Last Updated on July 16, 2026 11:55 pm by BIZNAMA NEWS
आईटी, ऑटो और कैपिटल गुड्स शेयरों ने संभाला बाजार; तिमाही नतीजों और आईपीओ में मजबूत निवेशकों की दिलचस्पी बरकरार
घरेलू शेयर बाजार गुरुवार को शुरुआती तेजी बरकरार नहीं रख सके और कारोबार के अंतिम घंटों में मुनाफावसूली के चलते लगभग सपाट स्तर पर बंद हुए। मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव, ऊंचे कच्चे तेल के दाम और वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेतों ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा।
कारोबार की शुरुआत सकारात्मक रही और निफ्टी शुरुआती सत्र में 24,186.50 के उच्च स्तर तक पहुंच गया, लेकिन बैंकिंग और वित्तीय शेयरों में बिकवाली के चलते बढ़त टिक नहीं सकी। अंततः बीएसई सेंसेक्स महज 1.44 अंक की बढ़त के साथ 77,186.67 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 5.75 अंक फिसलकर 24,072.75 पर बंद हुआ और 24,100 के स्तर से नीचे आ गया।
बाजार की धारणा पर सबसे बड़ा असर पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का रहा। अमेरिका द्वारा ईरान पर जारी सैन्य कार्रवाई और ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया की आशंका ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों को ऊंचे स्तर पर बनाए रखा है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए महंगा कच्चा तेल महंगाई, चालू खाते के घाटे और कॉरपोरेट लागत पर दबाव बढ़ा सकता है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ी हुई है।
वैश्विक बाजारों में सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में कमजोरी ने भी निवेशकों का उत्साह कम किया। दुनिया की सबसे बड़ी कॉन्ट्रैक्ट चिप निर्माता कंपनी टीएसएमसी के तिमाही नतीजों से पहले एशियाई बाजारों में तकनीकी शेयर दबाव में रहे। हालांकि घरेलू बाजार में आईटी, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल कंपनियों में खरीदारी ने गिरावट को सीमित रखने में मदद की।
व्यापक बाजार का रुख मिला-जुला
मुख्य सूचकांकों की तुलना में व्यापक बाजार का प्रदर्शन मिश्रित रहा। बीएसई मिडकैप सूचकांक में 0.30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि स्मॉलकैप सूचकांक 0.10 प्रतिशत बढ़कर बंद हुआ। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक चुनिंदा शेयरों में खरीदारी जारी रखे हुए हैं।
बाजार की चौड़ाई (मार्केट ब्रेड्थ) कमजोर रही। बीएसई पर 2,224 शेयरों में गिरावट आई, जबकि 2,012 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए और 213 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इससे स्पष्ट है कि अधिकांश शेयरों में बिकवाली का दबाव बना रहा।
इस बीच, बाजार की अस्थिरता मापने वाला इंडिया वीआईएक्स 2.92 प्रतिशत घटकर 12.88 पर आ गया। इससे संकेत मिलता है कि भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद निकट अवधि में बाजार अत्यधिक उतार-चढ़ाव की आशंका नहीं देख रहा है।
तकनीकी स्तरों पर नजर
बाजार विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी फिलहाल सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है। यदि सूचकांक 24,200 से 24,260 के ऊपर टिकने में सफल रहता है तो तेजी का नया दौर शुरू हो सकता है। वहीं 24,000 के नीचे फिसलने पर बिकवाली का दबाव बढ़ने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल कॉरपोरेट नतीजों और वैश्विक घटनाक्रमों के स्पष्ट संकेत मिलने का इंतजार कर रहे हैं।
बॉन्ड, रुपया और कमोडिटी बाजार
भारतीय बॉन्ड बाजार में 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड घटकर 6.753 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछले सत्र में 6.775 प्रतिशत थी।
विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले मामूली कमजोर होकर लगभग 96.33 प्रति डॉलर पर कारोबार करता दिखाई दिया।
वहीं एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर्स में हल्की गिरावट दर्ज की गई और अगस्त डिलीवरी का सोना 0.19 प्रतिशत गिरकर 1,41,585 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर सूचकांक लगभग स्थिर रहा, जबकि अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.57 प्रतिशत पर पहुंच गई।
ब्रेंट क्रूड की कीमतों में हल्की नरमी आई, लेकिन यह अभी भी लगभग 84.73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो तेल की कीमतें फिर तेजी पकड़ सकती हैं, जिसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार दोनों पर पड़ेगा।
