Last Updated on June 18, 2026 10:30 pm by BIZNAMA NEWS

हमारे बिजनेस संवाददाता से

घरेलू शेयर बाजारों ने गुरुवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, भू-राजनीतिक तनाव कम होने के संकेत, विदेशी निवेशकों की वापसी और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया। बैंकिंग, वित्तीय और हेल्थकेयर शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जबकि आईटी सेक्टर दबाव में बना रहा।

दिन के कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव के बावजूद बाजार ने मजबूत वापसी की और प्रमुख सूचकांक ऊंचे स्तर पर बंद हुए। बीएसई सेंसेक्स 254.36 अंक यानी 0.33 प्रतिशत बढ़कर 77,409.98 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 82.30 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,168 पर पहुंच गया। निफ्टी ने कारोबार के दौरान 24,036 के निचले स्तर से उबरते हुए 24,150 के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर बंद होने में सफलता हासिल की।

पिछले पांच कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स करीब 4.85 प्रतिशत और निफ्टी 4.35 प्रतिशत मजबूत हुआ है, जो बाजार में लौटते भरोसे का संकेत माना जा रहा है।

विश्लेषकों के अनुसार, निवेशकों का रुझान कई सकारात्मक कारकों से प्रभावित रहा। ब्रेंट क्रूड में गिरावट से महंगाई और आयात लागत को लेकर चिंताएं कम हुईं, वहीं अमेरिका–ईरान शांति प्रयासों में प्रगति की खबरों ने वैश्विक जोखिम धारणा को बेहतर किया। इसके साथ विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी लौटने और बाजार की अस्थिरता में कमी ने भी तेजी को समर्थन दिया।

सेक्टोरल स्तर पर हेल्थकेयर और बैंकिंग शेयरों ने बाजार को सहारा दिया। मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट में 6.46 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि एचडीएफसी बैंक 1.74 प्रतिशत और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) 1.56 प्रतिशत चढ़कर बंद हुए।

केवल बड़े शेयरों में ही नहीं, बल्कि व्यापक बाजार में भी मजबूती देखने को मिली। बीएसई 150 मिडकैप इंडेक्स 0.41 प्रतिशत और बीएसई 250 स्मॉलकैप इंडेक्स 0.67 प्रतिशत बढ़ा। बीएसई पर 2,425 शेयरों में तेजी दर्ज हुई, जबकि 1,811 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। 192 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

बाजार की अस्थिरता का प्रमुख संकेतक इंडिया VIX 3.90 प्रतिशत गिरकर 12.67 पर आ गया, जो यह दर्शाता है कि निवेशकों की निकट अवधि को लेकर चिंता कुछ कम हुई है।

मुद्रा और बॉन्ड बाजारों में भी सकारात्मक संकेत देखने को मिले। डॉलर के मुकाबले रुपया मजबूत होकर 94.38 के आसपास पहुंच गया, जबकि पिछला बंद स्तर 94.50 था। वहीं भारत के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड घटकर 6.842 प्रतिशत पर आ गई।

कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई। अगस्त डिलीवरी वाले एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर्स 2.12 प्रतिशत गिरकर 1,50,612 रुपये पर पहुंच गए, जिससे सुरक्षित निवेश की मांग में नरमी का संकेत मिला।

वैश्विक बाजारों में मिश्रित रुख रहा। अमेरिकी फ्यूचर्स में मजबूती के संकेत मिले, लेकिन निवेशकों की नजर अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति पर बनी रही।

फेडरल रिजर्व ने अपनी प्रमुख ब्याज दरों को 3.50–3.75 प्रतिशत के दायरे में बरकरार रखा, लेकिन वर्ष के अंत तक दरों के अनुमान को बढ़ा दिया। इससे संकेत मिला कि मुद्रास्फीति का दबाव बना रहने पर आगे और सख्ती की जा सकती है। इस घोषणा के बाद अमेरिकी बाजारों में गिरावट और बॉन्ड यील्ड में तेजी देखी गई।

कॉर्पोरेट मोर्चे पर भी कई कंपनियां चर्चा में रहीं।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने FY27 के दौरान घरेलू और विदेशी मुद्रा में ऋण साधनों के जरिए 60,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की योजना को मंजूरी दी, जिससे शेयर को समर्थन मिला।

रेडिंगटन लगभग 9 प्रतिशत उछला। बाजार में ऐसी उम्मीद बनी कि मेमोरी और स्टोरेज लागत बढ़ने के कारण कुछ एप्पल उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका लाभ कंपनी के वितरण कारोबार को मिल सकता है।

एचएफसीएल को उत्तर प्रदेश (पश्चिम) टेलीकॉम सर्किल में भारतनेट फेज-III परियोजना के लिए रेल विकास निगम से लगभग 2,666 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिलने के बाद शेयर में अपर सर्किट लगा।

एफएसएन ई-कॉमर्स वेंचर्स (नायका) ने FY30 तक राजस्व और लाभ में कई गुना वृद्धि की रणनीति पेश की, जिसके बाद शेयर में 6 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी क्षेत्र में जेबीएम ऑटो को उसकी सहायक कंपनी के लिए 750 करोड़ रुपये का रणनीतिक निवेश मिला, जिससे कंपनी की इलेक्ट्रिक बस विस्तार योजना को बल मिलेगा।

फार्मा कंपनी ल्यूपिन ने अमेरिकी बाजार में नई दवा लॉन्च करने के बाद बढ़त दर्ज की, जबकि लेमन ट्री होटल्स राजस्थान के श्रीगंगानगर में नए होटल की घोषणा के बाद चर्चा में रहा।

वहीं किर्लोस्कर फेरस इंडस्ट्रीज को ब्रिटेन से लगभग 13.5 मिलियन डॉलर का निर्यात ऑर्डर मिलने के बाद शेयर में मजबूत उछाल दर्ज की गई।

आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने में कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेश प्रवाह, मानसून की प्रगति, वैश्विक ब्याज दर संकेत और कंपनियों के तिमाही नतीजे अहम भूमिका निभाएंगे। फिलहाल घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और वैश्विक मोर्चे पर राहत के संकेत बाजार को सहारा देते नजर आ रहे हैं।