Last Updated on July 23, 2026 9:00 pm by BIZNAMA NEWS
सेंसेक्स 364 अंक टूटा, निफ्टी 23,900 के नीचे बंद; मिडकैप-स्मॉलकैप शेयरों में भी व्यापक बिकवाली
हमारे बिजनेस संवाददाता से
घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की धारणा को कमजोर कर दिया। इसके चलते निवेशकों ने जोखिम वाले निवेशों से दूरी बनाई और लगभग सभी प्रमुख सेक्टरों में बिकवाली देखने को मिली। व्यापक बाजार (ब्रॉडर मार्केट) में भी दबाव बना रहा, जिससे यह संकेत मिला कि बाजार में कमजोरी केवल चुनिंदा बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं है, बल्कि अधिकांश शेयर इसकी चपेट में हैं।
दिन के कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 363.66 अंक यानी 0.47 प्रतिशत गिरकर 76,391.39 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी-50 126.65 अंक यानी 0.53 प्रतिशत टूटकर 23,896.60 पर बंद हुआ। इसके साथ ही निफ्टी एक बार फिर 23,900 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया।
पिछले चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स में लगभग 2.25 प्रतिशत और निफ्टी में 1.90 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, महंगे होते कच्चे तेल और विदेशी निवेशकों की सतर्कता ने बाजार पर लगातार दबाव बनाए रखा है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल बना सबसे बड़ा कारण
गुरुवार की गिरावट का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी रही।
ब्रेंट क्रूड सितंबर 2026 डिलीवरी के लिए 4.01 डॉलर यानी 4.26 प्रतिशत बढ़कर 98.08 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के बेहद करीब पहुंच गई हैं, जिससे वैश्विक बाजारों में महंगाई और आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंताएं फिर तेज हो गई हैं।
तेल की कीमतों में यह तेजी अमेरिका द्वारा ईरान पर नए सैन्य हमले किए जाने तथा यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर (रेड सी) में तेल टैंकरों को निशाना बनाने की खबरों के बाद आई। इससे आशंका बढ़ गई है कि यदि संघर्ष और फैलता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) या बाब-अल-मंदेब (Bab el-Mandeb) जैसे रणनीतिक समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं, तो दुनिया के एक-चौथाई से अधिक तेल एवं गैस आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। इससे वैश्विक महंगाई और बढ़ेगी तथा आर्थिक गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
भारत जैसे देश, जो अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात करते हैं, उनके लिए कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि चिंता का विषय है। इससे चालू खाता घाटा बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।
लगभग सभी सेक्टरों में बिकवाली
गुरुवार को बाजार में बिकवाली व्यापक रही।
रियल्टी, ऑयल एंड गैस, इंफ्रास्ट्रक्चर और सार्वजनिक क्षेत्र (पीएसयू) के बैंकिंग शेयरों में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई।
इसके विपरीत केवल ऑटोमोबाइल और मीडिया सेक्टर के शेयर ही बढ़त दर्ज करने में सफल रहे।
बाजार की चौड़ाई (मार्केट ब्रेड्थ) भी कमजोर रही। बीएसई पर 1,637 शेयरों में तेजी आई, जबकि 2,585 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। 181 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए।
ब्रॉडर मार्केट ने मुख्य सूचकांकों से भी खराब प्रदर्शन किया।
बीएसई मिडकैप इंडेक्स 1.01 प्रतिशत और बीएसई स्मॉलकैप इंडेक्स 1.20 प्रतिशत गिर गया। इससे स्पष्ट है कि निवेशकों ने छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में भी मुनाफावसूली और बिकवाली की।
दिग्गज शेयरों ने बढ़ाया दबाव
बाजार की गिरावट में बड़ी कंपनियों के शेयरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
रिलायंस इंडस्ट्रीज 1.24 प्रतिशत, एचडीएफसी बैंक 0.97 प्रतिशत और भारती एयरटेल 0.82 प्रतिशत गिरकर बंद हुए। इन तीनों शेयरों ने अकेले ही निफ्टी को नीचे खींचने में अहम योगदान दिया।
इस बीच बाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला इंडिया वीआईएक्स (India VIX) 1.37 प्रतिशत बढ़कर 13.48 पर पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों में आने वाले दिनों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
तकनीकी संकेत हुए कमजोर
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार निफ्टी की संरचना अब कमजोर दिखाई दे रही है।
लगातार चार दिनों की गिरावट के बाद निफ्टी महत्वपूर्ण तकनीकी स्तरों से नीचे आ गया है। निकट भविष्य में 23,750 से 23,780 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन (सपोर्ट) माना जा रहा है, जबकि 24,000 का स्तर निकटतम प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) रहेगा।
यदि निफ्टी 24,000 के ऊपर मजबूती से टिकने में सफल होता है तो बाजार में कुछ राहत मिल सकती है। वहीं, समर्थन स्तर टूटने पर गिरावट और गहरी हो सकती है।
