Last Updated on May 10, 2026 1:54 pm by BIZNAMA NEWS
संयुक्त राष्ट्र में भारतीय प्रवासियों की भूमिका पर विशेष चर्चा
AMN / UN NEWS
अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) ने कहा है कि विदेश में रहने वाले 3 करोड़ 40 लाख से अधिक भारतीय प्रवासी, केवल एक संख्या भर नहीं हैं; बल्कि वे भारत और अपने मेज़बान देशों दोनों में परिवर्तन, नवाचार और विकास के दूत हैं. IOM ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई मिशन द्वारा यूएन मुख्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि भारतीय प्रवासियों की कहानी वास्तव में मानव गतिशीलता की शक्ति का एक प्रमाण है.
भारतीय मिशन ने यह कार्यक्रम, दुनिया भर में प्रवासियों के मुद्दे पर बनाए गए ‘ग्लोबल कॉम्पैक्ट’ की समीक्षा के अवसर पर आयोजित किया.
अन्तरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन – IOM के रणनैतिक व बाहरी सम्पर्क मामलों के उप निदेशक किम एलिंग ने इस कार्यक्रम में कहा कि बहुत से प्रवासियों के लिए तत्काल महत्व के मुद्दे ये हैं कि क्या उन्हें विश्वसनीय जानकारी मिल सकती है, अगर हाँ तो किन मंचों पर, किसी प्रवासी को अगर कोई रोज़गार या आय वाले कामकाज का वादा किया गया है तो क्या वो वास्तव में मौजूद है, क्या रोज़गार दस्तावेज़ या संवाद (Contract) का सम्मान किया जाएगा यानि उस पर क़ानूनी रूप से अमल किया जाएगा, अगर कुछ ग़लत होता है तो क्या कहीं से मदद मिलेगी.
ये कुछ ज्वलन्त मुद्दे हैं और भारत का e-Migrate डिजिटिल प्लैटफ़ॉर्म इनमें से कुछ सवालों के जवाब मुहैया कराने की कोशिश करता है.
उन्होंने भारत के प्रवासन शासन के विकास की सराहना करते हुए कहा कि भारत का ‘e-Migrate’ डिजिटल मंच, इस बात का एक उत्कृष्ट उदाहरण है कि श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचे का उपयोग कैसे किया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि भारत, एक पारदर्शी, पूर्ण डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र बनाकर, रोज़गारों के लिए भर्ती की, धोखाधड़ी, सूचना की कमी और कमज़ोर हालात वाले श्रमिकों के शोषण जैसी कुछ सबसे कठिन चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत कर रहा है.
किम एलिंग ने कहा कि ‘e-Migrate’ एक बिखरे हुए दृष्टिकोण से हटाकर, प्रवासियों की यात्रा के अधिक समग्र, व्यक्ति-केंद्रित मॉडल की ओर ले जाता है. यह ‘सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन’ के लिए ‘ग्लोबल कॉम्पैक्ट’ के साथ स्पष्ट रूप से मेल खाता है.
उन्होंने कहा कि भविष्य की ओर देखें तो, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी. “हालाँकि, जैसे-जैसे हम नवाचार को अपनाते हैं, हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि डिजिटल विभाजन (digital divide) सुरक्षित प्रवासन में एक नई बाधा नहीं बन जाए. समावेशिता और पहुँच हमारे प्रयासों के केन्द्र में रहने चाहिए.
नियमित प्रवासन के लिए साझा ज़िम्मेदारी
भारत के विदेश मामलों के राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने इस कार्यक्रम में आए प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि वैश्विक गतिशीलता (global mobility) यानि दुनिया भर में लोगों का सुरक्षित, व्यवस्थित और नियमित प्रवासन सुनिश्चित करना सभी देशों की एक साझा ज़िम्मेदारी है.
