Last Updated on July 28, 2026 9:49 pm by BIZNAMA NEWS

हमारे व्यापार संवाददाता से

भारतीय शेयर बाजार मंगलवार को उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद लगभग सपाट बंद हुए। दिनभर निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाए रखा। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों में जोरदार खरीदारी देखने को मिली, लेकिन एफएमसीजी, निजी बैंक, रसायन और कुछ बड़े ब्लूचिप शेयरों में भारी बिकवाली के कारण बाजार बढ़त बनाए रखने में सफल नहीं हो सका। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज गिरावट ने बाजार को कुछ राहत अवश्य दी।

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 69.86 अंक यानी 0.09 प्रतिशत गिरकर 76,765.92 अंक पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी-50 10.60 अंक यानी 0.04 प्रतिशत फिसलकर 23,985.35 अंक पर बंद हुआ। इस प्रकार निफ्टी एक बार फिर 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बंद हुआ।

विश्लेषकों के अनुसार, बाजार फिलहाल मजबूत घरेलू आय परिणामों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा है। निवेशकों की निगाहें अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों तथा अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर टिकी हुई हैं।

IT सेक्टर बना बाजार का सबसे बड़ा सहारा

मंगलवार के कारोबार में सबसे अधिक चमक सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र में देखने को मिली। निफ्टी आईटी इंडेक्स 3.32 प्रतिशत उछलकर 30,418.35 अंक पर बंद हुआ। पिछले तीन कारोबारी सत्रों में इस सूचकांक में कुल 6.61 प्रतिशत की तेजी दर्ज की जा चुकी है।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार इस तेजी के पीछे कई प्रमुख कारण रहे। एक प्रमुख विदेशी ब्रोकरेज हाउस ने भारतीय आईटी सेक्टर की रेटिंग “अंडरवेट” से बढ़ाकर “न्यूट्रल” कर दी तथा इन्फोसिस को अपनी मॉडल पोर्टफोलियो सूची में शामिल किया। इसके अलावा वैश्विक निवेशकों ने महंगे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चिप निर्माताओं से निवेश निकालकर सॉफ्टवेयर एवं आईटी सेवा कंपनियों की ओर रुख करना शुरू किया है। हाल के महीनों में आईटी शेयरों में आई गिरावट के बाद उनके आकर्षक मूल्यांकन (Valuation) ने भी निवेशकों को खरीदारी के लिए प्रेरित किया।

आईटी शेयरों में कोफोर्ज 10.16 प्रतिशत की जोरदार बढ़त के साथ सबसे बड़ा गेनर रहा। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) 4.46 प्रतिशत, एमफैसिस 3.57 प्रतिशत, टेक महिंद्रा 3.49 प्रतिशत, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स 3.22 प्रतिशत, एलटीआईमाइंडट्री 2.82 प्रतिशत, इन्फोसिस 2.39 प्रतिशत, ओरेकल फाइनेंशियल सर्विसेज 2.08 प्रतिशत, एचसीएल टेक्नोलॉजीज 1.93 प्रतिशत तथा विप्रो 1.41 प्रतिशत चढ़कर बंद हुए।

कोफोर्ज के मजबूत नतीजों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा

कोफोर्ज के शेयरों में आई तेजी का प्रमुख कारण कंपनी के उम्मीद से बेहतर तिमाही नतीजे रहे।

जून 2026 तिमाही में कंपनी की डॉलर आय 592.2 मिलियन डॉलर रही, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 33.3 प्रतिशत अधिक है। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 63.4 प्रतिशत बढ़कर 518.60 करोड़ रुपये हो गया, जबकि सकल राजस्व 49.2 प्रतिशत बढ़कर 5,527.70 करोड़ रुपये पहुंच गया।

कंपनी के निदेशक मंडल ने चीन में नई इकाई स्थापित करने के प्रस्ताव को भी सैद्धांतिक मंजूरी दी है, जिससे उसके अंतरराष्ट्रीय विस्तार की रणनीति को बल मिलेगा।

FMCG शेयरों में भारी बिकवाली

आईटी शेयरों की तेजी के विपरीत एफएमसीजी क्षेत्र में जोरदार दबाव देखने को मिला।

हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) के शेयर 7.11 प्रतिशत टूट गए और यह निफ्टी का सबसे बड़ा नुकसान उठाने वाला शेयर रहा।

कंपनी का जून तिमाही का समेकित शुद्ध लाभ 3.01 प्रतिशत घटकर 2,673 करोड़ रुपये रह गया, जबकि परिचालन आय 10.3 प्रतिशत बढ़कर 17,184 करोड़ रुपये रही। हालांकि कच्चे माल की बढ़ती लागत और अन्य परिचालन खर्चों ने कंपनी के लाभ मार्जिन को प्रभावित किया, जिससे निवेशकों ने शेयरों में बिकवाली की।

इसी प्रकार वरुण बेवरेजेज के शेयर 7.53 प्रतिशत लुढ़क गए। कंपनी का राजस्व और लाभ दोनों बढ़े, लेकिन दक्षिण अफ्रीका की ट्विज़ा (Twizza) इकाई के समेकन के कारण EBITDA मार्जिन में आई गिरावट से निवेशक निराश दिखाई दिए।