रुपये, बॉन्ड और कमोडिटी बाजार पर भी असर
शेयर बाजार की कमजोरी का असर अन्य वित्तीय बाजारों में भी देखने को मिला।
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मामूली कमजोर होकर 96.56 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 96.53 पर बंद हुआ था।
भारत के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की प्रतिफल (यील्ड) बढ़कर 6.83 प्रतिशत हो गई, जो पिछले बंद स्तर 6.801 प्रतिशत से अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार में महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं।
कमोडिटी बाजार में एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर्स (5 अगस्त 2026 डिलीवरी) लगभग 1 प्रतिशत गिरकर 1,44,222 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गए।
उधर, यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY) 101.16 पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.679 प्रतिशत हो गई।
वैश्विक बाजारों का मिला-जुला रुख
एशियाई बाजारों में अधिकांश सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। प्रमुख अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा पूंजीगत निवेश (कैपेक्स) बढ़ाने की घोषणाओं से सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों को समर्थन मिला।
हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की उत्साह पर अंकुश लगा दिया।
यूरोपीय बाजारों में तकनीकी शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। निवेशकों की निगाहें यूरोपीय केंद्रीय बैंक (ECB) की मौद्रिक नीति बैठक पर भी रहीं।
अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी के संकेत मिले। डाउ जोंस फ्यूचर्स लगभग 192 अंक नीचे कारोबार कर रहे थे।
बुधवार को वॉल स्ट्रीट पर एसएंडपी 500 में 0.14 प्रतिशत, नैस्डैक कंपोजिट में 0.57 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज लगभग सपाट बंद हुआ।
इस बीच अल्फाबेट (गूगल की मूल कंपनी) ने 2026 के लिए पूंजीगत व्यय बढ़ाकर 205 अरब डॉलर तक करने की घोषणा की है। हालांकि कंपनी की कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अवसंरचना पर भारी निवेश की योजना को लेकर निवेशकों में कुछ चिंता भी देखने को मिली।
कंपनियों के नतीजों का शेयरों पर असर
तिमाही नतीजों के आधार पर कई शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला।
एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी 6.45 प्रतिशत उछला क्योंकि कंपनी ने पहली तिमाही में मजबूत मुनाफा और राजस्व वृद्धि दर्ज की।
तनला प्लेटफॉर्म्स लगभग 10 प्रतिशत चढ़ गया, जबकि गंधार ऑयल रिफाइनरी (इंडिया) करीब 20 प्रतिशत उछल गया। कंपनी के मुनाफे में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई।
एचईजी और पीवीआर आईनॉक्स ने भी बेहतर तिमाही परिणामों के बाद बढ़त दर्ज की। इटरनल के शेयरों में भी हल्की तेजी रही क्योंकि कंपनी ने मजबूत आय वृद्धि दर्ज की।
दूसरी ओर सिप्ला और डॉ. रेड्डीज लेबोरेट्रीज़ के शेयर कमजोर तिमाही मुनाफे के कारण दबाव में रहे।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) 2.30 प्रतिशत गिर गया क्योंकि कंपनी पहली तिमाही में भारी शुद्ध घाटे में चली गई।
चेन्नई पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, निप्पॉन लाइफ इंडिया एसेट मैनेजमेंट तथा वारी रिन्यूएबल टेक्नोलॉजीज के शेयर भी तिमाही परिणामों के बाद गिरावट के साथ बंद हुए।
IPO बाजार में मिला-जुला रुख
प्राथमिक बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही, लेकिन सभी निर्गमों को समान प्रतिक्रिया नहीं मिली।
इंडो-मिम और एक्सट्रानेट टेक्नोलॉजीज के आईपीओ को निर्धारित शेयरों से अधिक आवेदन प्राप्त हुए।
वहीं लोहिया कॉर्प के आईपीओ को अपेक्षाकृत कमजोर प्रतिक्रिया मिली और यह पूरी तरह सब्सक्राइब नहीं हो सका।
आगे की राह
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में घरेलू बाजार की दिशा मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की गतिविधियों, कंपनियों के तिमाही परिणामों तथा वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर निर्भर करेगी।
यदि कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर टिकती हैं, तो भारत जैसे आयातक देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। इससे महंगाई, चालू खाता घाटा, रुपये की विनिमय दर और कॉरपोरेट आय सभी प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे माहौल में निकट अवधि में बाजार में अस्थिरता बने रहने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
अस्वीकरण: यह समाचार 23 जुलाई 2026 के बाजार बंद होने तक उपलब्ध बाजार आंकड़ों, कंपनी खुलासों तथा सार्वजनिक सूचनाओं पर आधारित है। निवेश संबंधी किसी भी निर्णय से पहले निवेशकों को अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करना चाहिए।

