Last Updated on June 8, 2026 6:48 pm by BIZNAMA NEWS
हमारे बिजनेस संवाददाता से
वैश्विक अनिश्चितताओं, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के बीच भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को व्यापक बिकवाली देखने को मिली। घरेलू इक्विटी बाजार लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। अमेरिकी ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की आशंकाओं और एशियाई बाजारों में कमजोरी ने भी निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया, जिससे अधिकांश सेक्टरों में दबाव देखने को मिला।
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बीएसई सेंसेक्स 719.08 अंक यानी 0.97 प्रतिशत की गिरावट के साथ 73,524.26 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 243.70 अंक या 1.04 प्रतिशत फिसलकर 23,123 के स्तर पर आ गया। पिछले दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स कुल 1.13 प्रतिशत और निफ्टी 1.38 प्रतिशत तक टूट चुका है।
विश्लेषकों के अनुसार बाजार पर सबसे बड़ा दबाव पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और उसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का रहा। सप्ताहांत में इजराइल द्वारा लेबनान में नए हमलों की खबरों के बाद क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। इसके परिणामस्वरूप ब्रेंट क्रूड की कीमतों में चार प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई और यह 97 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए कच्चे तेल की कीमतों में यह उछाल चिंता का विषय है। इससे आयात बिल बढ़ सकता है, चालू खाते के घाटे पर दबाव आ सकता है और महंगाई के मोर्चे पर नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। यही वजह रही कि निवेशकों ने जोखिम वाले निवेशों से दूरी बनाते हुए व्यापक स्तर पर मुनाफावसूली की।
सोमवार की गिरावट में धातु, ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय क्षेत्र के शेयर सबसे अधिक प्रभावित रहे। निफ्टी के प्रमुख दबाव वाले शेयरों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) और एचडीएफसी बैंक शामिल रहे। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर 2.18 प्रतिशत, एलएंडटी 2.09 प्रतिशत और एचडीएफसी बैंक 1.21 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।
बाजार में बिकवाली का असर केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहा। व्यापक बाजार में भी भारी दबाव देखने को मिला। बीएसई मिडकैप सूचकांक 1.70 प्रतिशत और स्मॉलकैप सूचकांक 1.88 प्रतिशत टूट गया। इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में भी आक्रामक बिकवाली की।
बाजार की चौड़ाई भी बेहद कमजोर रही। बीएसई पर 3,192 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि केवल 1,181 शेयरों में तेजी दर्ज की गई। 180 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। यह आंकड़ा बाजार में नकारात्मक धारणा की गहराई को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
इस बीच, निवेशकों की चिंता को दर्शाने वाला इंडिया वीआईएक्स (वोलैटिलिटी इंडेक्स) 7.85 प्रतिशत बढ़कर 17.03 पर पहुंच गया। आमतौर पर वीआईएक्स में तेजी आने वाले दिनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका को दर्शाती है।
हालांकि व्यापक कमजोरी के बीच हेल्थकेयर सेक्टर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई दिया। दवा और स्वास्थ्य सेवा कंपनियों के शेयरों में चुनिंदा खरीदारी देखने को मिली, जिससे यह सेक्टर सकारात्मक क्षेत्र में बंद होने में सफल रहा। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अनिश्चित माहौल में निवेशक रक्षात्मक क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं।
वैश्विक बाजारों से भी घरेलू निवेशकों को कोई राहत नहीं मिली। एशियाई शेयर बाजारों में कमजोरी रही, जबकि यूरोपीय बाजार भी लाल निशान में कारोबार करते दिखाई दिए। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ऊर्जा कीमतों में तेजी ने वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया है।
दूसरी ओर, जापान की अर्थव्यवस्था से सकारात्मक संकेत मिले हैं। वर्ष 2026 की पहली तिमाही में जापान की अर्थव्यवस्था 0.5 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो बाजार के अनुमान से बेहतर रही। मजबूत उपभोक्ता खर्च, सार्वजनिक निवेश और निर्यात मांग ने आर्थिक गतिविधियों को सहारा दिया। हालांकि ऊंची ब्याज दरों के कारण निजी निवेश में सुस्ती बनी हुई है।
अमेरिकी बाजारों में भी शुक्रवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। मजबूत रोजगार आंकड़ों ने इस आशंका को बल दिया कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकता है। इसके परिणामस्वरूप नैस्डैक, एसएंडपी 500 और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिली। निवेशकों को चिंता है कि ऊंची ब्याज दरें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और तकनीकी क्षेत्र में निवेश की रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं।
विदेशी मुद्रा बाजार में भी दबाव देखने को मिला। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हुआ और 95.7375 के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.1800 पर बंद हुआ था।
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। एमसीएक्स पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना 1.33 प्रतिशत टूटकर 1,53,529 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। वहीं अमेरिकी 10 वर्षीय बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.563 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो वैश्विक वित्तीय बाजारों में ऊंची ब्याज दरों की आशंकाओं को दर्शाती है।
कॉर्पोरेट जगत की बात करें तो ईएमएस के शेयर 10 प्रतिशत से अधिक उछले। कंपनी को उत्तर प्रदेश जल निगम से 102.84 करोड़ रुपये की सीवरेज परियोजना के लिए सबसे कम बोलीदाता (एल-1) घोषित किया गया है। एच जी इंफ्रा इंजीनियरिंग के शेयर भी करीब तीन प्रतिशत चढ़े, क्योंकि कंपनी को उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना के लिए प्रोविजनल कंप्लीशन सर्टिफिकेट प्राप्त हुआ है।
क्रिएटिव न्यूटेक के शेयरों में 13 प्रतिशत से अधिक की तेजी आई। कंपनी को भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) और डिजिटल भारत निधि परियोजना के तहत एडवांस वर्क ऑर्डर प्राप्त हुआ है। वहीं क्यूपिड ब्रुअरीज एंड डिस्टिलरीज ने ओडिशा में एक विनिर्माण इकाई के अधिग्रहण की घोषणा के बाद लगभग पांच प्रतिशत की बढ़त दर्ज की।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में निवेशकों की नजरें पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर टिकी रहेंगी। जब तक इन मोर्चों पर स्पष्टता नहीं आती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहने और निवेशकों के सतर्क रुख अपनाने की संभावना है।

