Last Updated on June 24, 2026 5:37 pm by BIZNAMA NEWS
हमारे बिजनेस संवाददाता से
घरेलू शेयर बाजारों में बुधवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी ने मजबूत बढ़त दर्ज करते हुए हालिया गिरावट से उबरने के संकेत दिए। निवेशकों की धारणा को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा की टिप्पणी से बल मिला, जिसमें उन्होंने कहा कि फिलहाल ब्याज दरों में बढ़ोतरी पर चर्चा करना समयपूर्व होगा। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की खरीदारी, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बढ़ती उम्मीदें और दक्षिण कोरियाई बाजारों में सुधार ने भी बाजार को समर्थन दिया।
कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 790.54 अंक यानी 1.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ 76,991.22 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 50 197.55 अंक यानी 0.83 प्रतिशत चढ़कर 24,021.65 पर पहुंच गया और एक बार फिर 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया।
बैंकिंग और आईटी शेयरों ने संभाली बाजार की कमान
बाजार की तेजी में निजी बैंकिंग और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों के शेयरों की अहम भूमिका रही। आईसीआईसीआई बैंक के शेयर में 2.59 प्रतिशत, एचडीएफसी बैंक में 2.34 प्रतिशत और इन्फोसिस में 2.59 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इन तीनों दिग्गज कंपनियों ने निफ्टी को ऊपर ले जाने में सबसे बड़ा योगदान दिया।
इन्फोसिस के शेयरों में तेजी उस घोषणा के बाद आई जिसमें कंपनी ने वैश्विक सेमीकंडक्टर निर्माता ग्लोबलफाउंड्रीज के साथ अपनी बहुवर्षीय रणनीतिक साझेदारी के विस्तार की जानकारी दी। इस साझेदारी का उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित आईटी परिवर्तन को गति देना है।
व्यापक बाजार की चाल रही सीमित
हालांकि प्रमुख सूचकांकों में मजबूत तेजी रही, लेकिन व्यापक बाजार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा। बीएसई मिडकैप इंडेक्स में केवल 0.13 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.20 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई।
बाजार की चौड़ाई सकारात्मक रही। एनएसई पर 1,735 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 1,566 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। 95 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
बाजार में जोखिम की धारणा में सुधार का संकेत इंडिया VIX से भी मिला। बाजार की संभावित अस्थिरता को मापने वाला यह सूचकांक लगभग 4 प्रतिशत गिरकर 13.39 पर आ गया, जो निवेशकों के बीच बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
बाजार को मिले कई मोर्चों से सकारात्मक संकेत
विश्लेषकों के अनुसार बाजार की तेजी केवल घरेलू कारणों तक सीमित नहीं रही। वैश्विक और घरेलू स्तर पर कई सकारात्मक कारकों ने निवेशकों का मनोबल बढ़ाया।
सबसे महत्वपूर्ण कारक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट रही। ब्रेंट क्रूड 77 डॉलर प्रति बैरल से नीचे फिसलकर 76 डॉलर के आसपास आ गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए कम तेल कीमतें मुद्रास्फीति और चालू खाते के घाटे के लिहाज से सकारात्मक मानी जाती हैं।
इसके अलावा भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते को लेकर बढ़ती उम्मीदों ने भी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया। बाजार को विदेशी निवेशकों की लगातार खरीदारी से भी समर्थन मिला।
बॉन्ड, रुपये और कमोडिटी बाजार
बॉन्ड बाजार में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। भारत के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड घटकर 6.805 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछले कारोबारी सत्र में 6.840 प्रतिशत थी।
विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले थोड़ा मजबूत हुआ। रुपया 94.6625 प्रति डॉलर पर कारोबार करता देखा गया, जबकि पिछले सत्र में यह 94.7600 पर बंद हुआ था।
सोने की कीमतों में मुनाफावसूली देखने को मिली। एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स 1.44 प्रतिशत गिरकर ₹1,44,416 प्रति 10 ग्राम पर आ गए।
