Last Updated on February 6, 2026 11:41 pm by BIZNAMA NEWS

भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक शुक्रवार को हल्की बढ़त के साथ बंद हुए। कारोबार के दौरान बाजार लगभग सपाट रहा, लेकिन निवेशकों को उस समय राहत मिली जब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया।
बाजार बंद होने पर बीएसई सेंसेक्स 266.47 अंक (0.32%) चढ़कर 83,580.40 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50.90 अंक (0.20%) बढ़कर 25,693.70 पर पहुंच गया।
साप्ताहिक आधार पर (रविवार के बजट सत्र सहित) निफ्टी में 1.47 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो 14 नवंबर 2025 के बाद सबसे अच्छा साप्ताहिक प्रदर्शन रहा।
RBI नीति: विकास अनुमान बढ़ा, महंगाई अनुमान में हल्की वृद्धि
आरबीआई ने आर्थिक विकास को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। केंद्रीय बैंक ने:
- FY27 की पहली तिमाही (Q1) के लिए GDP अनुमान 6.9% किया
- FY27 की दूसरी तिमाही (Q2) का अनुमान 7% तक बढ़ाया
हालांकि, जीडीपी सीरीज में संभावित बदलाव को देखते हुए आरबीआई ने पूरे वित्त वर्ष के लिए कोई स्पष्ट गाइडेंस देने से परहेज किया।
वहीं महंगाई के अनुमान में भी हल्का संशोधन हुआ:
- FY26 के लिए मुद्रास्फीति अनुमान 2% से बढ़ाकर 2.1% किया गया
विश्लेषकों का मानना है कि उच्च विकास और हल्की बढ़ी महंगाई का संकेत यह देता है कि आरबीआई आने वाले समय में लंबे समय तक ‘पॉज’ (Prolonged Pause) की नीति अपना सकता है।
आरबीआई ने यह भी स्वीकार किया कि दिसंबर 2025 की बैठक के बाद से वैश्विक आर्थिक दबाव और बाहरी चुनौतियां बढ़ी हैं।
सेक्टर-वाइज प्रदर्शन (NSE)
सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर
FMCG
- निफ्टी FMCG इंडेक्स 2.2% उछला
- डिफेंसिव सेक्टर होने के कारण निवेशकों ने एफएमसीजी में मजबूत खरीदारी दिखाई।
सबसे कमजोर सेक्टर
आईटी (IT)
- निफ्टी IT इंडेक्स 1.47% गिरा
- एआई (Artificial Intelligence) के कारण आईटी उद्योग के पारंपरिक बिजनेस मॉडल पर असर की आशंका से दबाव बना रहा।
अन्य कमजोर सेक्टर
फार्मा
- मुनाफावसूली के कारण गिरावट।
ऑटो
- कमजोर बाजार चौड़ाई के कारण दबाव।
मेटल
- वैश्विक कमोडिटी संकेतों के चलते गिरावट।
रियल्टी
- निवेशक सतर्क रहे, इंडेक्स नीचे बंद।
मीडिया
- सीमित खरीदारी के चलते नुकसान में रहा।
ब्रॉडर मार्केट: मिडकैप और स्मॉलकैप में कमजोरी
बाजार की तेजी पूरी तरह व्यापक नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स दबाव में रहे:
- निफ्टी मिडकैप 100 में 0.02% की गिरावट
- निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.27% की गिरावट
इससे संकेत मिला कि तेजी केवल चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित रही।
टॉप गेनर्स और टॉप लूजर्स
सबसे ज्यादा बढ़ने वाले शेयर
- ITC
- कोटक बैंक
- HUL
- भारती एयरटेल
- बजाज फाइनेंस
- बजाज फिनसर्व
सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयर
- TCS
- टेक महिंद्रा
- अडानी पोर्ट्स
- Eternal
- एशियन पेंट्स
साप्ताहिक बाजार रुझान: उतार-चढ़ाव भरा सप्ताह
घरेलू बाजारों में इस सप्ताह भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। बजट के दिन एसटीटी (STT) से जुड़े झटके के कारण बाजार में तेज गिरावट आई थी। इसके बाद एआई से जुड़ी चिंताओं के चलते आईटी शेयरों में भारी बिकवाली देखी गई।
