Last Updated on July 1, 2026 6:41 pm by BIZNAMA NEWS

दिल्ली में छह लेन की द्वारका सुरंग और यूपी में कानपुर-कबरई हाई-स्पीड कॉरिडोर से मिलेगी कनेक्टिविटी को नई रफ्तार

हमारे व्यवसाय संवाददाता

केंद्र सरकार ने देश के सड़क एवं परिवहन बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए बुधवार को 14,100 करोड़ रुपये से अधिक की दो महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी। इनमें राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में द्वारका एक्सप्रेसवे को वसंत कुंज से जोड़ने वाली छह लेन की सुरंग तथा उत्तर प्रदेश में कानपुर-कबरई एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे का निर्माण शामिल है।

इन दोनों परियोजनाओं का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम करना, माल परिवहन को अधिक तेज और किफायती बनाना, क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करना तथा आर्थिक गतिविधियों को गति देना है। सरकार का अनुमान है कि इन परियोजनाओं से निर्माण अवधि के दौरान 1.35 करोड़ से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष मानव-दिवस (पर्सन-डेज) रोजगार का सृजन होगा।

₹6,969 करोड़ की द्वारका सुरंग से बदलेगी दिल्ली की यातायात व्यवस्था

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय राजमार्ग-148एई (NH-148AE) पर 8.1 किलोमीटर लंबी छह लेन की सुरंग के निर्माण को मंजूरी दी है। लगभग 6,969 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली यह परियोजना द्वारका एक्सप्रेसवे और अर्बन एक्सटेंशन रोड-2 (UER-II) को नेल्सन मंडेला मार्ग, वसंत कुंज से जोड़ेगी।

यह सुरंग पश्चिमी और दक्षिणी दिल्ली के बीच आवागमन को कहीं अधिक तेज और सुगम बनाएगी। साथ ही, राष्ट्रीय राजधानी के कई व्यस्त मार्गों पर वाहनों का दबाव कम होगा, जिससे यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।

कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस परियोजना से द्वारका, गुरुग्राम और दक्षिण दिल्ली के बीच निर्बाध संपर्क स्थापित होगा और शहरी यातायात व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा।

परियोजना के तहत नेल्सन मंडेला मार्ग पर 1.8 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड सड़क का भी निर्माण किया जाएगा, जिससे इस व्यस्त जंक्शन पर लगने वाले ट्रैफिक जाम में उल्लेखनीय कमी आएगी।

सरकार ने यह भी बताया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) राजधानी में एम्स से महिपालपुर तक एलिवेटेड कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर भी काम कर रहा है, जिससे दक्षिण दिल्ली और एयरपोर्ट कॉरिडोर में यातायात और सुगम होगा।

सरकार के अनुसार, केवल दिल्ली सुरंग परियोजना से ही लगभग 7.54 लाख प्रत्यक्ष तथा 9.80 लाख अप्रत्यक्ष मानव-दिवस रोजगार का सृजन होगा, जिससे निर्माण, सीमेंट, इस्पात, इंजीनियरिंग और अन्य संबंधित उद्योगों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।

₹7,145 करोड़ का कानपुर-कबरई हाईवे देगा बुंदेलखंड को नई रफ्तार

कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश में 117.7 किलोमीटर लंबे कानपुर-कबरई खंड के निर्माण को भी मंजूरी प्रदान की है। राष्ट्रीय राजमार्ग-34 (NH-34) पर बनने वाली यह चार/छह लेन एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड परियोजना लगभग 7,145 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जाएगी।

यह हाई-स्पीड कॉरिडोर कानपुर और बुंदेलखंड क्षेत्र के बीच तेज, सुरक्षित और निर्बाध सड़क संपर्क उपलब्ध कराएगा तथा मध्य प्रदेश के सागर, भोपाल और अन्य प्रमुख शहरों तक बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा।

सरकार के अनुसार, यह परियोजना एनएच-34, एनएच-35, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, कानपुर रिंग रोड तथा एसएच-46, एसएच-91, एसएच-10बी और एसएच-42 सहित अनेक राष्ट्रीय एवं राज्य राजमार्गों से जुड़ेगी। इससे पूरे क्षेत्र का सड़क नेटवर्क और अधिक मजबूत होगा तथा औद्योगिक एवं व्यावसायिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे की परिचालन गति को ध्यान में रखकर तैयार किए जा रहे इस कॉरिडोर से कानपुर से कबरई की यात्रा अवधि मौजूदा साढ़े तीन घंटे से घटकर लगभग डेढ़ घंटे रह जाएगी। इससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, माल परिवहन तेज होगा और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा।

इस परियोजना से लगभग 1.2 करोड़ मानव-दिवस प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है, जो इसे हाल के वर्षों की सबसे बड़ी रोजगार सृजन वाली सड़क परियोजनाओं में शामिल करता है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर आधारित विकास रणनीति को मिला नया बल

दोनों परियोजनाओं को मंजूरी देकर केंद्र सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आर्थिक विकास को गति देने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर निवेश उसकी प्राथमिकता बना हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली की सुरंग परियोजना शहरी यातायात प्रबंधन को नई दिशा देगी, जबकि कानपुर-कबरई हाई-स्पीड कॉरिडोर उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के बीच औद्योगिक, कृषि एवं व्यापारिक संपर्क को मजबूत करेगा।

बेहतर सड़क संपर्क से यात्रा समय में कमी, ईंधन की बचत, लॉजिस्टिक्स लागत में गिरावट, औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहन और क्षेत्रीय आर्थिक विकास को गति मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही ये परियोजनाएं निर्माण क्षेत्र में रोजगार सृजन और सरकार की इन्फ्रास्ट्रक्चर-आधारित विकास रणनीति को भी मजबूत आधार प्रदान करेंगी।