बैंकिंग और हैवीवेट शेयरों ने बढ़ाया दबाव

बाजार के प्रमुख हैवीवेट शेयरों में भी कमजोरी रही।

आईसीआईसीआई बैंक के शेयर 1.94 प्रतिशत टूटे, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज में 0.65 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। इन दोनों शेयरों की कमजोरी ने आईटी क्षेत्र की तेजी का बड़ा हिस्सा निष्प्रभावी कर दिया।

व्यापक बाजार में भी कमजोरी

वृहद बाजार का प्रदर्शन भी बहुत उत्साहजनक नहीं रहा।

बीएसई मिडकैप सूचकांक लगभग सपाट रहते हुए 0.01 प्रतिशत बढ़ा, जबकि बीएसई स्मॉलकैप सूचकांक 0.47 प्रतिशत गिर गया।

बाजार की चौड़ाई (Market Breadth) भी कमजोर रही। बीएसई में 1,528 शेयरों में बढ़त, जबकि 2,740 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। 169 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए।

यह दर्शाता है कि बाजार में बिकवाली का दबाव व्यापक स्तर पर मौजूद रहा, हालांकि प्रमुख सूचकांकों में इसका असर सीमित रहा।

उतार-चढ़ाव का संकेतक भी नरम

बाजार में भय और अस्थिरता का संकेत देने वाला इंडिया वीआईएक्स (India VIX) 0.77 प्रतिशत घटकर 12.56 पर आ गया।

कम होता वीआईएक्स संकेत देता है कि निकट भविष्य में निवेशक किसी बड़ी अस्थिरता की आशंका फिलहाल नहीं देख रहे हैं, हालांकि वैश्विक घटनाक्रमों पर उनकी नजर बनी हुई है।

कच्चे तेल में गिरावट से भारत को राहत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.18 प्रतिशत गिरकर 86.43 डॉलर प्रति बैरल रह गई।

भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए यह सकारात्मक संकेत माना जाता है क्योंकि इससे महंगाई पर दबाव कम हो सकता है, चालू खाते के घाटे में सुधार आ सकता है तथा विमानन, लॉजिस्टिक्स, पेंट और विनिर्माण जैसे उद्योगों की लागत घट सकती है।

दूसरी ओर, एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर्स 1.17 प्रतिशत गिरकर 1,41,395 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुए।

रुपये में हल्की मजबूती

विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली मजबूत हुआ। रुपया 95.8875 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.9900 पर बंद हुआ था।

भारत के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड मामूली बढ़कर 6.775 प्रतिशत रही।

वहीं, अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) लगभग 101.62 पर स्थिर रहा, जबकि अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड घटकर लगभग 4.62 प्रतिशत पर आ गई।

वैश्विक बाजारों की नजर फेडरल रिजर्व पर

वैश्विक बाजारों में निवेशकों का पूरा ध्यान अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दो दिवसीय मौद्रिक नीति बैठक पर केंद्रित रहा। व्यापक उम्मीद है कि फेड इस बार ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा, लेकिन फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल की टिप्पणियां आगे की मौद्रिक नीति का संकेत देंगी।

इसके अलावा निवेशकों की निगाहें अमेज़न, माइक्रोसॉफ्ट और मेटा प्लेटफॉर्म्स जैसी दिग्गज अमेरिकी टेक कंपनियों के तिमाही नतीजों पर भी टिकी हुई हैं।

यूरोपीय शेयर बाजार सकारात्मक रुख के साथ कारोबार करते रहे, जबकि अधिकांश एशियाई बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक सबसे अधिक दबाव में रहा।

अमेरिकी बाजारों में सोमवार को मिला-जुला कारोबार देखने को मिला, जहां डॉव जोन्स बढ़त के साथ बंद हुआ, जबकि नैस्डैक में मामूली गिरावट दर्ज की गई।

तिमाही नतीजों पर शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव

दिनभर कई कंपनियों के तिमाही नतीजों के कारण उनके शेयरों में तेज हलचल देखी गई।

आरआर काबेल के शेयर मजबूत नतीजों के बाद 2.36 प्रतिशत चढ़ गए।

ओम इंफ्रा 4.78 प्रतिशत उछला क्योंकि कंपनी छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग की एक बड़ी परियोजना में सबसे कम बोलीदाता (L1) बनी।

दूसरी ओर गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया 7.80 प्रतिशत, इंडोको रेमेडीज 7.72 प्रतिशत, टाटा केमिकल्स 3.73 प्रतिशत, तेजस नेटवर्क्स 3.84 प्रतिशत, ऑरियनप्रो सॉल्यूशंस 11.79 प्रतिशत तथा इंडस टावर्स 1.73 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।

आगे की राह

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से तीन कारकों पर निर्भर करेगी—घरेलू कंपनियों के तिमाही नतीजे, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति तथा विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की गतिविधियां।

यदि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है और वैश्विक ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता कम होती है, तो भारतीय बाजारों को समर्थन मिल सकता है। वहीं, आईटी क्षेत्र में लौट रही मजबूती बाजार को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। हालांकि स्थायी तेजी के लिए बैंकिंग, एफएमसीजी और औद्योगिक शेयरों की भागीदारी भी आवश्यक होगी।

अस्वीकरण: यह रिपोर्ट मंगलवार के कारोबार की समाप्ति तक उपलब्ध बाजार आंकड़ों, कॉर्पोरेट खुलासों और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित है। शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें।