Last Updated on July 2, 2026 11:20 pm by BIZNAMA NEWS

हमारे बिजनेस संवाददाता

घरेलू शेयर बाजार ने गुरुवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में मजबूती का प्रदर्शन करते हुए व्यापक आधार पर बढ़त दर्ज की। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) कंपनियों में जोरदार खरीदारी, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक वार्ताओं से भू-राजनीतिक जोखिम कम होने की उम्मीद ने निवेशकों की धारणा को सकारात्मक बनाए रखा। ऑटोमोबाइल कंपनियों के मजबूत बिक्री आंकड़ों और चुनिंदा बैंकिंग शेयरों में खरीदारी ने भी बाजार को सहारा दिया।

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 579.48 अंक यानी 0.75 प्रतिशत की बढ़त के साथ 77,502.12 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी-50 169.85 अंक यानी 0.71 प्रतिशत चढ़कर 24,175.70 पर पहुंच गया। निफ्टी पहली बार कई सत्रों के बाद 24,150 के महत्वपूर्ण स्तर से ऊपर बंद हुआ। पिछले दो कारोबारी दिनों में सेंसेक्स में 1.33 प्रतिशत और निफ्टी में 1.29 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है, जो बाजार में बढ़ते विश्वास का संकेत है।

आईटी सेक्टर बना बाजार की तेजी का सबसे बड़ा आधार

दिनभर की तेजी का नेतृत्व सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र ने किया। पिछले चार सत्रों में तेज गिरावट झेलने के बाद आईटी शेयरों में निवेशकों ने मूल्य आधारित खरीदारी (Value Buying) की। इसके परिणामस्वरूप निफ्टी आईटी इंडेक्स 4.64 प्रतिशत उछलकर चार दिनों की लगातार गिरावट का सिलसिला तोड़ने में सफल रहा।

इन्फोसिस 5.82 प्रतिशत की बढ़त के साथ सेंसेक्स और निफ्टी दोनों के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहा। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) 4.45 प्रतिशत, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स 5.93 प्रतिशत, एमफैसिस 5.68 प्रतिशत, कोफोर्ज 5.20 प्रतिशत, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, एलटीआईमाइंडट्री और विप्रो ने भी मजबूत बढ़त दर्ज की।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि हालिया गिरावट के बाद आईटी कंपनियों के मूल्यांकन आकर्षक स्तर पर पहुंच गए थे। साथ ही निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिका और यूरोप में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता धीरे-धीरे कम होने पर वैश्विक तकनीकी खर्च में सुधार देखने को मिल सकता है।

छोटे और मझोले शेयरों में भी खरीदारी

तेजी केवल ब्लूचिप कंपनियों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में भी खरीदारी का रुख मजबूत रहा।

बीएसई मिडकैप इंडेक्स 0.65 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 0.98 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। बाजार की चौड़ाई सकारात्मक रही, जहां बीएसई में कारोबार करने वाले 2,536 शेयरों में तेजी दर्ज की गई, जबकि 1,740 शेयरों में गिरावट आई और 191 शेयर बिना बदलाव के बंद हुए।

इसी दौरान बाजार की अस्थिरता का संकेत देने वाला इंडिया वीआईएक्स 7.21 प्रतिशत गिरकर 12.29 पर आ गया। विश्लेषकों के अनुसार वीआईएक्स में गिरावट यह संकेत देती है कि निवेशकों के बीच निकट अवधि को लेकर घबराहट कम हुई है।

कच्चे तेल में गिरावट भारत के लिए राहत

अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 1.48 प्रतिशत गिरकर 70.51 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। अमेरिका और ईरान के बीच जारी वार्ता से पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद बनी है, जिससे तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाएं घटी हैं।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से आयात बिल कम होने, महंगाई पर दबाव घटने और चालू खाते के घाटे में सुधार की संभावना बढ़ जाती है। यही कारण है कि तेल की नरम कीमतों को भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

राजकोषीय घाटे के आंकड़ों पर भी नजर

वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार मई तक चालू वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दो महीनों में केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा 1.62 लाख करोड़ रुपये रहा, जो पूरे वर्ष के बजटीय लक्ष्य का 9.6 प्रतिशत है। पिछले वर्ष समान अवधि में यह आंकड़ा केवल 0.8 प्रतिशत था।

सरकार की कुल प्राप्तियां 7.19 लाख करोड़ रुपये रहीं, जबकि कुल व्यय 8.81 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया। कुल राजस्व प्राप्तियों में 3.48 लाख करोड़ रुपये कर राजस्व और 3.51 लाख करोड़ रुपये गैर-कर राजस्व शामिल है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष की शुरुआत में पूंजीगत एवं राजस्व व्यय अपेक्षाकृत अधिक रहने के कारण शुरुआती महीनों के आंकड़ों से पूरे वर्ष का आकलन नहीं किया जाना चाहिए, लेकिन आने वाले महीनों में कर संग्रह की गति महत्वपूर्ण रहेगी।

