Last Updated on March 24, 2026 11:53 pm by BIZNAMA NEWS

S N VERMA / नई दिल्ली
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने मंगलवार को West Asia में जारी संघर्ष के बीच क्षेत्र में शांति बहाल करने के लिए संवाद और कूटनीति को सबसे महत्वपूर्ण रास्ता बताया। उन्होंने कहा कि भारत तनाव कम करने और वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार अंतरराष्ट्रीय नेताओं से संपर्क में है।
Rajya Sabha में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने लगातार तनाव कम करने और Strait of Hormuz को फिर से खोलने की आवश्यकता पर जोर दिया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने बताया कि संघर्ष शुरू होने के बाद से उन्होंने खाड़ी देशों के नेताओं के साथ-साथ Iran, Israel और United States के नेताओं से भी टेलीफोन पर बातचीत की है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि व्यावसायिक जहाजों पर हमले और स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ में अंतरराष्ट्रीय नौवहन में बाधा डालना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत इस चुनौतीपूर्ण स्थिति में भी भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहा है।
मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहा यह युद्ध तीन सप्ताह से अधिक समय से जारी है और इससे वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है। भारत के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय है क्योंकि इससे व्यापार मार्ग प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि पेट्रोल, डीज़ल, गैस और उर्वरकों जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर असर पड़ा है, हालांकि हाल के दिनों में कई देशों से कच्चे तेल और एलपीजी से लदे जहाज भारत पहुंचे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और आजीविका सुनिश्चित करना भी भारत की प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि दुनिया भर के कई जहाज स्ट्रेट ऑफ होरमुज़ में फंसे हुए हैं और उनमें कई भारतीय चालक दल के सदस्य भी मौजूद हैं। संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक 3.75 लाख से अधिक भारतीय सुरक्षित रूप से स्वदेश लौट चुके हैं, जिनमें ईरान से आए करीब 1,000 भारतीय भी शामिल हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार हर क्षेत्र में विदेशी निर्भरता कम करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने बताया कि भारत का 90 प्रतिशत से अधिक व्यापार विदेशी जहाजों के जरिए होता है, इसलिए सरकार ने ‘मेड इन इंडिया’ जहाज निर्माण को बढ़ावा देने के लिए लगभग 700 अरब रुपये का निवेश किया है।
उन्होंने यह भी कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने अपने ऊर्जा आयात के स्रोत 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक कर दिए हैं, जिससे किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई है। सरकार तेजी से बदलती स्थिति पर नजर रखे हुए है और यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा रही है कि आगामी बुआई मौसम के लिए किसानों को पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध हों।







