Last Updated on May 22, 2026 12:14 am by BIZNAMA NEWS

हमारे बिजनेस संवाददाता से
रुपये को स्थिर करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा संभावित कदम उठाए जाने की खबरों के बीच गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार दबाव में रहे और प्रमुख सूचकांक मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, ऊंचे वैल्यूएशन पर मुनाफावसूली और कमजोर वैश्विक संकेतों ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।
बाजार में दिनभर उतार-चढ़ाव का माहौल रहा। रिपोर्टों में कहा गया कि आरबीआई रुपये को सहारा देने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि, अतिरिक्त करेंसी स्वैप व्यवस्था तथा विदेशी निवेशकों से डॉलर जुटाने जैसे विकल्पों पर विचार कर सकता है। इन अटकलों ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया।
बीएसई सेंसेक्स 135.03 अंक यानी 0.18 प्रतिशत गिरकर 75,183.36 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 4.30 अंक फिसलकर 23,654.70 पर आ गया। कारोबार के दौरान निफ्टी 23,700 के स्तर से नीचे चला गया। आईटी और एफएमसीजी शेयरों में बिकवाली सबसे ज्यादा रही। इंफोसिस, भारती एयरटेल और रिलायंस इंडस्ट्रीज बाजार पर प्रमुख दबाव डालने वाले शेयर रहे।
हालांकि, व्यापक बाजार ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। बीएसई मिडकैप इंडेक्स 0.18 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.70 प्रतिशत चढ़ा। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अभी भी चुनिंदा घरेलू विकास आधारित कंपनियों में निवेश कर रहे हैं। बीएसई पर बढ़ने वाले शेयरों की संख्या गिरने वाले शेयरों से अधिक रही।
इंडिया VIX, जिसे बाजार का “फियर इंडेक्स” माना जाता है, 3.34 प्रतिशत घटकर 17.82 पर आ गया, जिससे निकट भविष्य में अस्थिरता को लेकर निवेशकों की चिंता कुछ कम होती दिखी।
आर्थिक आंकड़ों से मिले मिश्रित संकेत
देश के आर्थिक संकेतकों ने मिश्रित तस्वीर पेश की। आठ प्रमुख उद्योगों (कोर सेक्टर) का संयुक्त सूचकांक अप्रैल 2026 में 1.7 प्रतिशत बढ़ा। सीमेंट, स्टील और बिजली उत्पादन में वृद्धि इसका प्रमुख कारण रही। पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में कोर सेक्टर की वृद्धि दर 2.7 प्रतिशत रही।
दूसरी ओर, HSBC फ्लैश इंडिया PMI कंपोजिट आउटपुट इंडेक्स मई में 58.1 पर बना रहा, जो निजी क्षेत्र की मजबूत गतिविधियों को दर्शाता है। हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार कुछ धीमी हुई। मैन्युफैक्चरिंग PMI अप्रैल के 54.7 से घटकर मई में 54.3 पर आ गया, जो लगभग चार वर्षों में दूसरी सबसे कमजोर वृद्धि को दर्शाता है। वहीं, सर्विस सेक्टर PMI 58.9 पर पहुंच गया।
रुपये, बॉन्ड और कमोडिटी बाजार
विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले थोड़ा मजबूत होकर 96.2275 पर पहुंच गया, जबकि पिछले सत्र में यह 96.8600 पर बंद हुआ था। 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड मामूली घटकर 7.074 प्रतिशत रह गई।
कमोडिटी बाजार में भी नरमी रही। एमसीएक्स पर सोना वायदा 0.29 प्रतिशत गिरकर 1,59,538 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसल गया। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदों से कच्चे तेल पर दबाव बना।
वैश्विक बाजारों में कमजोरी
यूरोप में कमजोर PMI आंकड़ों के कारण वैश्विक बाजारों में भी दबाव देखने को मिला। ब्रिटेन और फ्रांस में आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी पड़ने के संकेत मिले। एशियाई बाजारों में भी अधिकांश सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए, हालांकि जापान का निक्केई मजबूत निर्यात आंकड़ों के दम पर 3 प्रतिशत से अधिक उछला।
कंपनियों के नतीजों पर बाजार की नजर
तिमाही नतीजों के चलते कई शेयरों में तेज हलचल देखने को मिली।
हनीवेल ऑटोमेशन इंडिया लगभग 16 प्रतिशत उछला, जबकि मेट्रो ब्रांड्स, जेएसडब्ल्यू सीमेंट और समवर्धना मदरसन इंटरनेशनल मजबूत नतीजों के दम पर बढ़त में रहे।
ऑरियनप्रो सॉल्यूशंस को अमेरिका में बड़ा फिनटेक कॉन्ट्रैक्ट मिलने से उसके शेयरों में तेजी आई।
दूसरी ओर, जुबिलेंट फूडवर्क्स करीब 8 प्रतिशत टूट गया। निवेशकों को डोमिनोज इंडिया बिजनेस की धीमी वृद्धि और बढ़ती लागत को लेकर चिंता रही। ओला इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के शेयर भी कमजोर राजस्व के कारण दबाव में रहे।
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर आरबीआई के रुख, विदेशी निवेश प्रवाह, रुपये की चाल और वैश्विक बॉन्ड यील्ड पर बनी रहेगी।