वहीं अमेरिकी डॉलर सूचकांक (DXY) 101.65 पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड घटकर 4.481 प्रतिशत पर आ गई।
वैश्विक बाजारों में सतर्कता बरकरार
घरेलू बाजारों में तेजी के बावजूद वैश्विक निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है। तकनीकी और सेमीकंडक्टर शेयरों में बिकवाली के चलते यूरोपीय और अमेरिकी बाजारों पर दबाव बना रहा।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। वैश्विक स्तर पर तकनीकी शेयरों में आई कमजोरी ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा।
मध्य पूर्व में जारी घटनाक्रम भी निवेशकों के रडार पर बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के अनुसार फारस की खाड़ी में फंसे 11,000 से अधिक नाविकों की आवाजाही जल्द शुरू हो सकती है। तेल आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर निवेशकों की निगाह बनी हुई है, क्योंकि वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
अमेरिकी बाजारों में मंगलवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली थी। एसएंडपी 500 में 1.44 प्रतिशत, नैस्डैक में 2.21 प्रतिशत और डॉव जोन्स में मामूली गिरावट दर्ज की गई।
चर्चा में रहे प्रमुख शेयर
ट्रेंट लिमिटेड के शेयर 3.6 प्रतिशत चढ़ गए। कंपनी ने अपनी वार्षिक आम बैठक (AGM) में विस्तार की महत्वाकांक्षी योजना पेश की। कंपनी हर वर्ष लगभग 50 नए वेस्टसाइड स्टोर, 200-250 जूडियो स्टोर और 25-40 स्टार स्टोर खोलने की योजना बना रही है। साथ ही नोएल टाटा ने कंपनी के चेयरमैन पद से हटने की घोषणा की।
टाटा मोटर्स के शेयर 3.21 प्रतिशत मजबूत हुए। कंपनी ने निवेशक दिवस के दौरान FY28 तक की विकास रणनीति साझा की और कहा कि उसने FY27 के कई लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिए हैं। कंपनी वैश्विक वाणिज्यिक वाहन बाजार में चौथा सबसे बड़ा खिलाड़ी बनने की महत्वाकांक्षा रखती है।
इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) के शेयर 6.83 प्रतिशत टूट गए। सरकार ने कंपनी में 2 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए ऑफर फॉर सेल (OFS) लॉन्च किया है। OFS का फ्लोर प्राइस ₹91 प्रति शेयर तय किया गया, जो बाजार भाव से काफी कम है।
टैनफैक इंडस्ट्रीज के शेयर 3 प्रतिशत से अधिक चढ़े। कंपनी के बोर्ड ने ₹2,090.43 प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP) को मंजूरी दी।
प्रोस्टार्म इंफो सिस्टम्स को कर्नाटक राज्य अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं से ₹4.03 करोड़ का ऑर्डर मिला, लेकिन इसके बावजूद शेयर 1.84 प्रतिशत गिर गया।
भारत डायनेमिक्स ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) से लगभग ₹1,347.71 करोड़ के ऑर्डर मिलने की घोषणा की, हालांकि शेयर में हल्की कमजोरी रही।
IPO बाजार की स्थिति
प्राथमिक बाजार में निवेशकों की रुचि मिश्रित रही।
एडविट ज्वेल्स के आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त समर्थन मिला और यह 42.76 गुना सब्सक्राइब हो गया।
इसके विपरीत वॉटरवेज लीजर टूरिज्म का आईपीओ केवल 0.50 गुना सब्सक्राइब हुआ, जो निवेशकों की सीमित रुचि को दर्शाता है।
नई पेशकश सीएसएम टेक्नोलॉजीज को भी पहले दिन अपेक्षाकृत कमजोर प्रतिक्रिया मिली और यह केवल 0.25 गुना सब्सक्राइब हुआ।
आगे की राह
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, विदेशी निवेशकों की खरीदारी और ब्याज दरों को लेकर राहत भरे संकेत निकट अवधि में भारतीय शेयर बाजार को समर्थन दे सकते हैं। हालांकि वैश्विक तकनीकी शेयरों में जारी कमजोरी, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीति को लेकर अनिश्चितता और मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक परिस्थितियां निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी रहेंगी।
विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर रहेगी कि निफ्टी 24,000 के स्तर को कितने समय तक बनाए रख पाता है और क्या यह तेजी एक स्थायी उछाल में बदलती है या केवल हालिया गिरावट के बाद आई राहत भरी रिकवरी साबित होती है।