ऑटो कंपनियों की बिक्री ने दिया समर्थन

जून माह के बिक्री आंकड़ों ने ऑटोमोबाइल शेयरों को भी चर्चा में रखा।

टीवीएस मोटर कंपनी ने जून में 47 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 5.90 लाख वाहनों की बिक्री दर्ज की, जिसके बाद उसके शेयर 3.72 प्रतिशत चढ़ गए।

फोर्स मोटर्स ने 23.5 प्रतिशत बिक्री वृद्धि दर्ज की और उसके शेयर 5.66 प्रतिशत उछल गए।

बजाज ऑटो ने कुल बिक्री में 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि मारुति सुजुकी इंडिया ने 19.28 प्रतिशत की बिक्री वृद्धि की सूचना दी। हालांकि मारुति का शेयर मामूली कमजोरी के साथ बंद हुआ, जिसे विश्लेषक मुनाफावसूली का परिणाम मान रहे हैं।

बैंकिंग शेयरों में मिला-जुला रुख

बैंकिंग क्षेत्र में निजी बैंकों का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर रहा। आईसीआईसीआई बैंक 1.54 प्रतिशत की बढ़त के साथ बाजार को मजबूती देने वाले प्रमुख शेयरों में शामिल रहा।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बैंक ऑफ इंडिया, धनलक्ष्मी बैंक, पंजाब एंड सिंध बैंक, कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक तथा तमिलनाड मर्केंटाइल बैंक ने अपने तिमाही कारोबारी अपडेट में ऋण और जमा कारोबार में अच्छी वृद्धि दर्ज की, जिससे इनके शेयरों में तेजी देखी गई।

दूसरी ओर बैंक ऑफ बड़ौदा 4.34 प्रतिशत गिर गया। बैंक ने यूएई की पूर्व स्वास्थ्य सेवा कंपनी एनएमसी हेल्थ से जुड़े लंबे समय से चल रहे कानूनी विवाद को अदालत के बाहर सुलझाने का निर्णय लिया है। समझौते के तहत बैंक की अबू धाबी शाखा 60 करोड़ अमेरिकी डॉलर का भुगतान करेगी। बैंक का कहना है कि यह समझौता बिना किसी कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार किए किया गया है और इससे वर्षों से चल रहा विवाद समाप्त हो जाएगा।

कॉरपोरेट जगत में रही हलचल

खनन कंपनी एनएमडीसी ने जून में लौह अयस्क उत्पादन में 44 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की, जिससे उसके शेयर मजबूत हुए।

कोल इंडिया को उत्तर प्रदेश के जालौन सोलर पार्क में 600 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित करने का 2,831 करोड़ रुपये का ठेका मिला।

क्रॉम्पटन ग्रीव्स कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स को महाराष्ट्र में सौर ऊर्जा चालित जल पंपों की आपूर्ति का लगभग 30 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला।

नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की कंपनी जीके एनर्जी को 48 करोड़ रुपये की रूफटॉप सोलर परियोजना मिली, जबकि यूनाइटेड ड्रिलिंग टूल्स को वेदांता से नया ऑर्डर प्राप्त हुआ।

रिटेल क्षेत्र की कंपनी बाजार स्टाइल रिटेल ने पहली तिमाही में 29 प्रतिशत राजस्व वृद्धि दर्ज की, जिसके बाद उसके शेयर ऊपरी सर्किट पर बंद हुए।

आईपीओ बाजार में निवेशकों का उत्साह कायम

प्राथमिक बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी बनी हुई है। नैक पैकेजिंग के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) को दूसरे दिन तक 7.13 गुना अभिदान प्राप्त हुआ। यह निर्गम 3 जुलाई को बंद होगा।

उधर, सीएसएम टेक्नोलॉजीज का शेयर अपने निर्गम मूल्य 113 रुपये पर सूचीबद्ध होने के बाद लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 107.35 रुपये पर बंद हुआ।

आगे की दिशा

विश्लेषकों का मानना है कि बाजार की अगली चाल अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर निर्भर करेगी। विशेष रूप से अमेरिका के जून माह के रोजगार आंकड़े, फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, कच्चे तेल की कीमतों और पहली तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों पर निवेशकों की नजर रहेगी।

यदि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव नियंत्रित रहता है, कच्चे तेल की कीमतें नरम बनी रहती हैं और विदेशी संस्थागत निवेशकों का निवेश जारी रहता है, तो भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुझान आगे भी कायम रहने की संभावना है। वहीं आगामी तिमाही परिणाम यह तय करेंगे कि वर्तमान तेजी कितनी टिकाऊ साबित होती है।

यह संस्करण बिज़नामा की शैली को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है—इसमें केवल घटनाओं का विवरण नहीं, बल्कि उनके व्यावसायिक प्रभाव, बाजार विश्लेषण और आर्थिक संदर्भ पर भी विशेष जोर दिया गया है।