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Last Updated on January 30, 2026 12:01 am by BIZNAMA NEWS


उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद घरेलू शेयर बाज़ार सकारात्मक रुख के साथ बंद हुए। लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) और टाटा स्टील जैसे दिग्गज शेयरों में तेज़ी तथा आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में मज़बूत जीडीपी वृद्धि अनुमान ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।

प्रमुख सूचकांक

सेंसेक्स: 221.69 अंक (0.27%) चढ़कर 82,566.37 पर बंद निफ्टी 50: 76.15 अंक (0.30%) बढ़कर 25,418.90 पर बंद

  • शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 636 अंक तक गिरा था, जबकि निफ्टी 182 अंक तक फिसला था।

सेक्टरवार प्रदर्शन

धातु (Metals):
टाटा स्टील में 4.41% की तेज़ी रही। वैश्विक मांग और कमोडिटी कीमतों में सुधार से पूरे धातु सेक्टर को सहारा मिला।

  • इंफ्रास्ट्रक्चर व कैपिटल गुड्स:**
    एलएंडटी का शेयर 3.66% उछला। कंपनी की तिमाही आय 10% बढ़कर ₹71,450 करोड़ रही। सरकार की इंफ्रास्ट्रक्चर नीतियों से इस सेक्टर में निवेशकों का भरोसा मज़बूत हुआ।
  • बैंकिंग व वित्तीय सेवाएँ:**
    एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और अडानी पोर्ट्स में बढ़त दर्ज हुई। स्थिर क्रेडिट ग्रोथ और विदेशी निवेश प्रवाह से बैंकिंग सेक्टर को बल मिला।
  • ऊर्जा (Energy):
    एनटीपीसी के शेयर में बढ़त रही। बिजली की मांग और ऊर्जा संक्रमण पर सरकार का फोकस निवेशकों को आकर्षित कर रहा है।
  • उपभोक्ता व ऑटोमोबाइल:**
    एशियन पेंट्स, मारुति और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स में गिरावट रही। मांग में दबाव और लागत बढ़ने से इन शेयरों पर असर पड़ा।
  • एविएशन:**
    इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) में गिरावट रही, ईंधन लागत और रुपये की कमजोरी ने दबाव बनाया।

व्यापक आर्थिक संकेतक

  • आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26:
    अगले वित्त वर्ष (FY27) के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.8% से 7.2% रहने का अनुमान। सुधारों के प्रभाव और स्थिर आर्थिक स्थिति को आधार बताया गया।

सोना-चाँदी:
सोने के वायदा भाव 6% उछलकर रिकॉर्ड ₹1.75 लाख प्रति 10 ग्राम पर पहुँचे। चाँदी भी 6% बढ़कर ₹4.07 लाख प्रति किलोग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर।

-मुद्रा बाज़ार:**
रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91.96 पर बंद हुआ, जो लगभग सर्वकालिक निचले स्तर के करीब है।

औद्योगिक उत्पादन (IIP):
दिसंबर 2025 में औद्योगिक उत्पादन 7.8% बढ़ा, जो पिछले दो वर्षों में सबसे तेज़ वृद्धि है।


बाज़ार दृष्टिकोण
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेश प्रवाह, इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकारी ज़ोर और मज़बूत औद्योगिक उत्पादन से शेयर बाज़ार को निकट भविष्य में सहारा मिलेगा। हालांकि रुपये की कमजोरी और कमोडिटी बाज़ार में उतार-चढ़ाव निवेशकों के लिए जोखिम बने रहेंगे।

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