Last Updated on January 27, 2026 7:13 pm by BIZNAMA NEWS

AMN / नई दिल्ली

भारत और यूरोपीय संघ ने द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए भारत–यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को संपन्न करने की औपचारिक घोषणा की है। यह घोषणा नई दिल्ली में आयोजित 16वें भारत–यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन के दौरान माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष सुश्री उर्सुला वॉन डेर लेयेन द्वारा संयुक्त रूप से की गई। इस अवसर पर यूरोपीय परिषद और यूरोपीय आयोग के शीर्ष नेतृत्व की भारत यात्रा भी हुई।

यह एफटीए 2022 में वार्ताओं के पुनः आरंभ होने के बाद गहन और लंबी बातचीत का परिणाम है तथा इसे भारत और यूरोपीय संघ के बीच वर्षों से चले आ रहे संवाद, सहयोग और साझा दृष्टिकोण की परिणति के रूप में देखा जा रहा है। यह समझौता दोनों पक्षों को खुले, पूर्वानुमान-आधारित और समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्ध विश्वसनीय व्यापारिक साझेदार के रूप में स्थापित करता है।

यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में से एक है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत–ईयू वस्तु व्यापार 11.5 लाख करोड़ रुपये (136.54 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया, जिसमें 6.4 लाख करोड़ रुपये का निर्यात और 5.1 लाख करोड़ रुपये का आयात शामिल है। सेवा क्षेत्र में भी द्विपक्षीय व्यापार 2024 में 7.2 लाख करोड़ रुपये (83.10 अरब अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया। भारत और यूरोपीय संघ क्रमशः दुनिया की चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं और वैश्विक जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत तथा वैश्विक व्यापार का एक-तिहाई हिस्सा रखती हैं।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने इस अवसर पर प्रधानमंत्री की रणनीतिक दूरदर्शिता की सराहना करते हुए कहा कि यह एफटीए केवल एक पारंपरिक व्यापार समझौता नहीं, बल्कि रणनीतिक आयामों वाली व्यापक साझेदारी है। उन्होंने कहा कि इस समझौते के तहत यूरोपीय संघ ने मूल्य के आधार पर 99 प्रतिशत से अधिक भारतीय निर्यात के लिए अभूतपूर्व बाजार पहुंच सुनिश्चित की है, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ को नया प्रोत्साहन मिलेगा।

यह एफटीए वस्तुओं, सेवाओं, सीमा शुल्क और व्यापार सुविधा, उत्पत्ति के नियमों, डिजिटल व्यापार और एसएमई जैसे क्षेत्रों को कवर करता है। कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, समुद्री उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को इससे विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। लगभग 33 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात पर 10 प्रतिशत तक टैरिफ कटौती से प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी और रोजगार सृजन को बल मिलेगा।

सेवा क्षेत्र में यूरोपीय संघ ने 144 उप-क्षेत्रों और भारत ने 102 उप-क्षेत्रों में बाजार पहुंच की प्रतिबद्धता दी है। आईटी, पेशेवर सेवाएं, शिक्षा, वित्तीय सेवाएं और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में भारतीय सेवा प्रदाताओं को नए अवसर मिलेंगे। साथ ही, व्यावसायिक गतिशीलता से जुड़े प्रावधान कुशल भारतीय पेशेवरों, छात्रों और सेवा प्रदाताओं के लिए यूरोप में अवसरों का विस्तार करेंगे।

एफटीए में गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने, नियामक सहयोग बढ़ाने, बौद्धिक संपदा अधिकारों को मजबूत करने और स्वच्छ प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा सेमीकंडक्टर जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग को भी शामिल किया गया है। कृषि क्षेत्र में संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के साथ-साथ चाय, कॉफी, मसाले और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए निर्यात अवसर बढ़ाए गए हैं।

भारत–यूरोपीय संघ एफटीए को दोनों पक्षों के लिए व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग का नया अध्याय माना जा रहा है। यह समझौता ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप भारत को वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद, गतिशील और भविष्य के लिए तैयार साझेदार के रूप में स्थापित करता है।

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