Last Updated on May 7, 2026 10:15 pm by BIZNAMA NEWS
मुंबई:
साप्ताहिक सेंसेक्स डेरिवेटिव्स एक्सपायरी और ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली के बीच गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार हल्की गिरावट के साथ बंद हुए। दिनभर के उतार-चढ़ाव के बावजूद व्यापक बाजार में मजबूती देखने को मिली, जिसे पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद और चौथी तिमाही के बेहतर कॉर्पोरेट नतीजों से समर्थन मिला।
कारोबार के दौरान बाजार कई बार हरे और लाल निशान के बीच झूलता रहा। अंत में बीएसई सेंसेक्स 114 अंक यानी 0.15 प्रतिशत गिरकर 77,844.52 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 महज 4.30 अंक फिसलकर 24,326.65 पर आ गया।
विश्लेषकों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, रुपये की मजबूती और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की उम्मीद ने बाजार की गिरावट को सीमित रखने में मदद की। ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गया, जिससे भारत के लिए आयात लागत और महंगाई संबंधी चिंताओं में कुछ राहत मिली।
हालांकि आईटी और एफएमसीजी शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा। हिंदुस्तान यूनिलीवर, टीसीएस और आईटीसी जैसे दिग्गज शेयर बाजार पर दबाव डालने वाले प्रमुख स्टॉक्स रहे।
इसके विपरीत, व्यापक बाजार में मजबूत तेजी देखने को मिली। बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांक लगभग 1 प्रतिशत तक चढ़े, जबकि निफ्टी मिडकैप 150 ने कारोबार के दौरान नया रिकॉर्ड उच्च स्तर छुआ। इससे संकेत मिला कि निवेशकों की रुचि अभी भी घरेलू विकास आधारित कंपनियों में बनी हुई है।
ऑटो और निजी बैंकिंग शेयरों में अच्छी खरीदारी देखी गई। बजाज ऑटो के मजबूत तिमाही नतीजों के बाद उसके शेयर करीब 3 प्रतिशत चढ़ गए। वहीं, लार्सन एंड टुब्रो को विभिन्न राज्यों में रियल एस्टेट परियोजनाओं के नए ऑर्डर मिलने से उसके शेयरों में भी तेजी रही।
मजबूत तिमाही नतीजों के दम पर कई मिडकैप कंपनियों के शेयरों में तेज उछाल दर्ज किया गया। क्राफ्ट्समैन ऑटोमेशन करीब 11 प्रतिशत, भारत फोर्ज 6 प्रतिशत से अधिक और कारट्रेड टेक में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली। आईआईएफएल कैपिटल सर्विसेज में फेयरफैक्स इंडिया के निवेश प्रस्ताव से भी निवेशकों का भरोसा बढ़ा।
वैश्विक बाजारों में एशियाई शेयर बाजारों ने बढ़त दर्ज की। निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता आगे बढ़ने से पश्चिम एशिया में तनाव कम हो सकता है, जिससे वैश्विक जोखिम भावना में सुधार आएगा। अमेरिकी बाजारों में भी रिकॉर्ड तेजी का असर घरेलू निवेशकों के मनोबल पर दिखाई दिया।
हालांकि यूरोपीय बाजारों में कमजोरी रही क्योंकि निवेशक संभावित परमाणु समझौते को लेकर अभी भी सतर्क बने हुए हैं।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कॉर्पोरेट नतीजों, कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर बनी रहेगी।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट केवल सूचना के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसे निवेश या वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। किसी भी निवेश निर्णय से पहले प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।