वैश्विक बाजारों का हाल
यूरोपीय शेयर बाजारों में गिरावट रही क्योंकि निवेशक मध्य-पूर्व के तनाव और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंतित रहे।
ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था ने मई में 0.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की। सेवा क्षेत्र में सुधार से अर्थव्यवस्था को सहारा मिला, हालांकि विनिर्माण और निर्माण गतिविधियों में कमजोरी बनी रही।
एशियाई बाजारों में अधिकांश सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में बिकवाली और तकनीकी क्षेत्र की कमजोरी ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया। हालांकि अमेरिका में उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) अपेक्षा से कमजोर रहने के बाद यह उम्मीद मजबूत हुई कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व फिलहाल ब्याज दरों में बदलाव नहीं करेगा।
दक्षिण कोरिया के केंद्रीय बैंक ने महंगाई पर नियंत्रण और कमजोर होती मुद्रा को सहारा देने के लिए साढ़े तीन वर्षों में पहली बार अपनी प्रमुख ब्याज दर बढ़ाकर 2.75 प्रतिशत कर दी।
उधर अमेरिकी शेयर वायदा बाजार में मजबूती के संकेत मिले। वॉल स्ट्रीट में पिछले सत्र की तेजी का कारण बेहतर कॉरपोरेट नतीजे और महंगाई के मोर्चे पर राहत भरे आंकड़े रहे।
तिमाही नतीजों से शेयरों में तेज हलचल
कॉरपोरेट नतीजों का असर कई शेयरों पर साफ दिखाई दिया।
एबीबी इंडिया के शेयर छह प्रतिशत से अधिक चढ़ गए। इसकी मूल कंपनी एबीबी लिमिटेड ने बताया कि भारत से मिलने वाले ऑर्डरों में सालाना आधार पर 81 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो बाजार की अपेक्षाओं से काफी बेहतर रही।
भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) के शेयर पांच प्रतिशत से अधिक उछले। कंपनी ने पिछले वर्ष के घाटे की तुलना में चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 376.71 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, जबकि राजस्व में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई।
मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स (एमआरपीएल) के शेयरों में दस प्रतिशत से अधिक की तेजी रही। कंपनी ने पहली तिमाही में घाटे से निकलकर मजबूत मुनाफा दर्ज किया, जिसे बेहतर रिफाइनिंग मार्जिन और आय में तेज वृद्धि का समर्थन मिला।
सौर ऊर्जा उपकरण निर्माता एमवी फोटावोल्टिक पावर के शेयर भी करीब आठ प्रतिशत चढ़े। उत्पादन बढ़ने और परिचालन दक्षता में सुधार से कंपनी का मुनाफा दोगुने से अधिक बढ़ा।
दूसरी ओर आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस के शेयर लगभग 11 प्रतिशत टूट गए क्योंकि कंपनी का पहली तिमाही का शुद्ध लाभ पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम रहा।
एंजेल वन ने मुनाफे में दोगुने से अधिक वृद्धि दर्ज की, लेकिन निवेशकों ने पहले से मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद लगा रखी थी, जिसके कारण शेयर दबाव में रहा।
लोटस चॉकलेट के कमजोर नतीजों से उसके शेयरों में तेज गिरावट आई, जबकि साउथ इंडियन बैंक और जना स्मॉल फाइनेंस बैंक के बेहतर नतीजों के बावजूद शेयरों में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
आईपीओ बाजार में निवेशकों का उत्साह कायम
प्राथमिक बाजार में निवेशकों की मजबूत भागीदारी जारी रही।
एसबीआई फंड्स मैनेजमेंट का आईपीओ जबरदस्त सफलता के साथ 41 गुना से अधिक सब्सक्राइब हुआ, जिससे उच्च गुणवत्ता वाले वित्तीय क्षेत्र के निर्गमों में निवेशकों की मजबूत रुचि का संकेत मिला।
वहीं अल्फाइन टेक्सवर्ल्ड का आईपीओ भी पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया और इसे लगभग 1.4 गुना आवेदन प्राप्त हुए।
इसी बीच, नए सूचीबद्ध लेजर पावर एंड इंफ्रा के शेयरों ने शानदार शुरुआत करते हुए अपने निर्गम मूल्य से लगभग 23 प्रतिशत ऊपर कारोबार समाप्त किया।
आगे की राह
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में घरेलू शेयर बाजार सीमित दायरे में कारोबार कर सकते हैं। निवेशकों की नजर अब कॉरपोरेट नतीजों, अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर रहेगी।
मजबूत घरेलू आर्थिक बुनियाद और बेहतर कॉरपोरेट आय बाजार को सहारा दे रही है, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम और ऊंचे ऊर्जा मूल्य निकट अवधि में उतार-चढ़ाव बनाए रख सकते हैं। ऐसे में निवेशकों के लिए चुनिंदा और गुणवत्ता वाले शेयरों पर ध्यान केंद्रित करना अधिक उपयुक्त माना जा रहा है।

