Last Updated on March 21, 2026 12:06 am by BIZNAMA NEWS

BIZ DESK

भारत के शेयर बाजार में शुक्रवार को मजबूती देखने को मिली और पिछले दिन की भारी गिरावट के बाद बाजार ने वापसी की। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीदों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। साथ ही, निचले स्तरों पर वैल्यू बायिंग ने भी बाजार को सहारा दिया, हालांकि आगे का माहौल अभी भी सतर्क बना हुआ है।

बीएसई सेंसेक्स 325 अंकों की बढ़त के साथ 74,532 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 करीब 112 अंक चढ़कर 23,100 के ऊपर बंद हुआ। दिन के दौरान निफ्टी 23,300 के स्तर को भी पार कर गया था। बाजार में बढ़त का दायरा व्यापक रहा और अधिकतर शेयरों में खरीदारी देखी गई।

सेक्टरवार प्रदर्शन:
इस तेजी में IT और PSU बैंकिंग शेयरों ने प्रमुख भूमिका निभाई। वैश्विक मांग में स्थिरता और घरेलू क्रेडिट ग्रोथ की उम्मीदों से इन सेक्टरों में खरीदारी हुई। मेटल शेयरों में भी मजबूती रही, जबकि पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनियों को प्रोजेक्ट्स और नीतिगत समर्थन से फायदा मिला। हालांकि बैंकिंग सेक्टर में मिश्रित रुख रहा और HDFC बैंक में गिरावट जारी रही।

मिडकैप और स्मॉलकैप रुझान:
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी हल्की तेजी रही। निवेशकों ने चुनिंदा मजबूत कंपनियों में ही निवेश किया, जिससे यह साफ है कि बाजार में अभी आक्रामक खरीदारी नहीं बल्कि सतर्क रुख है।

मुख्य जोखिम कारक:
बाजार में सुधार के बावजूद कई जोखिम बने हुए हैं। विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार बिकवाली कर रहे हैं, जिससे बाजार पर दबाव है। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 93 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है, जो चिंता का विषय है। साथ ही, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और डॉलर की मजबूती उभरते बाजारों के लिए चुनौती बनी हुई है।

कच्चे तेल की कीमतें अभी भी 110 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो भारत जैसे आयात-निर्भर देश के लिए महंगाई का खतरा बढ़ा सकती हैं।

वैश्विक बाजार प्रभाव:
वैश्विक संकेत मिश्रित रहे। यूरोपीय बाजारों में मजबूती रही, लेकिन अमेरिकी बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। एशियाई बाजारों में भी कमजोरी देखने को मिली, जिससे वैश्विक अनिश्चितता का संकेत मिलता है।

कमोडिटी और बॉन्ड बाजार:
सोने की कीमतों में 1% से अधिक की तेजी आई, जो सुरक्षित निवेश की ओर रुझान को दर्शाती है। वहीं, भारत की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में भी बढ़ोतरी हुई, जो महंगाई और वित्तीय दबाव की चिंता को दर्शाती है।

आगे का दृष्टिकोण:
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार फिलहाल स्थिरता के दौर में प्रवेश कर रहा है। आगे की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक नीतियों और पश्चिम एशिया की स्थिति पर निर्भर करेगी। निवेशक फिलहाल मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ही ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

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