हालांकि, इसके अगले दिन भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा ने बाजार में नया उत्साह भर दिया और बाजार ने तेजी से रिकवरी की।
इस पूरे सप्ताह में:
- सेंसेक्स लगभग 1.6% चढ़ा
- निफ्टी करीब 1.5% बढ़ा
आईटी सेक्टर पर बड़ा असर: ₹2.4 लाख करोड़ मार्केट कैप घटा
आईटी सेक्टर इस सप्ताह सबसे ज्यादा दबाव में रहा।
- आईटी कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण लगभग ₹2.4 लाख करोड़ घट गया।
- बीएसई IT इंडेक्स 6.2% टूट गया
यह गिरावट मुख्य रूप से एआई के बढ़ते प्रभाव और वैश्विक मांग में संभावित कमजोरी की आशंका से जुड़ी मानी जा रही है।
Morgan Stanley का बड़ा अनुमान: सेंसेक्स 95,000 तक जा सकता है
ग्लोबल निवेश सलाहकार कंपनी Morgan Stanley ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर सकारात्मक रुख रखा है।
कंपनी के अनुसार भारत में कई ऐसे कारक हैं जो बाजार को मजबूत आधार देते हैं:
- आकर्षक वैल्यूएशन
- कमजोर विदेशी पोजिशनिंग
- नीति आधारित प्रोत्साहन
- आर्थिक विकास चक्र में तेजी
- कमजोर मुद्रा (रुपया)
- संभावित बायबैक साइकिल
Morgan Stanley ने अनुमान लगाया है कि दिसंबर 2026 तक सेंसेक्स 95,000 तक पहुंच सकता है, जो मौजूदा स्तर से लगभग 14% की बढ़त होगी।
मैक्रो सपोर्ट: भारत की स्थिति मजबूत
Morgan Stanley ने भारत के मैक्रो संकेतकों को भी मजबूत बताया। रिपोर्ट के अनुसार:
- GDP में तेल की हिस्सेदारी घट रही है
- GDP में निर्यात, खासकर सर्विस एक्सपोर्ट का योगदान बढ़ रहा है
- फिस्कल कंसोलिडेशन से आर्थिक संतुलन बेहतर हुआ है
- महंगाई में उतार-चढ़ाव कम हो रहा है
इन कारकों के चलते भविष्य में ब्याज दरों में स्थिरता और मार्केट वैल्यूएशन (P/E) बढ़ने की संभावना जताई गई है।
FPI खरीदारी में लौटे
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भी खरीदारी शुरू की है।
- पहले उन्होंने करीब ₹36,000 करोड़ की बिकवाली की थी
- लेकिन फरवरी में अब तक उन्होंने ₹8,129 करोड़ की खरीदारी की है
यह बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।
बजट के बाद बाजार का ऐतिहासिक ट्रेंड
ICICI Securities की रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन दशकों के आंकड़े बताते हैं कि बजट के बाद:
- अगले तीन महीनों में निफ्टी औसतन करीब 10% रिटर्न देता है
इससे बाजार के मध्यम अवधि के रुझान को सकारात्मक माना जा रहा है।
आगे का अनुमान: बाजार रेंज-बाउंड रह सकता है
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार सीमित दायरे (range-bound) में रह सकता है। मोटिलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के रिसर्च प्रमुख सिद्धार्थ खेमका के अनुसार बाजार की दिशा अब:
- कंपनियों के तिमाही नतीजों
- वैश्विक अनिश्चितताओं
- अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों
- और फेडरल रिजर्व अधिकारियों के बयानों
पर निर्भर करेगी।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, आरबीआई के स्थिर रुख और बेहतर विकास अनुमान ने बाजार को सहारा दिया, लेकिन आईटी सेक्टर की कमजोरी और वैश्विक संकेतों के कारण निवेशक सतर्क बने रहे। एफएमसीजी और चुनिंदा फाइनेंस शेयरों में खरीदारी दिखी, जबकि आईटी में दबाव जारी है।






