Last Updated on June 3, 2026 11:43 pm by BIZNAMA NEWS


वैश्विक तनाव, महंगा कच्चा तेल और आईटी शेयरों की कमजोरी के बीच निवेशकों ने निचले स्तरों पर की खरीदारी

हमारे बिजनेस संवाददाता से

बुधवार को घरेलू शेयर बाजारों ने शुरुआती भारी गिरावट से उबरते हुए शानदार वापसी दर्ज की, लेकिन दिन के अंत तक निवेशकों की सतर्कता पूरी तरह खत्म नहीं हुई। दिनभर बिकवाली के दबाव में रहने के बाद बाजार में निचले स्तरों पर खरीदारी उभरी, जिससे सूचकांक इंट्राडे के निचले स्तरों से तेज रिकवरी करने में सफल रहे। हालांकि वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें और आईटी शेयरों में कमजोरी ने बाजार की तेजी पर अंकुश बनाए रखा।

कारोबार के शुरुआती घंटों में तेज गिरावट के बाद निवेशकों ने चुनिंदा मजबूत कंपनियों में खरीदारी शुरू की। इस खरीदारी से बाजार को सहारा मिला, लेकिन निवेशकों के बीच सतर्कता बनी रही क्योंकि वैश्विक घटनाक्रमों के आर्थिक असर को लेकर चिंता बनी हुई है।

निफ्टी 50 कारोबार के दौरान 23,151.50 तक फिसल गया था, लेकिन बाद में लगभग 250 अंकों की रिकवरी करते हुए 23,400 के ऊपर लौट आया। इसके बावजूद सूचकांक अंत में 77.95 अंक या 0.33 प्रतिशत गिरकर 23,405.60 पर बंद हुआ।

वहीं बीएसई सेंसेक्स 303.67 अंक या 0.41 प्रतिशत गिरकर 74,346.17 पर बंद हुआ।

बाजार विश्लेषकों के अनुसार हालिया गिरावट के बाद निवेशकों ने आकर्षक मूल्यांकन वाले शेयरों में खरीदारी की, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण जोखिम लेने की इच्छा सीमित रही।

कच्चे तेल और मध्य पूर्व तनाव ने बढ़ाई चिंता

बाजार की सबसे बड़ी चिंता अमेरिका और ईरान के बीच संभावित संघर्ष विराम वार्ता को लेकर बनी अनिश्चितता रही। इस घटनाक्रम ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को अस्थिर बनाए रखा और कच्चे तेल की कीमतों को ऊंचाई पर पहुंचा दिया।

ब्रेंट क्रूड लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया, जिससे महंगाई बढ़ने और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर दबाव बढ़ने की आशंका मजबूत हुई।

हालांकि बाजार ने दिन के दूसरे हिस्से में रिकवरी दिखाई, लेकिन निवेशकों का भरोसा पूरी तरह लौटता नहीं दिखा।

आईटी शेयरों की बिकवाली ने बिगाड़ा बाजार का संतुलन

बुधवार की गिरावट में सबसे बड़ा योगदान आईटी सेक्टर का रहा।

टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में 8.39 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई। दिलचस्प बात यह रही कि कंपनी ने यूरोक्लियर समूह के साथ साझेदारी विस्तार की घोषणा की, इसके बावजूद निवेशकों ने मुनाफावसूली को प्राथमिकता दी।

एचसीएल टेक्नोलॉजीज 5.19 प्रतिशत और इन्फोसिस 3.79 प्रतिशत टूटे।

विश्लेषकों का मानना है कि निवेशक वैश्विक मांग और तकनीकी खर्च को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं।

एफएमसीजी शेयरों की कमजोरी ने भी बाजार को अतिरिक्त समर्थन मिलने से रोका।

व्यापक बाजार में कमजोरी बनी रही

हालांकि मुख्य सूचकांकों ने रिकवरी दिखाई, लेकिन व्यापक बाजार का प्रदर्शन कमजोर रहा।

बीएसई मिडकैप इंडेक्स 0.50 प्रतिशत गिरा, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स मामूली 0.01 प्रतिशत बढ़त के साथ बंद हुआ।

बाजार की चौड़ाई भी कमजोर रही। बीएसई पर 2,732 शेयरों में गिरावट दर्ज हुई, जबकि 1,573 शेयर बढ़े

इस बीच बाजार में उतार-चढ़ाव की आशंका बढ़ी और इंडिया VIX 6 प्रतिशत बढ़कर 16.28 पर पहुंच गया।

तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी अभी भी दबाव में है और 23,300 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन माना जा रहा है, जबकि 23,600 के ऊपर स्थायी बढ़त बाजार की मजबूती का संकेत दे सकती है।

सेवा क्षेत्र से मिली राहत

बाजार के लिए सकारात्मक संकेत आर्थिक आंकड़ों से मिले।

एचएसबीसी इंडिया सर्विसेज पीएमआई मई 2026 में बढ़कर 59.8 पर पहुंच गया, जो शुरुआती अनुमान 58.9 और अप्रैल के 58.8 से बेहतर रहा।

यह आंकड़ा बताता है कि सेवा क्षेत्र में गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं और नए ऑर्डर लगातार बढ़ रहे हैं। विदेशों से मांग में भी सुधार दर्ज किया गया।

साथ ही इनपुट लागत में कमी से कंपनियों पर कीमत बढ़ाने का दबाव कम हुआ है।

बॉन्ड, रुपये और कमोडिटी बाजार पर भी नजर

भारतीय वित्तीय बाजारों में भी सतर्कता दिखाई दी।

भारत के 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 7.025 प्रतिशत हो गई।

रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 95.6775 पर पहुंच गया।

वहीं एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर्स 0.93 प्रतिशत गिरकर 1,54,100 रुपये पर बंद हुए।

कॉरपोरेट मोर्चे पर चुनिंदा शेयरों में हलचल

जॉन कॉकरिल इंडिया को लगभग 1,300 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिलने से शेयर में 20 प्रतिशत की तेजी आई।

वरॉक इंजीनियरिंग ने चीन की कंपनी के साथ रणनीतिक साझेदारी के बाद बढ़त दर्ज की।

कॉनकॉर्ड बायोटेक को अमेरिकी मंजूरी मिलने से निवेशकों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।

वहीं इंडसइंड बैंक व्हिसलब्लोअर शिकायत की खबरों के बाद दबाव में रहा, हालांकि बैंक ने सभी आरोपों पर स्पष्टीकरण जारी किया।

आगे क्या?

बुधवार के कारोबार ने यह संकेत दिया कि घरेलू अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक घटनाक्रम, ऊर्जा कीमतें और विदेशी पूंजी प्रवाह निकट भविष्य में बाजार की दिशा तय करेंगे। निवेशकों के लिए फिलहाल सतर्कता और चयनात्मक निवेश ही सबसे सुरक्षित रणनीति मानी जा रही है।