Last Updated on April 28, 2026 10:39 pm by BIZNAMA NEWS
हमारे व्यवसाय संवाददाता से
वैश्विक संकेतों के दबाव में भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को गिरावट के साथ बंद हुए। पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, रुपये की कमजोरी और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि, कुछ रक्षात्मक (defensive) सेक्टरों में चुनिंदा खरीदारी देखने को मिली।
BSE Sensex 416.72 अंक यानी 0.54% गिरकर 76,886.91 पर बंद हुआ। दिन के दौरान यह 562 अंकों तक फिसल गया था। वहीं Nifty 50 97 अंक यानी 0.40% गिरकर 23,995.70 पर बंद हुआ, जो 24,000 के अहम स्तर के नीचे है।
गिरावट की मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रही। Brent crude करीब 3% बढ़कर 111.4 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधाओं के कारण यह तेजी आई, जिससे भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए महंगाई का खतरा बढ़ गया है।
इसी बीच रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 94.5 के पार चला गया, जिससे आयात लागत और बढ़ने की आशंका है। एक्सचेंज डेटा के अनुसार Foreign Institutional Investors ने ₹1,151.48 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की, जिसने बाजार पर और दबाव डाला।
सेक्टोरल ट्रेंड: अलग-अलग रुख
बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र:
बैंकिंग शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। Axis Bank, State Bank of India और ICICI Bank प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में रहे। ब्याज दरों के दबाव और संभावित NPA जोखिम को लेकर चिंता बनी हुई है।
ऑटो और एविएशन:
ईंधन लागत बढ़ने से ऑटो और एविएशन सेक्टर दबाव में रहे। Maruti Suzuki और InterGlobe Aviation के शेयर गिरे, क्योंकि महंगा ईंधन कंपनियों के मार्जिन पर असर डाल सकता है।
आईटी सेक्टर:
आईटी शेयरों में मिला-जुला रुख रहा। HCL Technologies में गिरावट आई, जबकि Tech Mahindra में हल्की बढ़त देखी गई।
टेलीकॉम और ऊर्जा:
रक्षात्मक खरीदारी के चलते Reliance Industries और Bharti Airtel जैसे शेयरों में तेजी रही।
फार्मा सेक्टर:
अनिश्चितता के माहौल में Sun Pharmaceutical Industries जैसे फार्मा शेयरों में निवेशकों की रुचि बढ़ी, जिससे यह सेक्टर मजबूती में रहा।
माइनिंग और कोयला:
Coal India के शेयर 4% से अधिक चढ़े, बेहतर तिमाही नतीजों के कारण इस सेक्टर में मजबूती दिखी।
मैक्रो दबाव और बढ़ा जोखिम
देश के कई हिस्सों में जारी भीषण गर्मी भी महंगाई के लिए नया खतरा बन रही है, जिससे खाद्य और ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। वैश्विक स्तर पर Intel का 6.5 अरब डॉलर का बॉन्ड इश्यू निवेशकों के भरोसे का संकेत देता है, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम अभी भी बने हुए हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने शर्तों के साथ होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने का संकेत दिया है, जिससे तेल की कीमतों में भविष्य में राहत मिल सकती है—हालांकि स्थिति अभी अनिश्चित बनी हुई है।
आगे का रास्ता: अस्थिरता जारी रहने के संकेत
विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा। कच्चे तेल की कीमतें, रुपये की चाल, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और वैश्विक तनाव बाजार की दिशा तय करेंगे।
फिलहाल भारतीय बाजार एक “मैक्रो दबाव” के दौर से गुजर रहा है, जहां बाहरी कारक घरेलू मजबूती पर भारी पड़ते दिख रहे हैं।

