Last Updated on July 31, 2026 1:23 am by BIZNAMA NEWS

एपेडा की पहल से मूल्य संवर्धित कृषि निर्यात को मिली नई उड़ान, किसानों को 50 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त लाभ मिलने की उम्मीद

हमारे बिजनेस संवाददाता से / नई दिल्ली

भारत के कृषि निर्यात और बिहार के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपेडा) ने बिहार से मूल्य संवर्धित (वैल्यू-एडेड) फ्लेवर्ड मखाने की पहली समुद्री खेप कनाडा के लिए रवाना कराई है। यह पहली बार है जब बिहार का प्रसंस्कृत और ब्रांडेड मखाना समुद्री मार्ग से कनाडा भेजा गया है। इस पहल से न केवल बिहार के प्रीमियम कृषि उत्पादों की वैश्विक पहचान मजबूत होगी, बल्कि किसानों को बेहतर कीमत मिलने के साथ उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।

करीब सात मीट्रिक टन फ्लेवर्ड मखाने की यह पहली खेप दो कंटेनरों में पैक कर 29 जुलाई को दरभंगा (बिहार) से रवाना की गई। यह खेप मुंद्रा बंदरगाह के माध्यम से कनाडा स्थित जेडकेवी फूड्स (ZKV Foods) को भेजी जा रही है। मखाने का प्रसंस्करण और पैकेजिंग न्यूट्रिविन एग्रो प्राइवेट लिमिटेड ने अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता एवं खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप की है।

यह निर्यात भारत के कृषि निर्यात क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है, क्योंकि इससे यह संदेश जाता है कि देश अब केवल कच्चे कृषि उत्पादों के बजाय मूल्य संवर्धित और ब्रांडेड खाद्य उत्पादों के निर्यात पर भी तेजी से ध्यान केंद्रित कर रहा है। यह उपलब्धि बिहार की खाद्य प्रसंस्करण, आधुनिक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यातोन्मुख विनिर्माण क्षमता को भी वैश्विक स्तर पर रेखांकित करती है।

खेप को रवाना करते हुए एपेडा के अध्यक्ष अभिषेक देव ने कहा कि यह सफलता किसानों, निर्यातकों, प्रसंस्करण इकाइयों, उद्योग जगत और एपेडा के साझा प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने कहा कि इन समन्वित प्रयासों ने बिहार के कृषि निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत किया है तथा राज्य के विशिष्ट कृषि उत्पादों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों के नए द्वार खोले हैं।

उन्होंने कहा कि मूल्य संवर्धन और ब्रांडिंग के माध्यम से भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है, जिससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ देश के कृषि निर्यात को भी नई गति मिलेगी।

इस अवसर पर आईसीएआर–पूर्वी क्षेत्र अनुसंधान परिसर, दरभंगा स्थित मखाना अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार, जिला कृषि विपणन पदाधिकारी लोकनाथ ठाकुर, एपेडा के वरिष्ठ अधिकारी, निर्यातक तथा मखाना उद्योग से जुड़े विभिन्न हितधारक उपस्थित रहे।

बिहार देश में मखाने का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है और भारत के कुल मखाना उत्पादन में उसकी हिस्सेदारी सबसे अधिक है। पोषक तत्वों से भरपूर मखाना, जिसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में फॉक्स नट्स (Fox Nuts) के नाम से जाना जाता है, पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में तेजी से लोकप्रिय हुआ है। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण कम वसा, अधिक प्रोटीन और ग्लूटेन-फ्री स्नैक के रूप में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लेवर्ड मखाने का निर्यात केवल उत्पाद के नए स्वरूप की शुरुआत नहीं है, बल्कि यह बिहार के पारंपरिक कृषि उत्पाद को वैश्विक प्रीमियम फूड कैटेगरी में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। विभिन्न स्वादों में उपलब्ध यह उत्पाद अंतरराष्ट्रीय उपभोक्ताओं के व्यापक वर्ग को आकर्षित करेगा और भारतीय मखाने की वैश्विक ब्रांड पहचान को मजबूत करेगा।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, मखाना उत्पादन और विपणन श्रृंखला में मूल्य संवर्धन के कारण किसानों को 50 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। प्रसंस्करण, आधुनिक पैकेजिंग और ब्रांडिंग के जरिए उत्पाद का बाजार मूल्य बढ़ा है, जिससे किसानों को बेहतर कीमत मिलने लगी है। मंत्रालय का मानना है कि यह मॉडल भारतीय कृषि क्षेत्र में मूल्य संवर्धन की अपार संभावनाओं को दर्शाता है और अन्य कृषि उत्पादों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।

मंत्रालय ने बताया कि एपेडा पिछले कई वर्षों से बिहार को एक प्रमुख कृषि निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। इसके तहत निर्यात अवसंरचना के विकास, गुणवत्ता मानकों के अनुपालन, किसानों और उद्यमियों के क्षमता निर्माण, बाजार संपर्क, मूल्य संवर्धन तथा निर्यातोन्मुख प्रसंस्करण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

एपेडा राज्य सरकारों, निर्यातकों, प्रसंस्करण इकाइयों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), निजी उद्योग तथा अन्य संबंधित संस्थाओं के साथ मिलकर भारत के कृषि निर्यात तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है। इसका उद्देश्य भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाना तथा किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है।

विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा के लिए फ्लेवर्ड मखाने की यह पहली समुद्री खेप भविष्य में उत्तर अमेरिका सहित यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अन्य विकसित बाजारों में भी भारतीय मखाने के निर्यात का मार्ग प्रशस्त करेगी। इससे बिहार के किसानों, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग और निर्यातकों के लिए नए व्यावसायिक अवसर पैदा होंगे तथा राज्य की पहचान विश्व स्तर पर एक उच्च गुणवत्ता वाले मूल्य संवर्धित कृषि उत्पादक के रूप में और अधिक मजबूत होगी।