Last Updated on June 15, 2026 5:01 pm by BIZNAMA NEWS

Staff Reporter

अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की धारणा (रिस्क एपेटाइट) मजबूत हुई, जिसका सकारात्मक असर भारतीय शेयर बाजारों पर भी देखने को मिला। भू-राजनीतिक तनाव कम होने और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं के घटने से निवेशकों का भरोसा बढ़ा, जिसके परिणामस्वरूप सोमवार को घरेलू इक्विटी बाजारों में जोरदार खरीदारी दर्ज की गई।

बीएसई का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 736.38 अंक अथवा 0.97 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,264.33 पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई का निफ्टी-50 सूचकांक 231 अंक अथवा 0.98 प्रतिशत चढ़कर 23,853.90 के स्तर पर पहुंच गया।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, वाशिंगटन और तेहरान के बीच चार महीने से जारी संघर्ष समाप्त करने तथा तत्काल सैन्य कार्रवाई रोकने के समझौते ने निवेशकों की चिंताओं को काफी हद तक कम किया है। इससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में संभावित व्यवधानों का जोखिम घटा है, जो भारत जैसे कच्चे तेल के बड़े आयातक देश के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि पश्चिम एशिया में स्थिरता बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव कम हो सकता है। इससे महंगाई पर दबाव घटेगा, चालू खाते के घाटे पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी और कंपनियों की लाभप्रदता में सुधार की संभावना बढ़ेगी।

सोमवार की तेजी केवल प्रमुख सूचकांकों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में भी मजबूत भागीदारी देखने को मिली। निफ्टी मिडकैप सूचकांक 1.29 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक 1.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए, जो निवेशकों के व्यापक भरोसे को दर्शाता है।

निफ्टी-50 में ट्रेंट, श्रीराम फाइनेंस और एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस के शेयर सबसे अधिक लाभ में रहे। इन कंपनियों में निवेशकों की मजबूत खरीदारी देखने को मिली।

क्षेत्रवार प्रदर्शन की बात करें तो रियल एस्टेट शेयरों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी रियल्टी सूचकांक में 4 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों में सुधार और आवासीय मांग को लेकर सकारात्मक उम्मीदों ने इस क्षेत्र को समर्थन दिया।

उपभोक्ता मांग आधारित क्षेत्रों में भी मजबूती देखने को मिली। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और निफ्टी ऑटो सूचकांकों ने व्यापक बाजार से बेहतर प्रदर्शन किया, जिससे संकेत मिलता है कि निवेशक घरेलू खपत आधारित कारोबारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं।

इसके विपरीत, फार्मा क्षेत्र बाजार की तेजी में पीछे रह गया। निफ्टी फार्मा सूचकांक दिन का सबसे कमजोर क्षेत्रीय सूचकांक रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों ने रक्षात्मक क्षेत्रों से निकलकर अधिक जोखिम वाले चक्रीय क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया, जिसके चलते फार्मा शेयरों में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन रहा।

तकनीकी दृष्टि से निफ्टी के लिए 24,000 का स्तर निकट अवधि में महत्वपूर्ण प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि सूचकांक इस स्तर को निर्णायक रूप से पार कर लेता है, तो बाजार में आगे और तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, 23,800 का स्तर तत्काल समर्थन (सपोर्ट) क्षेत्र के रूप में उभर रहा है और इस स्तर के ऊपर बने रहना बाजार की सकारात्मक संरचना के लिए अहम होगा।

बाजार सहभागियों की निगाहें अब आगामी घरेलू आर्थिक आंकड़ों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की गतिविधियों, कच्चे तेल की कीमतों और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतिगत संकेतों पर रहेंगी, जो आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका-ईरान समझौते से उत्पन्न सकारात्मक माहौल ने एक बार फिर यह साबित किया है कि भू-राजनीतिक घटनाक्रम वैश्विक वित्तीय बाजारों की दिशा पर गहरा प्रभाव डालते हैं। भारत के लिए कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता आर्थिक वृद्धि, महंगाई नियंत्रण और कॉर्पोरेट आय के लिहाज से एक महत्वपूर्ण सहारा साबित हो सकती है।