Last Updated on May 14, 2026 11:14 pm by BIZNAMA NEWS

AMN नई दिल्ली

अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने गुरुवार को केंद्र सरकार द्वारा घोषित खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2026-27 को सिरे से खारिज करते हुए इसे किसानों के साथ “दिनदहाड़े लूट” करार दिया। संगठन ने आरोप लगाया कि सरकार ने लागत निर्धारण में त्रुटिपूर्ण और भ्रामक फार्मूले का इस्तेमाल किया है।

कैबिनेट समिति द्वारा 14 खरीफ फसलों के MSP घोषित किए जाने के बाद जारी बयान में AIKS ने कहा कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) ने स्वामीनाथन आयोग की उस सिफारिश की अनदेखी की है, जिसमें किसानों को उत्पादन की संपूर्ण लागत (C2) पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर MSP देने की बात कही गई थी।

संगठन का आरोप है कि सरकार अब भी पुराने और कम लागत वाले आंकड़ों के आधार पर MSP तय कर रही है, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। AIKS के अनुसार कपास किसानों को प्रति क्विंटल ₹4,000 से अधिक तथा अरहर उत्पादकों को करीब ₹3,900 का नुकसान हो रहा है।

किसान सभा ने दावा किया कि 2016 से 2025 के बीच अपर्याप्त MSP और कमजोर खरीद व्यवस्था के कारण किसानों को लगभग ₹27 लाख करोड़ का नुकसान हुआ। संगठन ने कहा कि अधिकांश किसानों को बाजार में घोषित MSP भी नहीं मिल पाता।

AIKS ने राज्यों द्वारा MSP के ऊपर बोनस दिए जाने पर केंद्र की कथित आपत्तियों की भी आलोचना की और इसे “संघीय ढांचे पर हमला” बताया। संगठन ने केरल, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे राज्यों की किसान सहायता योजनाओं का समर्थन किया।

संगठन ने कृषि नीतियों को अमेरिका और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के दबाव से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर किसानों के हितों से समझौता करने का आरोप लगाया।

AIKS ने घोषणा की कि 25 मई से देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे, जिनमें MSP आदेश और CACP दस्तावेजों की प्रतीकात्मक होली जलाने का कार्यक्रम भी शामिल होगा। संगठन ने स्वामीनाथन फार्मूले के आधार पर MSP की कानूनी गारंटी और कृषि से जुड़े व्यापार समझौतों की समीक्षा की मांग की।