Last Updated on July 22, 2026 6:45 pm by BIZNAMA NEWS
हमारे बिजनेस संवाददाता
घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को लगातार तीसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों, रुपये में तेज कमजोरी और दिग्गज शेयरों में मुनाफावसूली के चलते निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ा, जिससे प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे। बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और फार्मा शेयरों में बिकवाली का सबसे अधिक असर देखने को मिला, जबकि एफएमसीजी और ऑटो शेयरों ने सीमित समर्थन दिया।
बीएसई सेंसेक्स 715.06 अंक यानी 0.92 प्रतिशत टूटकर 76,755.05 पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी-50 191.45 अंक यानी 0.79 प्रतिशत फिसलकर 23,996.25 पर आ गया और 24,000 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बंद हुआ। पिछले तीन कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 1.78 प्रतिशत और निफ्टी 1.38 प्रतिशत टूट चुका है, जो बाजार में बढ़ती सतर्कता और वैश्विक अनिश्चितताओं को दर्शाता है।
विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल और रुपये की लगातार कमजोरी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए महंगा कच्चा तेल आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव बढ़ा सकता है, जबकि कमजोर रुपया विदेशी निवेश और मुद्रास्फीति के मोर्चे पर जोखिम पैदा करता है।
निफ्टी पर सबसे अधिक दबाव आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक ने डाला। आईसीआईसीआई बैंक का शेयर 1.60 प्रतिशत, रिलायंस इंडस्ट्रीज 1.51 प्रतिशत और एचडीएफसी बैंक 0.99 प्रतिशत गिरा। इन दिग्गज कंपनियों में बिकवाली का सीधा असर प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा।
व्यापक बाजार में भी रही कमजोरी
बाजार की कमजोरी केवल बड़े शेयरों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में भी बिकवाली का दबाव देखने को मिला। बीएसई मिडकैप सूचकांक 1.05 प्रतिशत और स्मॉलकैप सूचकांक 1.39 प्रतिशत लुढ़क गया। बाजार की चौड़ाई (मार्केट ब्रेड्थ) भी नकारात्मक रही। बीएसई पर 2,780 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि केवल 1,458 शेयरों में तेजी दर्ज की गई। 193 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
निवेशकों की बढ़ती चिंता का असर अस्थिरता सूचकांक पर भी दिखाई दिया। इंडिया वीआईएक्स, जिसे बाजार का ‘फियर इंडेक्स’ कहा जाता है, 5.49 प्रतिशत बढ़कर 13.29 पर पहुंच गया, जो निकट भविष्य में अधिक उतार-चढ़ाव की आशंका का संकेत है।
कच्चा तेल और रुपया चिंता का केंद्र
कमोडिटी बाजार में ब्रेंट क्रूड सितंबर 2026 डिलीवरी के लिए 4.13 प्रतिशत बढ़कर 94.77 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। लाल सागर में सुरक्षा संबंधी जोखिम बढ़ने और यमन के हूती विद्रोहियों की धमकियों के बाद एशिया की ओर जा रहे सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों के रास्ता बदलने से आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका ने कीमतों को ऊपर धकेला।
इसका असर भारतीय मुद्रा पर भी पड़ा। रुपया डॉलर के मुकाबले और कमजोर होकर 96.59 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 96.25 पर बंद हुआ था।
बॉन्ड बाजार में भारत की 10 वर्षीय सरकारी प्रतिभूति की प्रतिफल (यील्ड) बढ़कर 6.805 प्रतिशत हो गई। वहीं सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर्स 1.22 प्रतिशत चढ़कर 1,44,623 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।
वैश्विक बाजारों से मिले मिले-जुले संकेत
यूरोपीय बाजारों में तेजी का रुख देखने को मिला। ब्रिटेन में जून 2026 के दौरान मुद्रास्फीति घटकर 2.6 प्रतिशत रह गई, जो मई के 2.8 प्रतिशत से कम है और बैंक ऑफ इंग्लैंड के 2 प्रतिशत लक्ष्य के करीब पहुंच गई है। इससे भविष्य में ब्याज दरों को लेकर सकारात्मक उम्मीदें बनी हैं।
