Last Updated on February 4, 2026 12:15 am by BIZNAMA NEWS

BIZ DESK

भारतीय शेयर बाज़ारों में मंगलवार को ज़ोरदार तेज़ी देखने को मिली। भारत-अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बाद विदेशी निवेशकों की मज़बूत वापसी से सेंसेक्स और निफ्टी ने एक साल से अधिक समय की सबसे बड़ी एकदिवसीय बढ़त दर्ज की। बीएसई सेंसेक्स 2,072.67 अंक या 2.54 प्रतिशत उछलकर 83,739.13 पर बंद हुआ, जो 22 नवंबर 2024 के बाद की सबसे बड़ी पॉइंट-वाइज बढ़त रही। वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 639.15 अंकों या 2.55 प्रतिशत की तेज़ी रही और यह 25,727.55 पर बंद हुआ।

बाज़ार में तेज़ी का प्रमुख कारण भारत-अमेरिका व्यापार समझौता रहा, जिससे टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता काफी हद तक समाप्त हो गई। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय आयात पर लगने वाले पारस्परिक शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है और रूस से तेल खरीद से जुड़े अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क को पूरी तरह वापस ले लिया है। इससे कुल टैरिफ बोझ में लगभग 32 प्रतिशत की कमी आई है।

एक्सचेंज के अस्थायी आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मंगलवार को भारतीय शेयर बाज़ार में ₹5,426.24 करोड़ का निवेश किया। इससे पहले 2026 में अब तक एफपीआई लगभग ₹30,000 करोड़ की निकासी कर चुके थे। रुपये में भी मज़बूती देखने को मिली और यह डॉलर के मुकाबले करीब 1.40 प्रतिशत मजबूत हुआ।

हालांकि बाज़ार ने ऊँचे स्तर पर शुरुआत की, लेकिन दिन के दौरान तेज़ उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इसके बावजूद निचले स्तरों पर मज़बूत खरीदारी से सूचकांक संभल गए। इंडिया VIX में 7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो निवेशकों की घबराहट में कमी का संकेत है। बीएसई-सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाज़ार पूंजीकरण करीब ₹12.10 लाख करोड़ बढ़ा।


सेक्टर-वाइज प्रदर्शन

निर्यात आधारित सेक्टर:
इंजीनियरिंग गुड्स, टेक्सटाइल्स, केमिकल्स, फिशरीज़, ऑटो एंसिलरी और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज (EMS) शेयरों में मज़बूत तेजी रही। कम टैरिफ से इन क्षेत्रों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ने की उम्मीद है।

बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं:
निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज इंडेक्स में 3 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई, जबकि निफ्टी बैंक 2 प्रतिशत से ज़्यादा चढ़ा। बेहतर आर्थिक दृष्टिकोण और पूंजी प्रवाह से बैंकों को द्वितीयक लाभ मिलने की संभावना जताई जा रही है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा:
इंफ्रास्ट्रक्चर, ऊर्जा और यूटिलिटी शेयरों में ज़ोरदार खरीदारी देखी गई। निवेश प्रवाह और द्विपक्षीय व्यापार से जुड़े प्रोजेक्ट्स में तेजी की उम्मीद ने इन सेक्टरों को सहारा दिया।

रियल्टी:
रियल एस्टेट सेक्टर लगभग 5 प्रतिशत की छलांग के साथ शीर्ष प्रदर्शन करने वालों में रहा। बेहतर लिक्विडिटी और मांग में सुधार की उम्मीद से इस सेक्टर को मजबूती मिली।

फार्मा और हेल्थकेयर:
निर्यात संभावनाओं में सुधार और स्थिर वैश्विक मांग के संकेतों से फार्मा शेयरों में भी तेजी रही।

आईटी और एफएमसीजी:
आईटी शेयर अपेक्षाकृत कमजोर रहे, जबकि एफएमसीजी शेयर सीमित दायरे में कारोबार करते दिखे।


आगे का रुख

विश्लेषकों का मानना है कि व्यापार समझौते से जुड़ी अनिश्चितता समाप्त होने, एफपीआई प्रवाह में सुधार और रुपये की मजबूती से निकट भविष्य में बाज़ार की धारणा सकारात्मक बनी रह सकती है। हालांकि निफ्टी के लिए 25,400–25,500 का स्तर अहम रहेगा और आगामी आरबीआई मौद्रिक नीति घोषणा से अस्थिरता बनी रह सकती है।

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