Last Updated on April 8, 2026 10:53 pm by BIZNAMA NEWS

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भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में नरमी, कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट और मौद्रिक नीति में स्थिरता के संकेतों ने निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया। इन सकारात्मक कारकों के संयुक्त प्रभाव से प्रमुख सूचकांक लगभग 4 प्रतिशत तक उछल गए और बाजार ने लगातार पाँचवें सत्र में बढ़त दर्ज की।

सेंसेक्स और निफ्टी में तेज उछाल

दिन के कारोबार में BSE Sensex 2,946.32 अंक यानी 3.95 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,562.90 पर बंद हुआ। वहीं Nifty 50 873.70 अंक यानी 3.78 प्रतिशत चढ़कर 23,997.35 पर पहुंच गया।

पिछले पाँच कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स में कुल 7.8 प्रतिशत और निफ्टी में 7.46 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है, जो बाजार में मजबूत तेजी का संकेत है।

इस तेजी में प्रमुख योगदान इंजीनियरिंग और बैंकिंग शेयरों का रहा। Larsen & Toubro के शेयर 7.64 प्रतिशत उछले, जबकि निजी बैंकिंग क्षेत्र के दिग्गज HDFC Bank और ICICI Bank में क्रमशः 5.71 प्रतिशत और 5.06 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।

व्यापक बाजार में भी मजबूती

बाजार की तेजी सिर्फ बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में भी मजबूत खरीदारी देखने को मिली।

  • BSE MidCap Index में 3.97 प्रतिशत की वृद्धि हुई
  • BSE SmallCap Index 3.88 प्रतिशत चढ़ा

बाजार की चौड़ाई भी सकारात्मक रही। बीएसई पर कुल 3,859 शेयरों में तेजी, जबकि 537 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान बाजार की अस्थिरता को मापने वाला India VIX 20.23 प्रतिशत गिरकर 19.70 पर आ गया, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत है।

आरबीआई ने रेपो दर स्थिर रखी

बाजार को समर्थन देने वाला एक महत्वपूर्ण कारक Reserve Bank of India की मौद्रिक नीति भी रही।

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC), जिसकी अध्यक्षता गवर्नर Sanjay Malhotra कर रहे हैं, ने सर्वसम्मति से रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया

इसके साथ ही अन्य प्रमुख दरें भी अपरिवर्तित रहीं:

  • स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF): 5.00 प्रतिशत
  • मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF): 5.50 प्रतिशत
  • बैंक रेट: 5.50 प्रतिशत

आरबीआई ने अपनी “न्यूट्रल” नीति रुख को भी बरकरार रखा, जिससे यह संकेत मिला कि केंद्रीय बैंक परिस्थितियों के अनुसार भविष्य में नीतिगत कदम उठाने के लिए लचीला रुख अपनाएगा।

आर्थिक वृद्धि का मजबूत परिदृश्य

आरबीआई के अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था वैश्विक चुनौतियों के बावजूद मजबूत बनी हुई है। वित्त वर्ष 2025–26 के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि अनुमान को बढ़ाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया गया है, जो पहले 7.4 प्रतिशत था।

हालाँकि केंद्रीय बैंक ने यह भी चेतावनी दी कि ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में संभावित व्यवधान आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं।

वित्त वर्ष 2026–27 के लिए आरबीआई ने जीडीपी वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।

मुद्रास्फीति के जोखिम

आरबीआई ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में मुद्रास्फीति बढ़ सकती है। केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026–27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है।

ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और संभावित एल नीनो के कारण मानसून पर असर जैसे कारक महंगाई को बढ़ा सकते हैं।

पश्चिम एशिया में तनाव कम होने से राहत

वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल का एक बड़ा कारण United States और Iran के बीच अस्थायी संघर्षविराम की खबरें भी रहीं।

रिपोर्टों के अनुसार दोनों देशों ने दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम पर सहमति जताई है, जिसमें Pakistan मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। इस अवधि में Strait of Hormuz से तेल आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखने पर भी चर्चा हो रही है।

तनाव में कमी के चलते वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की प्रवृत्ति बढ़ी और कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड लगभग 13 प्रतिशत गिरकर 95 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, जो भारत जैसे आयातक देशों के लिए राहत की खबर है।

अन्य वित्तीय संकेतक

  • भारत के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड घटकर 6.927 प्रतिशत पर आ गई
  • रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर 92.59 के आसपास पहुंचा
  • सोना वायदा कीमतों में 1.76 प्रतिशत की वृद्धि हुई

कॉर्पोरेट खबरों से शेयरों में हलचल

कई कंपनियों से जुड़ी सकारात्मक खबरों ने भी बाजार को मजबूती दी।

Adani Group की कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल आया। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी अदालत ने समूह को U.S. Securities and Exchange Commission द्वारा दायर मामले को खारिज करने की याचिका पर आगे बढ़ने की अनुमति दी है।

इसके अलावा Titan Company के शेयरों में भी 6 प्रतिशत से अधिक तेजी आई, क्योंकि कंपनी के उपभोक्ता कारोबार में चौथी तिमाही में 46 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।

वहीं Shriram Finance के शेयर लगभग 10 प्रतिशत चढ़ गए, जब MUFG Bank ने लगभग 39,618 करोड़ रुपये का निवेश कर कंपनी में 20 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं और वैश्विक तनाव और नहीं बढ़ता, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान जारी रह सकता है। हालांकि ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताएँ अभी भी प्रमुख जोखिम कारक बने हुए हैं।

आरबीआई की अगली मौद्रिक नीति बैठक 3 से 5 जून 2026 के बीच आयोजित होगी, जिस पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।