Last Updated on April 22, 2026 9:43 pm by BIZNAMA NEWS

BIZ DESK

भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को अपनी तीन दिनों की तेजी को खोते हुए तेज गिरावट दर्ज की। आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने निवेशकों की धारणा को कमजोर कर दिया। वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों ने भी घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ाया।


उतार-चढ़ाव भरे सत्र में बाजार लाल निशान पर बंद

निफ्टी 50 ने कमजोर शुरुआत करते हुए 24,470.85 पर ओपनिंग की। पूरे सत्र के दौरान बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला, जहां निफ्टी 24,515.95 के उच्च स्तर और 24,352.90 के निचले स्तर के बीच झूलता रहा। अंततः बिकवाली के दबाव के चलते निफ्टी 24,400 के अहम स्तर के नीचे बंद हुआ।

बीएसई सेंसेक्स 756.84 अंकों (0.95%) की गिरावट के साथ 78,516.49 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 198.50 अंक (0.81%) टूटकर 24,378.10 पर आ गया। इससे पहले के तीन सत्रों में बाजार में करीब 1.5% की तेजी देखने को मिली थी।

निवेशकों का मूड सतर्क बना रहा। भले ही युद्धविराम बढ़ाने की खबरों से थोड़ी राहत मिली, लेकिन अनिश्चितता अभी भी बनी हुई है। अब बाजार की नजरें चौथी तिमाही (Q4) के नतीजों पर टिकी हैं।


आईटी सेक्टर बना गिरावट का मुख्य कारण

गिरावट की सबसे बड़ी वजह आईटी सेक्टर में भारी बिकवाली रही। HCL Technologies के कमजोर नतीजों और सतर्क आउटलुक ने निवेशकों को निराश किया, जिससे शेयर में 10% से अधिक की गिरावट आई।

इसके अलावा Infosys, Tata Consultancy Services और अन्य आईटी कंपनियों के शेयरों में भी 2–4% तक की गिरावट देखी गई। निफ्टी आईटी इंडेक्स कुल मिलाकर करीब 3.9% लुढ़क गया।

कंपनियों ने मांग में सुस्ती, प्रोजेक्ट्स में देरी और ग्राहकों के खर्च में कमी को प्रमुख कारण बताया, जिससे सेक्टर के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है।


मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में मजबूती

हालांकि बड़े शेयरों में गिरावट रही, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। बीएसई मिडकैप इंडेक्स में 0.29% और स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.90% की बढ़त दर्ज की गई।

बाजार की चौड़ाई (मार्केट ब्रेड्थ) भी सकारात्मक रही, जहां 2,440 शेयरों में तेजी आई, जबकि 1,838 शेयरों में गिरावट रही। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक अभी भी चुनिंदा शेयरों में निवेश कर रहे हैं।

वहीं, बाजार की अस्थिरता बढ़ी है। इंडिया VIX 4.37% बढ़कर 18.30 पर पहुंच गया, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है।


आर्थिक मोर्चे पर दबाव बढ़ा

रेटिंग एजेंसी Moody’s ने भारत की FY27 जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाकर 6% कर दिया है, जो पहले 6.8% था। कमजोर खपत, धीमा औद्योगिक उत्पादन और बढ़ती ऊर्जा लागत इसके प्रमुख कारण बताए गए हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है, जिससे महंगाई पर दबाव पड़ेगा। इससे एविएशन, सीमेंट और केमिकल जैसे सेक्टरों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।


प्रमुख संकेतक और कमोडिटी ट्रेंड

भारत के 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 6.915% हो गई, जो बाजार में सख्ती के संकेत देती है। वहीं रुपया कमजोर होकर डॉलर के मुकाबले 93.78 के स्तर पर पहुंच गया।

कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में 1% की बढ़त दर्ज की गई, जो सुरक्षित निवेश की ओर झुकाव को दर्शाता है। ब्रेंट क्रूड लगभग 99 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जिससे महंगाई की चिंता और बढ़ गई है।


वैश्विक बाजारों का मिला-जुला रुख

वैश्विक बाजारों में मिश्रित रुख देखने को मिला। अमेरिकी बाजारों में हल्की मजबूती के संकेत मिले, जबकि यूरोपीय बाजार महंगाई की चिंताओं के कारण दबाव में रहे।

एशियाई बाजार भी अनिश्चितता के बीच मिले-जुले बंद हुए। जापान का निक्केई इंडेक्स रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, जिसे मजबूत निर्यात आंकड़ों का समर्थन मिला।


आगे का रास्ता: नतीजे और वैश्विक संकेत अहम

आने वाले दिनों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से दो कारकों पर निर्भर करेगी—कंपनियों के तिमाही नतीजे और वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति।

विशेषज्ञों का मानना है कि निकट अवधि में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। हालांकि, मजबूत घरेलू आर्थिक आधार और चुनिंदा सेक्टरों में अवसर बाजार को सहारा दे सकते हैं।

फिलहाल, बाजार एक संतुलन की स्थिति में है, जहां वैश्विक जोखिम और घरेलू मजबूती के बीच निवेशक सतर्कता के साथ आगे बढ़ रहे हैं।