Last Updated on April 30, 2026 10:48 pm by BIZNAMA NEWS
हमारे व्यापार संवाददाता द्वारा
घरेलू शेयर बाजारों में गुरुवार को तेज गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतों में उछाल, कमजोर वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में भारी दबाव के चलते प्रमुख सूचकांक नीचे आए, हालांकि आईटी शेयरों ने आंशिक सहारा दिया।
30 शेयरों वाला सेंसेक्स 582.86 अंक या 0.75% गिरकर 76,913.50 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 सूचकांक 180.10 अंक या 0.74% टूटकर 23,997.55 पर आ गया। कारोबार के दौरान निफ्टी 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया, जिसे बाजार के लिए मनोवैज्ञानिक रूप से अहम माना जाता है।
विश्लेषकों के अनुसार, गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और उसके चलते बढ़ती महंगाई की आशंका है। ब्रेंट क्रूड दिन के दौरान करीब 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जो पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान के बंदरगाहों पर संभावित प्रतिबंधों की आशंका के कारण हुआ। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए ऊंची कीमतें चालू खाते के घाटे और महंगाई पर दबाव बढ़ाती हैं।
वैश्विक बाजारों से भी कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला। एशियाई बाजारों में गिरावट देखी गई, जो वॉल स्ट्रीट की कमजोरी के अनुरूप रही। अमेरिकी नीतियों को लेकर अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा है।
घरेलू स्तर पर विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और रुपये में कमजोरी ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया। रुपये ने सत्र के दौरान 95.3450 प्रति डॉलर का रिकॉर्ड निचला स्तर छुआ, हालांकि बाद में थोड़ा संभलकर 94.84 के आसपास रहा। यह गिरावट उभरते बाजारों पर बढ़ते दबाव को दर्शाती है।
सेक्टोरल आधार पर लगभग सभी सूचकांक लाल निशान में बंद हुए, जिसमें बैंकिंग शेयर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। लार्सन एंड टुब्रो 2.03% गिरा, जबकि ICICI बैंक और HDFC बैंक में क्रमशः 1.09% और 0.98% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, निफ्टी आईटी इंडेक्स ने हल्की मजबूती दिखाई, जिसे डॉलर इंडेक्स में नरमी का समर्थन मिला।
विस्तृत बाजारों में भी कमजोरी रही। बीएसई मिडकैप इंडेक्स 1.01% और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.50% गिरा। बाजार में गिरावट का दायरा व्यापक रहा, जहां 2,532 शेयरों में गिरावट और 1,649 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई।
बाजार में अस्थिरता भी बढ़ी, जहां इंडिया VIX 5.86% उछलकर 18.46 पर पहुंच गया, जो निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बढ़ने के संकेत देता है।
बॉन्ड बाजार में भी दबाव देखने को मिला। 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 7.040% हो गई, जो पिछले सत्र में 6.995% थी। वहीं, सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग बढ़ी और MCX गोल्ड फ्यूचर्स 1.78% चढ़कर ₹1,51,700 पर पहुंच गया।
वैश्विक स्तर पर यूरोपीय बाजारों में तेजी देखी गई, लेकिन आर्थिक आंकड़े कमजोर रहे। यूरोजोन की जीडीपी वृद्धि पहली तिमाही में 0.1% रही, जो अनुमान से कम है। वहीं, अप्रैल में महंगाई बढ़कर 3.0% पर पहुंच गई, जिसमें ऊर्जा कीमतों का बड़ा योगदान रहा।
अमेरिका में वॉल स्ट्रीट मिला-जुला बंद हुआ। डाउ जोन्स 0.57% गिरा, जबकि नैस्डैक में मामूली बढ़त रही। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन जेरोम पॉवेल ने संकेत दिया कि तेल कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है, हालांकि ब्याज दरों को फिलहाल 3.5%–3.75% पर स्थिर रखा गया है।
कंपनी आधारित खबरों में, हिंदुस्तान यूनिलीवर के मजबूत नतीजों के बावजूद शेयर 2.70% गिरा। बजाज फाइनेंस में 0.72% की बढ़त रही, जबकि बजाज फिनसर्व 0.99% फिसला। बजाज ऑटो 4.78% उछला, क्योंकि कंपनी ने शेयर बायबैक पर विचार करने की घोषणा की।
MTAR टेक्नोलॉजीज में 14% से अधिक की तेजी आई, जबकि अदानी पावर 1.35% बढ़ा। वहीं HEG में गिरावट और RPG लाइफ साइंसेज में उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
आगे चलकर बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक घटनाक्रम और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर निर्भर करेगी। शुक्रवार, 1 मई 2026 को महाराष्ट्र दिवस के अवसर पर शेयर बाजार बंद रहेंगे, जिससे निवेशक सतर्क रुख अपना सकते हैं।
अस्वीकरण: यह रिपोर्ट केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए। निवेश से पहले विशेषज्ञ सलाह लेना आवश्यक है।

