Last Updated on April 23, 2026 5:10 pm by BIZNAMA NEWS

कमजोर बाजार में फार्मा सेक्टर चमका

बिज़नेस संवाददाता

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण निवेशकों ने बिकवाली का रुख अपनाया, जिससे प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बना रहा।

S&P BSE Sensex 852.49 अंक यानी 1.09% गिरकर 77,664 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 205.05 अंक यानी 0.84% फिसलकर 24,173 पर आ गया। पिछले दो सत्रों में दोनों सूचकांकों में 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है।


ब्रॉडर मार्केट में कमजोरी, वोलैटिलिटी बढ़ी

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी गिरावट रही। बीएसई मिडकैप इंडेक्स 0.33% और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.49% नीचे बंद हुए। बाजार में गिरावट का दबदबा रहा, जहां गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़त वाले शेयरों से अधिक रही।

इसी बीच, बाजार की अस्थिरता को दर्शाने वाला इंडिया VIX 1.58% बढ़कर 18.59 पर पहुंच गया, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है।


सेक्टरवार प्रदर्शन: फार्मा में तेजी, ऑटो-बैंकिंग में दबाव

सेक्टर के स्तर पर, फार्मा और हेल्थकेयर शेयरों में मजबूती देखने को मिली। डिफेंसिव खरीदारी के चलते फार्मा इंडेक्स में उछाल आया, जिसमें डॉ. रेड्डीज जैसी कंपनियों ने अच्छा प्रदर्शन किया।

वहीं दूसरी ओर, ऑटो सेक्टर 2.35% गिरा, जबकि PSU बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। बढ़ती लागत और मांग को लेकर चिंता इन सेक्टरों पर भारी पड़ी।


मजबूत PMI के बावजूद बाजार पर दबाव

हालांकि, आर्थिक आंकड़ों ने मजबूती के संकेत दिए। HSBC फ्लैश इंडिया कंपोजिट PMI अप्रैल में बढ़कर 58.3 हो गया, जो मार्च के 57.0 से अधिक है। यह कारोबार गतिविधियों में तेज विस्तार का संकेत देता है।

सर्विस सेक्टर का PMI 57.9 पर पहुंचा, जबकि मैन्युफैक्चरिंग PMI भी बढ़कर 55.9 हो गया, जो औद्योगिक गतिविधियों में सुधार को दर्शाता है।


मुख्य संकेतक: बॉन्ड यील्ड, रुपया और कमोडिटी

10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 6.95% हो गई, जबकि रुपया कमजोर होकर 94.12 प्रति डॉलर पर पहुंच गया।

सोने की कीमतों में हल्की गिरावट आई, वहीं कच्चे तेल में तेज उछाल देखा गया। ब्रेंट क्रूड $103 प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे महंगाई और चालू खाते के घाटे को लेकर चिंता बढ़ी है।


वैश्विक संकेत कमजोर

वैश्विक बाजारों से भी कमजोर संकेत मिले। अमेरिकी बाजारों में गिरावट के संकेत हैं, जबकि यूरोपीय बाजार भी दबाव में रहे। यूरोजोन में PMI गिरकर 50 से नीचे आ गया, जो आर्थिक सुस्ती का संकेत है।

एशियाई बाजार भी लाल निशान में बंद हुए। अमेरिका-ईरान तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जारी घटनाओं ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।


फोकस में रहे शेयर

जियो फाइनेंशियल सर्विसेज में लगभग 4% की तेजी आई, जब कंपनी ने एलियांज के साथ संयुक्त उद्यम की घोषणा की।

वहीं यूनियन बैंक के शेयर 8% से अधिक टूटे, क्योंकि कंपनी के नतीजे उम्मीद से कमजोर रहे।

हैवेल्स इंडिया 7% गिरा, जबकि ट्रेंट के शेयर भी 4% टूटे।

आईटी सेक्टर में भी दबाव रहा, जहां इन्फोसिस के शेयर नतीजों से पहले फिसले।

दूसरी ओर, कुछ शेयरों में मजबूती रही—ओएफएसएस 9% चढ़ा और डेल्टा कॉर्प में अपर सर्किट लगा।


आगे का रुख

आने वाले समय में बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक घटनाक्रम और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर निर्भर करेगी।

हालांकि PMI जैसे मजबूत आंकड़े अर्थव्यवस्था की मजबूती दिखाते हैं, लेकिन वैश्विक जोखिम फिलहाल बाजार पर हावी हैं।


निष्कर्ष

फिलहाल बाजार पर बाहरी कारकों का दबाव बना हुआ है। फार्मा जैसे डिफेंसिव सेक्टर सहारा दे रहे हैं, लेकिन स्थायी तेजी के लिए वैश्विक स्थिरता और मजबूत कॉर्पोरेट नतीजों की जरूरत होगी।