Last Updated on March 13, 2026 9:52 pm by BIZNAMA NEWS

AMN / BIZ DESK
— भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को भारी बिकवाली देखने को मिली और प्रमुख सूचकांक लगातार तीसरे दिन गिरावट के साथ बंद हुए। वैश्विक बाजारों की कमजोरी, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों की धारणा कमजोर रही।
30 शेयरों वाला प्रमुख सूचकांक BSE Sensex 1,470.50 अंक यानी 1.93 प्रतिशत गिरकर 74,563.92 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह 1,579 अंक तक फिसल गया था। वहीं 50 शेयरों वाला NSE Nifty 50 488.05 अंक यानी 2.06 प्रतिशत गिरकर 23,151.10 पर बंद हुआ।
पिछले तीन कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स करीब 4.65 प्रतिशत और निफ्टी 4.57 प्रतिशत तक गिर चुका है, जो बाजार में जारी दबाव को दर्शाता है।
वैश्विक कारणों का असर
वैश्विक बाजारों में कमजोरी का असर भारतीय बाजारों पर भी पड़ा। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल का मानक Brent Crude 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया और लगभग 100.7 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा।
तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
एशियाई बाजारों में भी गिरावट रही। Nikkei 225, Hang Seng Index, Kospi और SSE Composite Index सभी कमजोर बंद हुए।
अमेरिका में भी पिछले सत्र में Dow Jones Industrial Average लगभग 740 अंक गिर गया, जिससे वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ गई।
सेक्टरवार प्रदर्शन
बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र
बैंकिंग शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव देखा गया। प्रमुख सरकारी बैंक State Bank of India के शेयर लगभग 3.61 प्रतिशत गिर गए, जबकि निजी क्षेत्र के बैंक HDFC Bank में भी 1.93 प्रतिशत की गिरावट आई।
बैंकिंग सूचकांक Nifty Bank अपने 52 सप्ताह के उच्च स्तर से लगभग 12.96 प्रतिशत नीचे आ चुका है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपिटल गुड्स
इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र में तेज गिरावट दर्ज की गई। इंजीनियरिंग दिग्गज Larsen & Toubro के शेयर 7.38 प्रतिशत टूट गए, जिससे सूचकांकों पर दबाव बढ़ा।
एफएमसीजी क्षेत्र
कमजोर बाजार के बीच उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र ने कुछ मजबूती दिखाई। एफएमसीजी कंपनी Hindustan Unilever बाजार में गिने-चुने बढ़त वाले शेयरों में शामिल रही।
विश्लेषकों का मानना है कि अनिश्चित माहौल में निवेशक अक्सर एफएमसीजी जैसे रक्षात्मक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाते हैं।
टेलीकॉम क्षेत्र
टेलीकॉम क्षेत्र के शेयर अपेक्षाकृत मजबूत रहे। Bharti Airtel के शेयरों में बढ़त दर्ज की गई, जिससे बाजार को कुछ सहारा मिला।
फार्मा और निर्यात आधारित कंपनियां
फार्मा कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। Laurus Labs के शेयर 4 प्रतिशत से अधिक गिर गए। रिपोर्टों के अनुसार फरवरी 2026 में कंपनी के निर्यात राजस्व में करीब 47 प्रतिशत की गिरावट आई है।
नवीकरणीय ऊर्जा
नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में कुछ शेयरों में तेजी देखने को मिली। ACME Solar Holdings के शेयर 6.43 प्रतिशत उछल गए, क्योंकि कंपनी ने राजस्थान में बैटरी ऊर्जा भंडारण परियोजना का दूसरा चरण शुरू किया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं
इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Ramky Infrastructure के शेयर लगभग 4.85 प्रतिशत बढ़ गए। कंपनी को महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम से फार्मास्युटिकल पार्क विकसित करने का ठेका मिला है।
मिडकैप और स्मॉलकैप में भारी गिरावट
वृहद बाजार में भी भारी दबाव देखने को मिला।
- S&P BSE MidCap Index 2.61 प्रतिशत गिरा
- S&P BSE SmallCap Index 2.67 प्रतिशत लुढ़क गया
बीएसई में बाजार की चौड़ाई बेहद कमजोर रही। कुल 941 शेयर बढ़त में जबकि 3,348 शेयर गिरावट में बंद हुए।
रुपये और वोलैटिलिटी
भारतीय मुद्रा पर भी दबाव बना रहा। रुपया 20 पैसे गिरकर 92.45 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड निचले स्तर पर बंद हुआ।
बाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला India VIX 5.23 प्रतिशत बढ़कर 22.65 पर पहुंच गया।
कमोडिटी और बॉन्ड बाजार
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई। एमसीएक्स गोल्ड वायदा लगभग 0.54 प्रतिशत गिरकर 59,400 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया।
भारत के 10 वर्ष के सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 6.682 प्रतिशत हो गई, जो निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है।
आगे का रुख
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और विदेशी बाजारों की अनिश्चितता के कारण आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
रक्षात्मक क्षेत्रों जैसे एफएमसीजी और टेलीकॉम में निवेशकों की रुचि बनी रह सकती है, जबकि बैंकिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर और मिडकैप शेयरों में दबाव बना रह सकता है।








