Last Updated on July 6, 2026 7:03 pm by BIZNAMA NEWS

Business Correspondent

घरेलू शेयर बाजार में सोमवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में तेजी का सिलसिला जारी रहा। पहली तिमाही के कारोबारी अपडेट उम्मीद से बेहतर रहने, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, मानसून की संतोषजनक प्रगति और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने से निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। इन सकारात्मक संकेतों के बीच सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। निफ्टी 24,400 अंक के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 78,000 के ऊपर अपनी बढ़त बनाए रखने में सफल रहा।

बीएसई सेंसेक्स 521.16 अंक यानी 0.67 प्रतिशत की बढ़त के साथ 78,285.07 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 सूचकांक 159.50 अंक यानी 0.66 प्रतिशत चढ़कर 24,430.35 अंक पर पहुंच गया। पिछले चार कारोबारी सत्रों में दोनों प्रमुख सूचकांक करीब 2.36 प्रतिशत मजबूत हुए हैं, जिससे संकेत मिलता है कि बाजार में तेजी का रुख अभी कायम है।

दिनभर के कारोबार में बैंकिंग, ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, ऑयल एंड गैस तथा मेटल शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के शेयरों में मुनाफावसूली का दबाव बना रहा। बाजार सहभागियों का मानना है कि कंपनियों के पहली तिमाही के कारोबारी अपडेट उम्मीद से बेहतर आने के कारण निवेशकों ने चुनिंदा क्षेत्रों में खरीदारी बढ़ाई।

निफ्टी की बढ़त में सबसे बड़ा योगदान एचडीएफसी बैंक का रहा, जिसका शेयर 3.36 प्रतिशत चढ़ा। बैंक ने जून तिमाही के कारोबारी अपडेट में औसत एडवांसेज अंडर मैनेजमेंट में 10.8 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्ज की। रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 1.36 प्रतिशत और आईसीआईसीआई बैंक 1.07 प्रतिशत मजबूत हुआ। इन तीनों हैवीवेट शेयरों ने सूचकांकों को नई ऊंचाई तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।

हालांकि प्रमुख सूचकांकों की तुलना में व्यापक बाजार की चाल कुछ धीमी रही। बीएसई मिडकैप सूचकांक 0.47 प्रतिशत और स्मॉलकैप सूचकांक 0.37 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुए। बाजार की चौड़ाई हालांकि नकारात्मक रही। बीएसई पर कारोबार करने वाले 2,055 शेयरों में तेजी रही, जबकि 2,286 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए और 210 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। इससे स्पष्ट है कि तेजी मुख्य रूप से चुनिंदा बड़े शेयरों के नेतृत्व में रही।

बाजार में उतार-चढ़ाव का संकेत देने वाला इंडिया वीआईएक्स मामूली 0.16 प्रतिशत बढ़कर 11.82 पर पहुंच गया। इसके बावजूद अस्थिरता का स्तर अभी भी अपेक्षाकृत कम बना हुआ है, जो निवेशकों के सकारात्मक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

ऋण बाजार में भी मजबूती का रुख दिखाई दिया। भारत के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड घटकर 6.679 प्रतिशत पर आ गई, जो पिछले कारोबारी सत्र में 6.707 प्रतिशत थी। विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले थोड़ा कमजोर होकर 95.40 पर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि पिछले सत्र में यह 95.19 पर बंद हुआ था।

कमोडिटी बाजार में अगस्त डिलीवरी वाले एमसीएक्स गोल्ड वायदा में 0.32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 1,46,901 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 100.83 पर मजबूत हुआ, जबकि अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड घटकर 4.46 प्रतिशत रही।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक कारक रही। ओपेक+ ने अगस्त से प्रतिदिन 1.88 लाख बैरल अतिरिक्त उत्पादन बढ़ाने का निर्णय लिया है। जून और जुलाई में भी उत्पादन बढ़ाया गया था। बढ़ती आपूर्ति की संभावना से ब्रेंट क्रूड 71.91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास स्थिर रहा। तेल की कीमतों में नरमी से आयात लागत और महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था और कॉरपोरेट आय दोनों को समर्थन मिल सकता है।

