटकर 25,048.65 पर बंद हुआ।

5 जनवरी को रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद से बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है। इस अवधि में निफ्टी करीब 5 प्रतिशत और सेंसेक्स लगभग 4,300 अंक टूट चुका है। साप्ताहिक आधार पर निफ्टी में 2.4 प्रतिशत और सेंसेक्स में 2.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

मार्केट ब्रेड्थ कमजोर

बीएसई पर बाजार की चौड़ाई (मार्केट ब्रेड्थ) कमजोर रही, जो व्यापक स्तर पर बिकवाली का संकेत देती है। कुल 4,269 शेयरों में से 2,861 शेयरों में गिरावट आई, जबकि केवल 1,259 शेयरों में तेजी देखने को मिली। करीब 149 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

सेक्टर-वाइज प्रदर्शन

सभी प्रमुख सेक्टर लाल निशान में बंद हुए। रियल्टी सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा और इसमें 3.3 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। मीडिया सेक्टर 2.5 प्रतिशत टूटा। इसके अलावा कैपिटल गुड्स, पावर, मेटल और पीएसयू बैंक शेयरों में भी तेज बिकवाली देखी गई। आईटी और एफएमसीजी सेक्टर ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया, हालांकि ये भी नकारात्मक दायरे में ही बंद हुए।

अडानी समूह के शेयरों में भारी गिरावट

अडानी समूह के शेयरों पर विशेष दबाव देखने को मिला। खबरों के अनुसार, अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग (US SEC) भारतीय उद्योगपति गौतम अडानी के खिलाफ लंबित धोखाधड़ी मामले को आगे बढ़ाने के लिए वैकल्पिक कानूनी रास्ता तलाश रहा है। इसके चलते अडानी ग्रीन एनर्जी के शेयर 10 प्रतिशत तक टूट गए। अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस में करीब 9 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि अडानी टोटल गैस और अडानी पावर 7 प्रतिशत से अधिक टूटे।

एफपीआई की बिकवाली जारी

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) इस महीने अब तक भारतीय शेयर बाजार से ₹31,334 करोड़ की निकासी कर चुके हैं। वर्ष 2025 में एफपीआई की कुल शुद्ध बिकवाली ₹1.66 लाख करोड़ रही थी। विश्लेषकों के अनुसार, घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीद के बावजूद एफपीआई की लगातार बिकवाली बाजार पर दबाव बनाए हुए है। निवेशकों की नजर 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट पर टिकी हुई है।

कमजोर तिमाही नतीजे और वैश्विक अनिश्चितताएं

अक्टूबर-दिसंबर तिमाही (Q3FY26) के शुरुआती नतीजों में कंपनियों की आय वृद्धि एकल अंक में रही है, जो पिछले चार वर्षों में सबसे कमजोर प्रदर्शन माना जा रहा है। इसके अलावा वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी नीतिगत अनिश्चितताओं ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।

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