Last Updated on May 29, 2026 6:52 pm by BIZNAMA NEWS
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मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कमजोर मानसून अनुमान और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। दिनभर दबाव में रहने के बाद अंतिम आधे घंटे में बिकवाली और तेज हो गई, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख स्तरों के नीचे फिसल गए।
बीएसई सेंसेक्स 1,092.06 अंक यानी 1.44 प्रतिशत टूटकर 74,775.74 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 359.40 अंक यानी 1.50 प्रतिशत गिरकर 23,547.75 पर आ गया। पिछले तीन कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लगभग 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।
ऊर्जा, धातु और ऑटो सेक्टर के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली, जबकि बैंकिंग दिग्गजों में कमजोरी ने बाजार पर अतिरिक्त दबाव डाला।
मध्य-पूर्व संकट ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता
बाजार में कमजोरी की सबसे बड़ी वजह मध्य-पूर्व में बढ़ता तनाव रहा। निवेशकों की नजर अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष और संभावित संघर्षविराम वार्ता पर बनी रही। हालांकि कुछ रिपोर्टों में दोनों देशों के बीच अस्थायी समझौते की संभावना जताई गई, लेकिन तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा।
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता भारत जैसी तेल आयातक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो इसका असर महंगाई, चालू खाता घाटे और रुपये पर पड़ सकता है।
मानसून अनुमान ने बढ़ाई आर्थिक चिंताएं
भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा मानसून को सामान्य से थोड़ा कमजोर रहने का अनुमान भी बाजार के लिए नकारात्मक संकेत साबित हुआ। विभाग ने इस वर्ष वर्षा को दीर्घकालिक औसत (LPA) का लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि यदि बारिश का वितरण असमान रहा तो कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य महंगाई बढ़ने और ग्रामीण मांग कमजोर पड़ने की आशंका है। इसका असर एफएमसीजी, ऑटोमोबाइल और उपभोक्ता वस्तुओं जैसे क्षेत्रों पर पड़ सकता है।
हालांकि विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि उद्योग और सेवा क्षेत्रों की मजबूती के कारण समग्र अर्थव्यवस्था पर इसका प्रभाव सीमित रह सकता है।
MSCI रीबैलेंसिंग से अंतिम घंटे में तेज बिकवाली
कारोबार के अंतिम चरण में MSCI ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स में बदलाव लागू होने के बाद बाजार में बिकवाली और तेज हो गई।
MSCI ने फेडरल बैंक, एमसीएक्स, नाल्को और इंडियन बैंक को अपने ग्लोबल स्टैंडर्ड इंडेक्स में शामिल किया है, जबकि हुंडई मोटर इंडिया, जुबिलेंट फूडवर्क्स, कल्याण ज्वेलर्स और रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) को बाहर कर दिया गया।
विश्लेषकों के अनुसार इंडेक्स में बदलाव के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर पोर्टफोलियो समायोजन किया गया, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी।
रिलायंस और बैंकिंग शेयर बने सबसे बड़े दबाव
रिलायंस इंडस्ट्रीज, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक जैसे भारी-भरकम शेयर बाजार गिरावट के प्रमुख कारण रहे। इन शेयरों में तेज बिकवाली ने सूचकांकों को नीचे खींचा।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी कमजोरी रही, हालांकि वहां गिरावट अपेक्षाकृत कम रही। बीएसई मिडकैप इंडेक्स 1.25 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.61 प्रतिशत गिरा।
इंडिया VIX, जिसे बाजार का “फियर इंडेक्स” कहा जाता है, 8 प्रतिशत से अधिक उछलकर 16.19 पर पहुंच गया, जो निवेशकों की बढ़ती घबराहट को दर्शाता है।
रुपये और बॉन्ड बाजार पर भी दबाव
विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ, जबकि सरकारी बॉन्ड यील्ड में हल्की बढ़त दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ती महंगाई और तेल कीमतों को लेकर चिंताओं ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है।
वैश्विक बाजारों से नहीं मिला सहारा
हालांकि एशियाई और यूरोपीय बाजारों में मजबूती देखने को मिली और अमेरिकी शेयर बाजारों ने रिकॉर्ड ऊंचाई हासिल की, लेकिन भारतीय बाजार वैश्विक सकारात्मक संकेतों का लाभ उठाने में असफल रहे।
अमेरिका में तकनीकी शेयरों की मजबूती के चलते नैस्डैक और एसएंडपी 500 रिकॉर्ड स्तर पर बंद हुए। दूसरी ओर, अमेरिका में मुद्रास्फीति के मजबूत आंकड़ों ने यह संकेत दिया कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रह सकती हैं।
डेल्टा कॉर्प में भारी गिरावट
शुक्रवार के कारोबार में डेल्टा कॉर्प के शेयरों में 14 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। सुप्रीम कोर्ट द्वारा ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म्स पर 28 प्रतिशत जीएसटी लागू करने के फैसले को बरकरार रखने के बाद निवेशकों ने भारी बिकवाली की।
इस फैसले को ऑनलाइन गेमिंग उद्योग के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
फार्मा और चुनिंदा शेयरों में चमक
कमजोर बाजार के बावजूद कुछ शेयरों में मजबूत तेजी देखने को मिली।
वॉकहार्ट लगभग 15 प्रतिशत उछला, क्योंकि कंपनी को भारत में विकसित नई एंटीबायोटिक दवा “जायनिच” के लिए नियामकीय मंजूरी मिली।
सुप्रिया लाइफसाइंस में 20 प्रतिशत की तेजी दर्ज हुई, जबकि आशापुरा माइनेकैम और बैंको प्रोडक्ट्स ने भी मजबूत तिमाही नतीजों के दम पर अच्छा प्रदर्शन किया।
विप्रो में भी बढ़त रही, क्योंकि कंपनी ने सर्विसनाउ के साथ AI आधारित एंटरप्राइज वर्कफ्लो साझेदारी का विस्तार किया।
आगे भी बनी रह सकती है अस्थिरता
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। मध्य-पूर्व की स्थिति, मानसून की प्रगति, कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक मुद्रास्फीति के आंकड़े निवेशकों की दिशा तय करेंगे।
विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और घरेलू आर्थिक संकेतक भी बाजार की चाल पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालेंगे।