वैश्विक बाजारों का रुख मिला-जुला रहा। यूरोप के अधिकांश शेयर बाजारों में पिछले सप्ताह की तेजी के बाद मुनाफावसूली देखी गई। निवेशकों का ध्यान अब इस सप्ताह आने वाले केंद्रीय बैंकों के बयानों और प्रमुख आर्थिक आंकड़ों पर है। यूरोजोन में मई के दौरान उत्पादक मूल्य सूचकांक में 0.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि वार्षिक उत्पादक महंगाई बढ़कर 5.9 प्रतिशत हो गई। खुदरा बिक्री में भी मामूली सुधार दर्ज किया गया।

एशियाई बाजारों में भी मिश्रित रुख रहा। अमेरिका-ईरान के बीच कोई नया तनाव सामने नहीं आने और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सामान्य रहने से निवेशकों की चिंता कम हुई। इसके अलावा अमेरिका के कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद यह संभावना बढ़ी है कि फेडरल रिजर्व जुलाई की बैठक में ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा। बाजार अब फेड की बैठक के मिनट्स का इंतजार कर रहा है, जिससे आगे की मौद्रिक नीति के संकेत मिल सकते हैं।

कॉरपोरेट मोर्चे पर कई शेयर कारोबारियों के आकर्षण का केंद्र रहे। इंडसइंड बैंक 3.76 प्रतिशत चढ़ा क्योंकि बैंक की जमा राशि सालाना आधार पर 4.5 प्रतिशत बढ़कर 4.15 लाख करोड़ रुपये हो गई। करूर वैश्य बैंक 4.87 प्रतिशत मजबूत हुआ, जबकि बंधन बैंक में 4.06 प्रतिशत की तेजी रही। इसके विपरीत बैंक ऑफ महाराष्ट्र का शेयर 2.29 प्रतिशत गिर गया, हालांकि बैंक का कुल कारोबार 19 प्रतिशत बढ़ा है।

डिक्सन टेक्नोलॉजीज के शेयरों में लगभग सात प्रतिशत की तेजी आई। एक विदेशी ब्रोकरेज ने कंपनी पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखते हुए लक्ष्य मूल्य बढ़ाकर 16,200 रुपये कर दिया। फरमेंटा बायोटेक के शेयर 13.78 प्रतिशत उछले। कंपनी के प्लांट-आधारित विटामिन D3 उत्पाद ‘विटाडी ग्रीन’ को एफएसएसएआई की मंजूरी मिलने से अब इसका उपयोग फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों और न्यूट्रास्यूटिकल उत्पादों में किया जा सकेगा।

फाल्कन कॉन्सेप्ट्स में 20 प्रतिशत का अपर सर्किट लगा। कंपनी को स्प्लेंडर इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी से 101.93 करोड़ रुपये का कार्यादेश मिला है, जो उसके मौजूदा बाजार पूंजीकरण से तीन गुना से अधिक है। दूसरी ओर सुप्रिया लाइफसाइंस के शेयर 11.34 प्रतिशत टूट गए। कंपनी ने बताया कि सीमा शुल्क विभाग की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन एंड इंटेलिजेंस शाखा ने उसके एक वरिष्ठ कर्मचारी के खिलाफ न्यायिक कार्रवाई शुरू की है।

प्राथमिक बाजार में आस्था स्पिनटेक्स की बाजार में शुरुआत कमजोर रही। कंपनी का शेयर 136 रुपये के निर्गम मूल्य के मुकाबले 130 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ। हालांकि बाद में इसमें सुधार आया और यह 136.45 रुपये पर बंद हुआ, जो निर्गम मूल्य से 0.33 प्रतिशत अधिक है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आगामी दिनों में कंपनियों के तिमाही नतीजे, वैश्विक केंद्रीय बैंकों के संकेत, कच्चे तेल की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां घरेलू बाजार की दिशा तय करेंगी। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं और कॉरपोरेट आय अनुमान के अनुरूप आती है, तो बाजार में सकारात्मक रुख आगे भी जारी रह सकता है।