उन्होंने कहा कि भारतीय प्रवासन की कहानी विशाल और गतिशील दोनों है. दुनिया भर में 3 करोड़ 40 से अधिक प्रवासी भारतीय हैं, जो 200 से अधिक देशों में फैले हुए हैं.
“हमारे वैश्विक समुदाय ने कई शताब्दियों से अर्थव्यवस्थाओं, संस्कृतियों और विचारों को जोड़ने का काम किया है. धन प्रेषण (remittances), निवेश और ज्ञान के आदान-प्रदान के माध्यम से उनका योगदान न केवल भारत के विकास में, बल्कि उन समाजों और देशों की समृद्धि में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है जहाँ वे एकीकृत हुए हैं.”
भारतीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में, भारत ने प्रवासन शासन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया है, जो प्रवासियों के कल्याण, सुरक्षा और सशक्तिकरण को अपने केन्द्र में रखता है. यह दृष्टिकोण मानता है कि प्रवासन केवल लोगों की आवाजाही नहीं है, बल्कि एक निरंतरता है जो प्रस्थान करने से पहले की तैयारी, अपने देश की सीमा से सुरक्षित रूप में अन्य देशों की सीमाओं में पहुँचना, गरिमापूर्ण रोज़गार और अन्ततः देश को वापसी और समाज में पुन: एकीकरण तक फैली हुई है.
उन्होंने बताया कि प्रवासियों के जीवन व रोज़गार को आसान बनाने के लिए भारत का ‘e-Migrate’ प्लेटफ़ॉर्म एक अग्रणी पहल के रूप में उभरता है. यह एक पूर्ण डिजिटल व्यवस्था मुहैया कराता है, जो रोज़गार के लिए भर्ती में पारदर्शिता बढ़ाता है, नियोक्ताओं और भर्ती एजेंसियों के सत्यापन को सक्षम बनाता है और रोज़गार अनुबन्धों की अखंडता सुनिश्चित करता है.
भारतीय मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने कहा कि प्रवासन स्वाभाविक रूप से अन्तरराष्ट्रीय है और इसकी पूरी क्षमता का लाभ उठाने के लिए, इसका शासन, सहयोग व परस्पर सीखने पर आधारित होना चाहिए.
भारतीय प्रवासियों की मदद के लिए प्रतिबद्धता
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थाई प्रतिनिधि राजदूत पी हरीश ने इस कार्यक्रम का आरम्भ करते हुए कहा कि हम एक ऐसी स्थिति का सामना कर रहे हैं जहाँ प्रवासन और प्रवासी राजनीतिक रूप से विवादित क्षेत्र बन गए हैं.
उन्होंने कहा, “हम प्रवासन के लिए क़ानूनी और नियमित मार्गों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और अपने उन नागरिकों की मदद करने के लिए भी, जो विदेशों में अवसरों की तलाश करते हैं.”
“हमारी यह सुनिश्चित करने में गहरी और महत्वपूर्ण रुचि है कि नियमित प्रवासन मार्गों को प्रोत्साहित किया जाए, उन्हें ठोस बनाया जाए और अन्तरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से मज़बूत किया जाए.”
भारतीय राजदूत ने कहा कि “हम इस बात पर भी बहुत स्पष्ट हैं कि प्रवासियों और शरणार्थियों के बीच का अन्तर बहुत स्पष्ट होना चाहिए. इन दोनों समूहों के बीच कोई मिश्रण नहीं होना चाहिए, विशेष रूप से उन क़ानूनी व्यवस्थाओं और ढाँचों के बीच, जो इन दोनों समूहों को नियंत्रित करते हैं.”
“जब हम प्रवासन और इस बात पर ग़ौर करते हैं कि डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचा और डिजिटल प्रणालियाँ, किस तरह प्रवासियों की मदद कर सकते हैं, तो भारत सरकार ने डिजिटल संसाधनों का उपयोग उन समाधानों को विकसित करने के लिए किया है जो प्रवासियों को व्यापक स्तर पर मदद कर सकते हैं.”