एशियाई बाजारों में कारोबार मिला-जुला रहा। निवेशकों ने एक ओर वॉल स्ट्रीट में आई रिकवरी से उत्साह लिया, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महंगे कच्चे तेल ने सतर्कता बनाए रखी।
अमेरिकी बाजारों में मंगलवार रात गिरावट रही। डॉव जोन्स 307 अंक टूटा, जबकि एसएंडपी 500 और नैस्डैक में भी हल्की कमजोरी रही। हालांकि बाद में ईरान की ओर से कूटनीतिक बातचीत जारी रहने के संकेत मिलने से निवेशकों की चिंता कुछ कम हुई।
अमेरिकी टैरिफ घोषणा से फार्मा शेयरों में बिकवाली
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा आयातित जेनेरिक दवाओं पर चरणबद्ध टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद भारतीय फार्मा कंपनियों के शेयर दबाव में आ गए।
घोषणा के अनुसार, 1 अगस्त 2028 तक जेनेरिक दवाओं पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। इसके बाद एक वर्ष के लिए 100 प्रतिशत और अगस्त 2029 से 200 प्रतिशत तक टैरिफ लागू किया जाएगा।
हालांकि शुल्क लागू होने में अभी समय है, लेकिन भविष्य की संभावित चुनौती को देखते हुए निवेशकों ने फार्मा शेयरों में बिकवाली की। निफ्टी फार्मा इंडेक्स 1.31 प्रतिशत गिर गया।
लुपिन में सबसे अधिक 4.35 प्रतिशत की गिरावट आई। इसके अलावा पिरामल फार्मा, अजंता फार्मा, ऑरोबिंदो फार्मा, डॉ. रेड्डीज लैबोरेट्रीज, ग्लैंड फार्मा, एल्केम लैबोरेट्रीज, मैनकाइंड फार्मा, जायडस लाइफसाइंसेज, सिप्ला और सन फार्मास्युटिकल्स सहित अधिकांश प्रमुख फार्मा कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए।
कमजोर आउटलुक से बंधन बैंक में बड़ी गिरावट
दिन के सबसे बड़े नुकसान वाले शेयरों में बंधन बैंक शामिल रहा, जिसका शेयर 16.63 प्रतिशत टूट गया।
हालांकि बैंक ने जून तिमाही में 34.9 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी के साथ 501.67 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया, लेकिन प्रबंधन ने वित्त वर्ष 2027 के लिए रिटर्न ऑन एसेट्स (RoA) का अनुमान घटाकर 1.2 से 1.4 प्रतिशत कर दिया। पहले यह अनुमान 1.6 से 1.8 प्रतिशत था। मार्जिन पर दबाव बने रहने की चेतावनी से निवेशकों की धारणा कमजोर हुई।
तिमाही नतीजों से शेयरों में तेज उतार-चढ़ाव
तिमाही नतीजों के आधार पर कई शेयरों में उल्लेखनीय हलचल देखने को मिली।
नेस्ले इंडिया का शेयर 3.31 प्रतिशत चढ़ गया। कंपनी का पहली तिमाही का शुद्ध लाभ लगभग 48 प्रतिशत बढ़कर 975.12 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि परिचालन आय में 25 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। मजबूत घरेलू मांग ने कंपनी के प्रदर्शन को सहारा दिया।
महिंद्रा एंड महिंद्रा फाइनेंशियल सर्विसेज 7.60 प्रतिशत उछला। कंपनी का तिमाही मुनाफा 69.6 प्रतिशत बढ़ा, जिसे रिकॉर्ड ऋण वितरण, बेहतर मार्जिन और कम क्रेडिट लागत का समर्थन मिला।
इसी तरह साइएंट डीएलएम 11.72 प्रतिशत, केनरा रोबेको एसेट मैनेजमेंट, क्रिसिल, स्टाइलम इंडस्ट्रीज और एमपीएस के शेयर भी मजबूत तिमाही नतीजों के बाद तेजी के साथ बंद हुए।
दूसरी ओर टिप्स म्यूजिक 12.15 प्रतिशत टूट गया। कंपनी ने कमजोर तिमाही नतीजों के साथ शेयर बायबैक प्रस्ताव पर निर्णय भी टाल दिया। सुनटेक रियल्टी 7.94 प्रतिशत और भारत कोकिंग कोल 6.82 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। भारत कोकिंग कोल ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में लाभ के बजाय घाटा दर्ज किया।
आगे की राह
विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और कॉरपोरेट नतीजों पर निर्भर करेगी। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ऊंची ऊर्जा कीमतें निवेशकों की चिंता बढ़ाए हुए हैं। हालांकि बेहतर तिमाही परिणाम देने वाली कंपनियों में निवेश के अवसर बने रह सकते हैं, लेकिन समग्र बाजार में फिलहाल उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने की संभावना है। निवेशकों की नजर अब वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाओं, केंद्रीय बैंकों के संकेतों और आगामी तिमाही नतीजों पर रहेगी।

