Last Updated on March 16, 2026 7:06 pm by BIZNAMA NEWS

एएमएन बिज डेस्क | नई दिल्ली

सप्ताह की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक रही। निवेशकों द्वारा बड़ी कंपनियों के शेयरों में वैल्यु बाइंग और ऑटो सेक्टर में आंशिक सुधार के चलते सोमवार को प्रमुख सूचकांकों में मजबूत उछाल दर्ज किया गया। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों की चिंता के बावजूद बाजार ने तीन दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ दिया।

सोमवार को निफ्टी में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। सूचकांक लगभग 547 अंकों के दायरे में कारोबार करता रहा, जो पिछले करीब छह सप्ताह का सबसे बड़ा इंट्राडे मूवमेंट माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण बाजार में अस्थिरता बनी हुई है।


बैंकिंग सेक्टर ने दी मजबूती

बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयरों ने बाजार को सबसे अधिक सहारा दिया।

देश के सबसे बड़े निजी बैंक HDFC Bank के शेयर लगभग 2.9% उछल गए। इसके अलावा ICICI Bank के शेयरों में भी करीब 1% की बढ़त दर्ज की गई।

विश्लेषकों का मानना है कि पिछले सप्ताह आई गिरावट के बाद निवेशकों ने बड़े बैंकिंग शेयरों में दोबारा खरीदारी की, जिससे बाजार को मजबूती मिली।


रिलायंस ने भी दिया सहारा, तेल कंपनियों पर दबाव

ऊर्जा क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Reliance Industries के शेयर लगभग 1% चढ़े, जिससे सेंसेक्स को अतिरिक्त समर्थन मिला।

हालांकि तेल विपणन कंपनियों पर दबाव देखने को मिला। Bharat Petroleum Corporation Limited, Hindustan Petroleum Corporation Limited और Indian Oil Corporation के शेयर 4–5% तक गिर गए। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म HSBC द्वारा इन कंपनियों की रेटिंग “बाय” से घटाकर “होल्ड” किए जाने के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली की।


ऑटो सेक्टर में हल्की रिकवरी

ऑटो सेक्टर में सोमवार को कुछ राहत देखने को मिली। पिछले सप्ताह करीब 10.6% की भारी गिरावट झेलने के बाद इस सेक्टर के शेयरों में 1.7% की बढ़त दर्ज की गई। विशेषज्ञों के अनुसार, घरेलू मांग की उम्मीदों और कम कीमतों पर खरीदारी के कारण यह सुधार देखने को मिला।


आईडीबीआई बैंक में भारी गिरावट

दूसरी ओर IDBI Bank के शेयरों में बड़ी गिरावट दर्ज हुई और यह 16.6% टूट गया। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि सरकार बैंक में अपनी बहुमत हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया फिलहाल टाल सकती है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई।


मिड-कैप और स्मॉल-कैप में कमजोरी

हालांकि प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए, लेकिन व्यापक बाजार में कमजोरी बनी रही।

मिड-कैप सूचकांक 0.3% और स्मॉल-कैप सूचकांक 0.5% गिर गए। कुल मिलाकर 16 में से 9 प्रमुख सेक्टर सूचकांक बढ़त में बंद हुए, जो यह दर्शाता है कि बाजार में चुनिंदा शेयरों में ही खरीदारी हुई।


वैश्विक कारकों का प्रभाव

वैश्विक स्तर पर भी घटनाक्रम बाजार की दिशा तय कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 104 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी रही, जिसमें 1.41% की बढ़त दर्ज हुई।

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए अहम माने जाने वाले Strait of Hormuz की सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद की अपील की है। इस मार्ग में किसी भी बाधा से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है।


रुपये की स्थिति

मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया कमजोर रहा और यह 92.42 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ।


आगे की राह

विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। हालांकि मजबूत घरेलू अर्थव्यवस्था और बड़ी कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बाजार को सहारा दे सकती है।

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