Last Updated on May 31, 2026 7:01 pm by BIZNAMA NEWS

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तेहरान। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों के विपरीत, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव कम होता नहीं दिख रहा है। अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘तसनीम’ ने ईरानी नौसैनिक अधिकारियों के हवाले से स्पष्ट किया है कि ट्रंप द्वारा प्रतिबंध हटाने के दावे के बावजूद, ईरानी जहाजों को इस मार्ग से गुजरने में अब भी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) द्वारा लगातार जहाजों को इस क्षेत्र में प्रवेश न करने की चेतावनियां दी जा रही हैं।

ट्रंप की शर्तें और ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर घोषणा की थी कि अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को “अब हटा लिया जाएगा।” इसके साथ ही उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य को “तुरंत” खोलने, जहाजरानी को प्रतिबंध मुक्त करने और समुद्री बारूदी सुरंगें हटाने की बात कही थी। ट्रंप ने ईरान के सामने समझौते की शर्तें रखते हुए कहा कि तेहरान को कभी भी परमाणु हथियार न बनाने और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के समन्वय से अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को नष्ट करने पर सहमत होना होगा। हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि परमाणु मुद्दा मौजूदा बातचीत का हिस्सा नहीं है।

जलमार्ग पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण

सिन्हुआ और आईआरएनए (IRNA) समाचार एजेंसियों के अनुसार, ईरान की मुख्य सैन्य कमान ‘खातम अल-अनबिया केंद्रीय मुख्यालय’ ने शनिवार को हुंकार भरते हुए कहा कि ईरानी सशस्त्र बल होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण अधिकार के साथ नियंत्रण रख रहे हैं। कमान ने स्पष्ट किया कि इस जलमार्ग से गुजरने वाले सभी वाणिज्यिक पोतों और तेल टैंकरों को केवल ईरान द्वारा निर्धारित मार्गों का ही उपयोग करना होगा और इसके लिए ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) की नौसेना से अनुमति लेना अनिवार्य है।

फार्स एजेंसी का दावा

इस बीच, फार्स समाचार एजेंसी ने बताया कि पिछले 24 घंटों में 20 जहाजों ने ईरानी अधिकारियों के साथ समन्वय कर इस जलडमरूमध्य को पार किया। इन जहाजों को रासायनिक उर्वरक जैसी आवश्यक वस्तुओं की वैश्विक मांग को देखते हुए अनुमति दी गई थी।

गौरतलब है कि यह विवाद 28 फरवरी को तब और गहरा गया था, जब इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरानी क्षेत्र पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद ईरान ने इस जलमार्ग पर नियंत्रण कड़ा करते हुए दोनों देशों से जुड़े जहाजों पर प्रतिबंध लगा दिया था। वहीं, अमेरिका ने भी जवाबी कार्रवाई में अपने प्रतिबंध जारी रखे हैं, जिससे ईरानी बंदरगाहों का व्यापार प्रभावित हो रहा है।